दिल्ली
2 घंटे पहले
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देश की राजधानी दिल्ली के दक्षिणी जिले की साइबर थाना पुलिस ने ऑनलाइन धोखाधड़ी करने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में तत्परता से कार्रवाई करते हुए गुजरात के अहमदाबाद से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह सीधे-साधे लोगों को उनके मोबाइल फोन पर खतरनाक एपीके (APK) फाइल भेजकर ठगी का शिकार बनाता था। इस पूरी कार्रवाई के दौरान पुलिस ने पकड़े गए आरोपियों के कब्जे से 11 क्रेडिट कार्ड और तीन मोबाइल फोन बरामद किए हैं। जांच में यह बात सामने आई है कि ठगी की गई रकम को अलग-अलग क्रेडिट कार्ड के माध्यम से आगे ट्रांसफर किया जाता था, और इस काम के एवज में आरोपियों को मोटा कमीशन मिलता था।
6.57 लाख रुपये की ठगी से खुला पूरा राज
यह पूरा मामला एक पीड़ित व्यक्ति के साथ हुई 6.57 लाख रुपये की बड़ी ठगी से जुड़ा हुआ है। पीड़ित विकास कुमार को उनके मोबाइल पर एक अज्ञात संदेश के माध्यम से एक संदिग्ध लिंक भेजा गया था। जैसे ही पीड़ित ने उस लिंक को खोला, वे इस साइबर धोखाधड़ी का शिकार हो गए। पीड़ित की शिकायत के आधार पर साइबर थाना साउथ में 21 मई 2026 को एक ई-एफआईआर (E-FIR) दर्ज की गई और पुलिस ने मामले की तकनीकी जांच शुरू की।
पुलिस टीम ने ठगी गई राशि के बैंक रिकॉर्ड और तकनीकी कड़ियों को जोड़ना शुरू किया। गहन जांच के दौरान पता चला कि ठगे गए कुल 6.57 लाख रुपये में से लगभग 4 लाख रुपये की रकम को दो ट्रांजेक्शन के जरिए आरोपियों से जुड़े दो क्रेडिट कार्डों में भेजा गया था। इस पुख्ता सुराग के मिलते ही दिल्ली पुलिस ने अहमदाबाद में जाल बिछाया और वहां से मोहम्मद इस्माइल अंसारी, शेख मोहम्मद नुरेन और तारिक अहमद को धर दबोचा।
क्रेडिट कार्ड के जरिए रकम ट्रांसफर करने और कमीशन का खेल
पूछताछ में यह बात सामने आई है कि गिरफ्तार किए गए आरोपी साइबर ठगी से मिलने वाले पैसों को अलग-अलग क्रेडिट कार्ड के जरिए इधर-उधर ट्रांसफर करने का काम करते थे। पुलिस के मुताबिक, इस गैरकानूनी काम को करने के बदले उन्हें कमीशन दिया जाता था। गिरफ्तार आरोपियों में से एक मोहम्मद इस्माइल अंसारी IDBI बैंक में संविदा कर्मचारी के रूप में काम करता है। उस पर आरोप है कि उसने ठगी के पैसों को ठिकाने लगाने के लिए कई क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराए थे।
इसके अलावा, तकनीकी जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि आरोपी लगातार वॉट्सऐप और टेलीग्राम ग्रुप के जरिए अन्य हैंडलरों के संपर्क में थे। इनमें से कुछ मोबाइल नंबर अमेरिका से जुड़े हुए पाए गए हैं। पुलिस को यह भी संदेह है कि ठगी गई इस रकम को बाद में USDT (क्रिप्टोकरेंसी) में बदल दिया जाता था ताकि इसे ट्रैक करना मुश्किल हो जाए।
अमेरिकी नंबरों के पीछे छिपे मास्टरमाइंड की तलाश तेज
पुलिस अधिकारियों ने गिरोह के काम करने के तरीके (मोडस ऑपेरंडी) का भी खुलासा किया है। ये ठग लोगों को झांसा देने के लिए लुभावने मैसेज के जरिए फर्जी लिंक भेजते थे और उसके माध्यम से मोबाइल में एपीके (APK) फाइल डाउनलोड करवाते थे। ऐसी खतरनाक फाइलें मोबाइल में इंस्टॉल होते ही यूजर के फोन और बैंकिंग से जुड़ी गोपनीय जानकारियों पर अनधिकृत पहुंच बना लेती थीं। इसके बाद आरोपी आसानी से पीड़ित के बैंक खाते से पैसे निकाल लेते थे।
दिल्ली पुलिस अब अमेरिका से जुड़े उन नंबरों के पीछे छिपे लोगों और इस पूरे अंतरराष्ट्रीय गिरोह के नेटवर्क का पता लगाने की कोशिश कर रही है। इसके साथ ही इस बात की भी जांच की जा रही है कि गिरफ्तार आरोपियों ने अब तक कुल कितनी रकम को इस माध्यम से ट्रांसफर किया है और इस काले धंधे में उनके साथ और कौन-कौन लोग शामिल हैं। मामले की आगे की जांच लगातार जारी है।
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