राष्ट्रीय राजनीति
19 घंटे पहले
11
विचारों
चुनावी सरगर्मी और बंगाल की राजनीति
देश के चार राज्यों में उपचुनावों के दौरान मतदाताओं का भारी उत्साह देखने को मिला। विशेष रूप से पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर सीटों पर जमकर मतदान हुआ। हालांकि, इस दौरान राजनीतिक दलों के बीच जमकर आरोप-प्रत्यारोप भी हुए। कांग्रेस और खुद को बंगाल का ओवैसी बताने वाले हुमायूं कबीर ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल खड़े करते हुए वोट लूटने के गंभीर आरोप लगाए और दोबारा मतदान कराने की मांग की। बंगाल में जहां ममता बनर्जी की सक्रियता नदारद रही, वहीं इन आरोपों ने सियासी पारा बढ़ा दिया है। आज कुल मिलाकर चार राज्यों में एक लोकसभा और 5 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव संपन्न हुए।
यूपी में बढ़ती राजनीतिक खींचतान
एक तरफ बंगाल में हंगामे के बीच राहुल गांधी और इंडी गठबंधन के नेता दिल्ली में चुनाव में धांधली की शिकायत कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश की तस्वीर बिल्कुल अलग है। यहां भारतीय जनता पार्टी को चुनौती देने की कोशिश कर रही समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन को लेकर गहरा विवाद चल रहा है। दोनों दलों के बीच आपसी मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं, जिससे आगामी चुनावों से पहले ही गठबंधन के भविष्य पर सवालिया निशान लग गया है।
असदुद्दीन ओवैसी का मास्टर प्लान
इस बीच, एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने उत्तर प्रदेश के चुनावी मैदान में एक बड़ा दांव खेला है। ओवैसी ने गठबंधन के लिए समाजवादी पार्टी और कांग्रेस को जो समय सीमा दी थी, वह 2 अक्टूबर को समाप्त हो गई। डेडलाइन खत्म होने के बाद अब ओवैसी ने अकेले दम पर चुनाव लड़ने की रणनीति तैयार कर ली है। एआईएमआईएम के सूत्रों की मानें तो पार्टी उत्तर प्रदेश में कम से कम 200 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने की योजना बना रही है। इनमें से 100 सीटें ऐसी हैं जो मुस्लिम बहुल इलाकों के अंतर्गत आती हैं, जो सीधे तौर पर अखिलेश यादव के वोट बैंक में सेंध लगा सकती हैं।
क्यों चर्चा में आया बीवी पगलू का बयान
अपने हालिया बयानों और चुनावी गतिविधियों के बीच असदुद्दीन ओवैसी का खुद को 'बीवी पगलू' कहना काफी चर्चा का विषय बन गया है। उनके इस तंज ने राजनीतिक गलियारों में उत्सुकता बढ़ा दी है। ओवैसी का यह आक्रामक रुख ऐसे समय में सामने आया है जब अखिलेश यादव पहले ही राज्यसभा चुनाव के दौरान बैकफुट पर दिखाई दिए थे। ओवैसी की यह धमाकेदार एंट्री समाजवादी पार्टी की मुश्किलों में इजाफा कर सकती है क्योंकि मुस्लिम वोटों के बंटवारे का डर अब अखिलेश यादव को सताने लगा है। ओवैसी का यह कदम चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश के राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह बदलने वाला साबित हो सकता है।
Comments
0 comment