मानसून में बंपर मुनाफा: महज 25 हजार के खर्च में बरबटी की खेती से कमाएं 1 लाख रुपये, अपनाएं यह तरीका छत्तीसगढ़ 3 महीने पहले 127
बरसात के मौसम में धान की पारंपरिक खेती से हटकर बस्तर के किसान कमलू मौर्य ने बरबटी की खेती से शानदार कमाई का उदाहरण पेश किया है। मल्चिंग तकनीक का इस्तेमाल कर वे कम लागत में अधिक लाभ प्राप्त कर रहे हैं।

मानसून में खेती का नया विकल्प

बरसात का मौसम आते ही देश के अधिकांश किसान धान की फसल बोने में जुट जाते हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में कुछ किसान लीक से हटकर खेती कर रहे हैं। बस्तर के प्रगतिशील किसान कमलू मौर्य ने इस मानसून सीजन में बरबटी की खेती को अपनी आय का जरिया बनाया है। वे परंपरागत तरीकों के बजाय हाईटेक मल्चिंग विधि का उपयोग कर रहे हैं, जो न केवल कम मेहनत वाली है बल्कि आर्थिक रूप से काफी फायदेमंद भी साबित हो रही है। बाजार में बरबटी की हमेशा भारी मांग बनी रहती है, जिसके कारण इसका दाम भी अच्छा मिलता है।

खेती की लागत और कमाई का गणित

कमलू मौर्य के अनुसार, बरबटी की खेती बेहद कम निवेश में शुरू की जा सकती है। उन्होंने लगभग आधे एकड़ जमीन पर इसकी बुवाई की है। इस पूरे प्रोजेक्ट में खाद, बीज और तकनीक समेत कुल 25 हजार रुपये तक का खर्च आता है। वहीं, फसल तैयार होने के बाद बाजार में इसकी बिक्री से उन्हें 70 हजार से 1 लाख रुपये तक का मुनाफा प्राप्त हो रहा है। यह मुनाफा इस बात का प्रमाण है कि सही तकनीक और समय का सही चयन किसानों की किस्मत बदल सकता है।

हाईटेक मल्चिंग और बुवाई की प्रक्रिया

बस्तर के किसान कमलू मौर्य ने इस खेती के लिए बरबटी की लक्ष्मी वैरायटी का चयन किया है। हाईटेक तरीके से खेती करने के लिए उन्होंने निम्नलिखित चरणों का पालन किया है:

  • सबसे पहले खेत की मिट्टी को भुरभुरा बनाने के लिए दो से तीन बार अच्छी तरह जुताई की गई और रोटावेटर का उपयोग किया गया।
  • इसके बाद खेत में बेड तैयार किए गए, जहां प्रत्येक बेड के बीच चार फीट की दूरी रखी गई है।
  • पौधों के बीच उचित जगह बनी रहे, इसके लिए हर पौधे के बीच दो फीट की दूरी पर बीज लगाए गए हैं।

बरसात के दौरान बरबटी की फसल को नुकसान से बचाने के लिए उन्होंने जल निकासी की उचित व्यवस्था भी की है ताकि जड़ों में पानी न जमा हो। मल्चिंग विधि अपनाने के कारण खरपतवार की समस्या कम होती है और नमी बनी रहती है, जिससे उत्पादन की गुणवत्ता और मात्रा दोनों में बढ़ोतरी होती है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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