उत्तर प्रदेश
एक घंटा पहले
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अयोध्या के राम मंदिर परिसर में दान राशि में कथित हेराफेरी के आरोपों ने अब बड़ा रूप ले लिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने शनिवार को एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर दिया है। हालांकि सरकार के इस कदम के बावजूद विपक्षी समाजवादी पार्टी संतुष्ट नजर नहीं आ रही और उसने जांच के स्वरूप पर सवाल उठाते हुए एक नई मांग सामने रख दी है।
क्या है पूरा मामला
राम मंदिर के दानपात्र में कथित वित्तीय अनियमितताओं का प्रकरण इन दिनों खासा गरमाया हुआ है। करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस संवेदनशील विषय की जांच के लिए सरकार ने SIT बनाई है। अयोध्या के साधु-संतों और स्थानीय समाज ने इस फैसले का स्वागत किया है, लेकिन सियासी हलकों में इसे लेकर टकराव शुरू हो गया है।
सपा ने खोला मोर्चा
अखिलेश यादव की पार्टी ने इस मुद्दे पर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सपा का कहना है कि मौजूदा SIT इस मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के लिए पर्याप्त नहीं है। पार्टी ने मांग की है कि इतने संवेदनशील प्रकरण की पड़ताल किसी व्यापक अधिकारों वाली समिति से होनी चाहिए।
अवधेश प्रसाद का बयान
सपा के वरिष्ठ नेता और सांसद अवधेश प्रसाद ने राम मंदिर से जुड़े इन आरोपों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह मामला देश-विदेश के करोड़ों राम भक्तों और श्रद्धालुओं की अटूट आस्था से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसकी जांच पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग से होनी चाहिए।
सिर्फ एसआईटी काफी नहीं है, बल्कि इस मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एक बड़ी और व्यापक अधिकारों वाली कमेटी से कराई जानी चाहिए।
उन्होंने जोर देकर कहा कि वर्तमान में गठित SIT इस संवेदनशील प्रकरण की गहराई तक पहुंचने के लिए नाकाफी है और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को देखते हुए उच्च स्तर की निगरानी जरूरी है।
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