छत्तीसगढ़
एक घंटा पहले
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जगदलपुर के जायके में शामिल हुआ बिहार का स्वाद
बिहार का मशहूर पारंपरिक व्यंजन लिट्टी-चोखा अब छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में भी अपनी खास जगह बना चुका है। अगर आप भी जगदलपुर में रहते हैं और बिहार के असली देसी स्वाद की तलाश में हैं, तो शहीद पार्क स्थित चौपाटी आपके लिए एक बेहतरीन स्थान हो सकता है। बीते कुछ समय से यह स्थान लिट्टी-चोखा प्रेमियों के बीच काफी लोकप्रिय हो गया है, जहां शाम ढलते ही जायके के दीवानों की भीड़ जुटनी शुरू हो जाती है।
विपिन साहू के हाथों का कमाल
शहीद पार्क की चौपाटी पर लिट्टी-चोखा की यह दुकान पिछले एक साल से संचालित हो रही है। इसके संचालक विपिन साहू हैं, जो पूरी तरह से पारंपरिक और देसी अंदाज में लिट्टी तैयार करते हैं। विपिन का कहना है कि वे इस काम को बेहद मेहनत और साफ-सफाई के साथ करते हैं ताकि ग्राहकों को घर जैसा स्वाद मिल सके। उनके द्वारा आग पर सेकी गई लिट्टी का स्वाद इतना लाजवाब होता है कि जो एक बार चख ले, वह बार-बार यहां आने के लिए मजबूर हो जाता है।
दुकान का समय और कीमतें
यदि आप यहां लिट्टी-चोखा का लुत्फ उठाना चाहते हैं, तो यह दुकान दोपहर 1 बजे से रात 10 बजे तक खुली रहती है। यहां कीमतों को आम लोगों की पहुंच में रखा गया है ताकि हर कोई इसका आनंद ले सके। दुकान पर मिलने वाली खान-पान की दरों का विवरण इस प्रकार है:
- फुल प्लेट लिट्टी-चोखा: 60 रुपये
- हाफ प्लेट लिट्टी-चोखा: 30 रुपये
प्रतिदिन होती है भारी बिक्री
विपिन साहू बताते हैं कि शहर के लोगों को उनका लिट्टी-चोखा काफी पसंद आ रहा है। उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे प्रतिदिन औसतन 60-70 प्लेट लिट्टी-चोखा बेच देते हैं। दोपहर के बाद से जैसे-जैसे शाम गहराती है, दुकान पर ग्राहकों की संख्या बढ़ती जाती है। आग पर धीमी आंच में पकाई गई लिट्टी और उसके साथ परोसा जाने वाला लजीज चोखा और तीखी चटनी इस व्यंजन को और भी खास बना देती है।
अन्य व्यंजन भी उपलब्ध
केवल लिट्टी-चोखा ही नहीं, बल्कि इस दुकान पर कई अन्य स्वादिष्ट व्यंजन भी मिलते हैं। अगर आप कुछ अलग आजमाना चाहते हैं, तो आप यहां के पराठे, सत्तू पराठा और सलोनी का भी आनंद ले सकते हैं। साफ-सफाई और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखते हुए तैयार किए गए ये व्यंजन जगदलपुर के लोगों को खूब लुभा रहे हैं। यही कारण है कि शहीद पार्क की यह चौपाटी अब बिहारी स्वाद के दीवानों के लिए एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरी है।
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