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एक घंटा पहले
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अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने अलबामा राज्य की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें नाइट्रोजन गैस के जरिए मौत की सजा देने की अनुमति मांगी गई थी। यह अहम फैसला कैदी जेफरी ली की फांसी से जुड़े मामले में आया है। इससे पहले अमेरिका की दो निचली अदालतें भी इस तरीके पर रोक लगा चुकी थीं।
अदालतों ने इस तरीके को अमेरिकी संविधान के विरुद्ध करार दिया है। उनका मानना है कि सजा देने का यह तरीका बेहद क्रूर और असामान्य है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में इस फैसले की कोई स्पष्ट वजह नहीं बताई, हालांकि तीन जजों ने इस फैसले से असहमति जताई।
अलबामा के सरकारी वकील ने इस फैसले पर नाराजगी जाहिर की है और इसे पीड़ित परिवारों के साथ नाइंसाफी बताया है। गौरतलब है कि अलबामा जनवरी 2024 से अब तक सात लोगों को नाइट्रोजन गैस के जरिए मौत की सजा दे चुका है।
अदालत ने इस तरीके पर रोक क्यों लगाई?
एक फेडरल जज ने इसी हफ्ते नाइट्रोजन गैस से मौत देने पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी। इस फैसले के पीछे विशेषज्ञों और चश्मदीदों के बयानों की अहम भूमिका रही। अदालत के अनुसार, इस नए तरीके से कैदी को बेहद तकलीफ झेलनी पड़ती है।
नाइट्रोजन हाइपोक्सिया की प्रक्रिया में कैदी को मास्क के जरिए शुद्ध नाइट्रोजन दी जाती है, जिससे शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा खत्म होने लगती है और दम घुटने लगता है। डॉक्टरों का कहना है कि इस दौरान कैदी को सांस लेने में भारी परेशानी होती है और उसे गंभीर मानसिक तनाव तथा घबराहट से गुजरना पड़ता है। इन्हीं कारणों से अदालत ने इसे क्रूर सजा माना।
जेफरी ली को किस अपराध में मिली थी मौत की सजा?
जेफरी ली पिछले बीस साल से अलबामा की जेल में बंद है। उसे साल 1998 में एक दुकान में लूटपाट और दो लोगों की हत्या का दोषी ठहराया गया था। इस मामले में जूरी ने ली को उम्रकैद देने की सिफारिश की थी, लेकिन जज ने जूरी के फैसले को पलटते हुए उसे मौत की सजा सुना दी। यह न्यायिक प्रक्रिया अब अमेरिका में समाप्त की जा चुकी है।
अलबामा सरकार अब जेफरी ली को किसी दूसरे तरीके से सजा देने पर विचार कर रही है। राज्य के अटॉर्नी जनरल स्टीव मार्शल ने कहा कि वह ली को कानून के अनुसार सजा दिलाने के लिए हर संभव कदम उठाएंगे।
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