12 करोड़ के मोबाइल चोरी का महा-खुलासा: 3658 फोन बरामद, 6 राज्यों में फैला था शातिर गैंग का जाल बिहार एक महीने पहले 44
बिहार एसटीएफ ने मोबाइल चोरी के अब तक के सबसे बड़े मामलों में से एक का पर्दाफाश करते हुए 12 करोड़ रुपए की कीमत के फोन बरामद किए हैं। अररिया से शुरू हुई यह जांच दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, पंजाब और मध्य प्रदेश तक फैली थी।

मोबाइल चोरी के एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश

बिहार एसटीएफ ने हाल के वर्षों में मोबाइल चोरी के सबसे चौंकाने वाले मामले का खुलासा किया है। यह मामला न केवल चोरी की बड़ी मात्रा के लिए जाना जाएगा, बल्कि इसकी गहराई और फैलाव ने भी पुलिस को हैरान कर दिया है। अररिया से शुरू हुई यह जांच दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, पंजाब और मध्य प्रदेश जैसे 6 राज्यों तक पहुंच गई। पुलिस की कार्रवाई में अब तक करीब 12 करोड़ रुपए मूल्य के 3,658 मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार, चोरी किए गए कुल मोबाइल का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा पुलिस ने सफलतापूर्वक रिकवर कर लिया है।

अररिया से शुरू हुई जांच की कड़ी

इस पूरे मामले की शुरुआत बिहार के अररिया नगर थाना क्षेत्र में हुई, जहां से एक ट्रक कंटेनर में लदे मोबाइल फोन चोरी होने की रिपोर्ट दर्ज की गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच की जिम्मेदारी बिहार एसटीएफ को सौंपी गई। शुरुआती चरण में ट्रक चालक मोहम्मद तालिम और मोहम्मद साहिब का नाम सामने आया, जिन्हें नामजद आरोपी बनाया गया। एसटीएफ ने वैज्ञानिक तरीकों और तकनीकी साक्ष्यों का इस्तेमाल करते हुए इस गिरोह की जड़ों को खोदना शुरू किया, जिससे एक के बाद एक कई राज्यों के लिंक सामने आते गए।

गिरफ्तारी और बरामदगी का सिलसिला

एसटीएफ ने सबसे पहले अनवर उर्फ अनवारूल को दो मोबाइल फोन के साथ पकड़ा। उसकी निशानदेही पर दिल्ली के करोलबाग में छापा मारकर दुकानदार दीपक गुप्ता को गिरफ्तार किया गया, जिसके पास से तीन मोबाइल मिले। दीपक से पूछताछ के दौरान 96 और मोबाइल बरामद हुए। इसके बाद गिरोह के अन्य सदस्यों मोहम्मद साहिल कुरैशी और मोहम्मद कामिल उर्फ किम्मी को दबोचा गया। इन दोनों ने खुलासा किया कि वे चोरी के फोनों को थोक में खरीदकर देशभर के अलग-अलग दुकानदारों को बेचते थे। दिल्ली के फ्लोरेंस होटल, नेहरू प्लेस और नोएडा में की गई छापेमारी में क्रमशः 62, 232 और 422 मोबाइल फोन बरामद किए गए। इस दौरान एक स्विफ्ट कार और एक मारुति सियाज़ भी पुलिस के हाथ लगी। बाद में सोनू और पवन गुप्ता नामक दुकानदारों के पास से भी क्रमशः 136 और 144 मोबाइल बरामद किए गए।

मुख्य साजिशकर्ता तक कैसे पहुंची एसटीएफ

जांच के दौरान पता चला कि ट्रक चालक मोहम्मद तालिम राजस्थान में एक अवैध हथियार के मामले में पहले ही गिरफ्तार हो चुका था। उससे पूछताछ के बाद नईम खान उर्फ नईम सरपंच का नाम सामने आया। तकनीकी इनपुट की मदद से एसटीएफ ने उसे मध्य प्रदेश के रतलाम में गिरफ्तार किया, जब वह मुंबई की ओर भागने की फिराक में था। नईम के पास से 620 मोबाइल फोन, 6.97 लाख रुपए नकद, एक आयशर ट्रक और एक स्कॉर्पियो बरामद हुई। इसके बाद जांच अनीस खान उर्फ अनीस विशंभरिया तक पहुंची, जिसे गिरोह का मुख्य मास्टरमाइंड माना जा रहा है।

मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी और नेटवर्क का अंत

एसटीएफ ने अनीस खान को पंजाब के लुधियाना स्थित एक होटल से दबोच लिया। उसकी निशानदेही पर हरियाणा के पलवल के हथीन स्थित एक घर से 1,638 मोबाइल फोन बरामद हुए, जो इस बरामदगी का सबसे बड़ा हिस्सा है। इसके अलावा होडल क्षेत्र के भीरूकी गांव से 180 मोबाइल बरामद किए गए। चंडीगढ़ और हरियाणा के पुनहाना से भी भारी मात्रा में फोन बरामद किए गए।

कुल जब्ती और आगे की कानूनी कार्रवाई

इस पूरे ऑपरेशन में पुलिस ने 3,658 मोबाइल फोन, 6.97 लाख रुपए नकद, एक लैपटॉप, एक डीवीआर और 5 वाहन जब्त किए हैं। जब्त किए गए वाहनों में स्विफ्ट, सियाज़, थार, आयशर ट्रक और स्कॉर्पियो शामिल हैं। अब तक कुल 6 आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस का दावा है कि मुख्य साजिशकर्ताओं को पकड़ लिया गया है और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश अभी जारी है। कानून अपना काम कर रहा है और इस गिरोह के बाकी बचे सदस्यों की धरपकड़ के लिए पुलिस की टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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