छत्तीसगढ़ में विकास का नया रोडमैप: बस्तर बनेगा अंतरराष्ट्रीय पर्यटन का बड़ा केंद्र, जिलों के लिए तैयार होगा अलग आर्थिक मॉडल छत्तीसगढ़ 2 महीने पहले 82
छत्तीसगढ़ को विकसित राज्य बनाने के उद्देश्य से आयोजित चिंतन शिविर 3.0 में कई अहम फैसले लिए गए हैं, जिनमें बस्तर को वैश्विक पर्यटन स्थल के रूप में उभारना और प्रशासनिक स्तर पर AI का उपयोग शामिल है।

छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य को विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए एक बेहद महत्वाकांक्षी और व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। हाल ही में संपन्न हुए दो दिवसीय चिंतन शिविर 3.0 में नीति विशेषज्ञों और प्रशासनिक अधिकारियों ने मिलकर राज्य के सर्वांगीण विकास का एक नया खाका खींचा है। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य छत्तीसगढ़ के प्रत्येक हिस्से का संतुलित विकास सुनिश्चित करना और आधुनिक तकनीकों के सहारे सरकारी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और सुगम बनाना है। इस नई नीति के तहत राज्य के बस्तर क्षेत्र को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की तैयारी की जा रही है, जिससे इस वनांचल क्षेत्र की पूरी तस्वीर बदल जाएगी।

बस्तर को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन हब बनाने की तैयारी

बस्तर अपनी बेमिसाल प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध जनजातीय संस्कृति और विशिष्ट पारंपरिक विरासत के लिए जाना जाता है। चिंतन शिविर में विशेषज्ञों ने इस बात पर विशेष बल दिया कि बस्तर के भीतर अंतरराष्ट्रीय स्तर का पर्यटन केंद्र बनने की अपार क्षमताएं मौजूद हैं। इसे एक प्रमुख वैश्विक पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने के लिए सरकार एक जिम्मेदार पर्यटन मॉडल पर काम करेगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पर्यटन गतिविधियों से यहां के नाजुक पर्यावरण को कोई नुकसान न पहुंचे और स्थानीय निवासियों को रोजगार के अधिक से अधिक अवसर मिल सकें।

बस्तर में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए बेहतर सड़कों के निर्माण, विश्वस्तरीय होटलों की स्थापना और अन्य नागरिक सुविधाओं के विस्तार पर ध्यान दिया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया में स्थानीय समुदाय की भागीदारी को अनिवार्य बनाया जाएगा ताकि पर्यटन से होने वाला आर्थिक लाभ सीधे तौर पर वहां के मूल निवासियों तक पहुंच सके।

हर जिले की जरूरत के हिसाब से अलग विकास नीति

इस चिंतन शिविर का एक और बड़ा और महत्वपूर्ण बिंदु यह रहा कि छत्तीसगढ़ के सभी जिलों के लिए एक जैसी नीति अपनाने के बजाय, हर जिले की विशिष्ट आर्थिक क्षमता और वहां उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों के आधार पर अलग-अलग विकास योजनाएं तैयार की जाएंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस रणनीति से विकास का पहिया अधिक तेजी से और संतुलित तरीके से घूमेगा।

हर जिले की वास्तविक प्रगति और उसकी क्षमता का सही आकलन करने के लिए जिलावार GDP मॉडल लागू करने पर भी गंभीरता से विचार किया गया है। सबका प्रयास की इस अवधारणा के माध्यम से विकास आधारित राजनीति को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे राज्य का हर हिस्सा आत्मनिर्भर बन सके और अपनी आर्थिक क्षमता का पूर्ण उपयोग कर सके।

चिंतन शिविर 3.0 के मुख्य सुझाव और रणनीतियां

इस दो दिवसीय चिंतन शिविर में विशेषज्ञों द्वारा कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं, जिन्हें जल्द ही धरातल पर उतारने की तैयारी की जा रही है:

  • बस्तर का कायाकल्प: बस्तर की अद्वितीय प्राकृतिक सुंदरता और जनजातीय संस्कृति को संजोते हुए इसे एक जिम्मेदार और पर्यावरण-अनुकूल अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा।
  • जिलावार जीडीपी मॉडल: प्रत्येक जिले की वास्तविक क्षमता और स्थानीय संसाधनों के आधार पर अलग विकास योजनाएं बनाई जाएंगी ताकि संतुलित विकास हो सके।
  • तकनीक का समावेश: सरकारी कामकाज की गति, पारदर्शिता और पहुंच को बेहतर करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाएगा।
  • प्राकृतिक खेती को बढ़ावा: पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आय बढ़ाने के लिए प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने वाली नीतियों पर विशेष बल दिया जाएगा।

नीतियों और प्रशासनिक फैसलों में बदले जाएंगे सुझाव: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस चिंतन शिविर के समापन पर अपने विचार साझा करते हुए कहा कि यह मंच अब केवल चर्चा और विचार-विमर्श तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह शासन व्यवस्था में सुधार का एक बेहद सशक्त माध्यम बन चुका है। उन्होंने पूर्व में आयोजित हुए शिविरों की सफलता का उल्लेख करते हुए बताया कि पिछले सुझावों पर अमल करते हुए राज्य में ई-ऑफिस प्रणाली को लागू किया गया है।

इसके अतिरिक्त, जनता की समस्याओं के त्वरित निवारण के लिए मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 की शुरुआत की गई है। साथ ही, सेवा सेतु पोर्टल के माध्यम से वर्तमान में 36 विभागों की 520 से अधिक महत्वपूर्ण सरकारी सेवाएं नागरिकों को ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से आश्वस्त किया कि इस तीसरे चिंतन शिविर से प्राप्त हुए सभी मूल्यवान सुझावों को भी बहुत जल्द सरकारी नीतियों और प्रशासनिक निर्णयों का हिस्सा बनाया जाएगा, ताकि राज्य के हर नागरिक तक विकास का लाभ पहुंच सके।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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