छत्तीसगढ़
एक घंटा पहले
3
विचारों
छत्तीसगढ़ की 18 महिला बाइकर्स ने 'मोटो क्वींस एडवेंचर' अभियान के अंतर्गत रायपुर से बारनवापारा अभ्यारण्य तक की यात्रा पूरी की. यह कोई आम पर्यटन सफर नहीं था, बल्कि साहस और सामाजिक बदलाव की एक जीती-जागती मिसाल बन गया. राज्य में महिलाओं की भूमिका अब पारंपरिक सीमाओं से आगे बढ़कर एडवेंचर, नेतृत्व और सामाजिक जागरूकता के नए आयाम तय कर रही है.
यह राइड सिर्फ बाइक चलाने तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसके साथ महिला सशक्तिकरण, इको टूरिज्म, सड़क सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का सशक्त संदेश भी जुड़ा रहा. सैकड़ों किलोमीटर का रास्ता तय करने वाली इन महिलाओं ने यह दिखा दिया कि उचित अवसर और आत्मविश्वास मिलने पर महिलाएं हर क्षेत्र में नई मिसाल कायम कर सकती हैं.
अलग-अलग पृष्ठभूमि से जुड़ीं महिलाएं
इस अभियान की सबसे खास बात यह रही कि इसमें शामिल ज्यादातर महिलाएं भिन्न-भिन्न पेशों और सामाजिक पृष्ठभूमि से आती हैं. कोई गृहिणी है, कोई पेशेवर तो कोई छात्रा. घर-परिवार की जिम्मेदारियों के बीच से समय निकालकर इन सभी ने यात्रा में हिस्सा लिया.
बारनवापारा पहुंचकर इन महिला बाइकर्स ने न केवल पर्यटन को बढ़ावा देने की बात कही, बल्कि सड़क सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और जिम्मेदार यात्रा संस्कृति को लेकर भी लोगों को जागरूक किया. यह पहल अब छत्तीसगढ़ में महिलाओं के नेतृत्व वाले सामाजिक अभियानों की नई पहचान के रूप में उभर रही है.
कांकेर की वनिका से हुई शुरुआत
मोटो क्वींस एडवेंचर की नींव कांकेर निवासी वनिका (वानी) पिल्लई की एक सोलो बाइक यात्रा से पड़ी. नवंबर-दिसंबर 2025 में उन्होंने अकेले बाइक से नेपाल तक का सफर तय किया और इसके अनुभव सोशल मीडिया पर साझा किए. उनकी पोस्ट और वीडियो से प्रेरित होकर कई महिलाओं ने उनसे संपर्क किया और ऐसी यात्राओं में जुड़ने की इच्छा जताई.
इसी विचार से महिलाओं के लिए एक संगठित बाइकिंग मंच बनाने की पहल आगे बढ़ी. आज इस समूह में 18 सक्रिय महिला सदस्य हैं, जो नियमित रूप से एडवेंचर और जागरूकता अभियानों में भागीदारी कर रही हैं.
आत्मविश्वास बढ़ाने वाली पहल
महिला बाइकर्स का कहना है कि यह केवल एक राइड नहीं, बल्कि महिलाओं को अपने सपनों को जीने का अवसर देने वाली मुहिम है. कई प्रतिभागियों ने बताया कि शुरुआत में उनके परिवार को सुरक्षा की चिंता थी, लेकिन अब वही परिवार उनकी उपलब्धियों पर गर्व करता है. इस अभियान ने यह भी रेखांकित किया कि महिलाएं केवल दर्शक नहीं, बल्कि नेतृत्वकर्ता बनकर समाज को नई दिशा दे सकती हैं.
पर्यटन स्थलों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने का लक्ष्य
इन महिलाओं का मानना है कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत से समृद्ध राज्य है, फिर भी राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर उसे वह पहचान नहीं मिल सकी है जिसकी वह हकदार है. बारनवापारा, चित्रकोट, तीरथगढ़, सिरपुर, बस्तर और कांकेर जैसे स्थलों को देशभर में पहचान दिलाने के लिए यह समूह सोशल मीडिया और ग्राउंड कैंपेन के जरिए सक्रिय है.
बाइकर्स का मानना है कि पर्यटन बढ़ने से स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे.
सड़क सुरक्षा का संदेश
यात्रा के दौरान सभी महिला बाइकर्स हेलमेट, राइडिंग जैकेट और अन्य सुरक्षा उपकरणों के साथ नजर आईं. उन्होंने लोगों से अपील की कि दोपहिया वाहन चलाते समय सुरक्षा नियमों का पालन करें. महिलाओं ने कहा कि हर साल सड़क हादसों में हजारों लोगों की जान चली जाती है, लेकिन यदि लोग जिम्मेदारी से वाहन चलाएं और हेलमेट पहनें तो बड़ी संख्या में हादसे टाले जा सकते हैं.
बारनवापारा में प्रकृति से जुड़ाव
बारनवापारा अभ्यारण्य पहुंचने के बाद महिला बाइकर्स ने जंगल सफारी का अनुभव लिया और जैव विविधता तथा वन्यजीव संरक्षण से जुड़े पहलुओं को करीब से समझा. प्राकृतिक माहौल और वन्यजीवों ने सभी प्रतिभागियों को रोमांचित किया. महिलाओं ने कहा कि इको टूरिज्म महज घूमने का जरिया नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय समुदायों के विकास का प्रभावी माध्यम भी है.
पर्यटन विभाग ने बढ़ाया हौसला
इस अभियान में छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल की डीजीएम पूनम शर्मा और जनसंपर्क अधिकारी डॉ. अनुराधा दुबे भी शामिल हुईं. दोनों अधिकारियों ने महिला बाइकर्स के साथ राइड कर उनका उत्साहवर्धन किया. पर्यटन विभाग का मानना है कि इस तरह की पहल राज्य के पर्यटन स्थलों को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभा सकती हैं और साथ ही महिलाओं के आत्मविश्वास तथा नेतृत्व क्षमता को भी मजबूती देती हैं.
परंपरा को चुनौती देती 18 महिलाएं
छात्रा, गृहिणी, पेशेवर और व्यवसायी—अलग-अलग क्षेत्रों से आईं ये 18 महिलाएं पारंपरिक भूमिकाओं को चुनौती देते हुए लंबी दूरी की बाइक राइड पर निकलीं. बारनवापारा पहुंचते ही उन्होंने साबित कर दिया कि महिलाएं अब नेतृत्व करने और सपनों को हकीकत में बदलने में किसी से पीछे नहीं हैं. आने वाले समय में ऐसे और अभियान शुरू करने की योजना है, ताकि अधिक से अधिक महिलाएं इससे जुड़ सकें और सकारात्मक बदलाव ला सकें.
Comments
0 comment