ईरानी महिलाओं पर ट्रंप का नया दांव! ईरान भेजने के बजाय गृहयुद्ध से जूझते अफ्रीकी देश में फेंकने की तैयारी विश्व एक घंटा पहले 2
ट्रंप प्रशासन ने बिना किसी आपराधिक रिकॉर्ड वाली दो ईरानी महिलाओं को 'सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक' डिपोर्ट करने की गुप्त योजना बनाई है, जिसे तेहरान पर दबाव बनाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान पर शिकंजा कसने के लिए इमिग्रेशन को एक नए हथियार के रूप में इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। फारस की खाड़ी में ईरानी ठिकानों को निशाना बनाने के साथ-साथ अब ट्रंप प्रशासन अमेरिका में रह रहे बेकसूर ईरानी शरणार्थियों को चुन-चुनकर निशाना बना रहा है। इसी कड़ी में बिना किसी आपराधिक रिकॉर्ड वाली दो ईरानी महिलाओं को जबरन 'सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक' जैसे गृहयुद्ध से जूझ रहे अशांत देश में डिपोर्ट करने की गुप्त योजना बनाई गई है।

बेकसूर नागरिकों पर निकल रही ईरान की खुन्नस

ट्रंप ने ईरान को झुकाने के लिए सिर्फ सैन्य ताकत पर भरोसा नहीं किया, बल्कि इमिग्रेशन को भी एक घातक औजार बना लिया है। प्रशासन ने प्रवासियों को अमेरिका से निकालकर सीधे 'सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक' (CAR) जैसे अशांत देश में भेजने की गुप्त योजना तैयार कर ली है। जिन दो बेगुनाह ईरानी महिलाओं को इसका शिकार बनाया गया है, उन्हें देश से निकालने का कोई कानूनी आधार तक मौजूद नहीं है। माना जा रहा है कि उनका इस्तेमाल केवल ईरान पर दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है।

कहां भेजा जा रहा है इन महिलाओं को

एक तरफ फारस की खाड़ी और ओमान तट के पास अमेरिकी नौसेना लगातार ईरानी जहाजों को निशाना बना रही है, तो दूसरी तरफ वॉशिंगटन में मौजूद ईरानी शरणार्थियों को इसकी कीमत चुकानी पड़ रही है। वकीलों के अनुसार, जिन दो ईरानी महिलाओं को गुरुवार को विशेष विमान के जरिए सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक भेजा जा रहा है, उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। जानकारों का कहना है कि युद्ध के इस दौर में प्रशासन ने इन्हें सिर्फ इसलिए चुना है ताकि तेहरान को यह कड़ा संदेश दिया जा सके कि जंग के समय किसी भी ईरानी नागरिक को अमेरिकी जमीन पर ठहरने का हक नहीं रहेगा।

खामेनेई के समर्थकों पर चल रहा हंटर

ईरान के साथ चल रहे इस आर-पार के टकराव के बीच ट्रंप प्रशासन ने अमेरिका में रह रहे उन ईरानी नागरिकों पर सख्ती शुरू कर दी है, जिन पर तेहरान सरकार के प्रति जरा भी सहानुभूति रखने का शक है। प्रशासन ने हाल ही में हमीदेह सुलेमानी अफशर और उनकी बेटी समेत कई ईरानी नागरिकों के वीजा और ग्रीन कार्ड तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिए। ट्रंप का साफ इरादा है कि जब अमेरिकी सेना सीमा पर ईरान से जूझ रही हो, तब देश के भीतर ऐसे किसी भी तत्व को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा जो प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से ईरानी सुप्रीम लीडर खामेनेई के शासन से जुड़ा हो।

ईरान नहीं भेज सकते थे, तो खोजा शातिर रास्ता

इस पूरे मामले का सबसे चिंताजनक पहलू तब सामने आया, जब जंग के बीच अमेरिकी अदालतों के आदेशों को भी दरकिनार कर दिया गया। इमिग्रेशन वकीलों का दावा है कि अदालत ने इन महिलाओं को 'विथहोल्डिंग ऑफ रिमूवल' के तहत संरक्षण दिया था, क्योंकि अमेरिकी जज खुद यह मानते थे कि अगर इन्हें ईरान भेजा गया तो खामेनेई की पुलिस इन्हें यातना देगी या मार डालेगी। लेकिन ट्रंप सरकार ने इसका एक बेहद चालाक तोड़ निकाल लिया। इन महिलाओं को ईरान भेजने के बजाय प्रशासन ने इन्हें अफ्रीका के ऐसे देश में भेजने का सौदा कर लिया, जहां गृहयुद्ध और भुखमरी का बोलबाला है।

मानवाधिकारों की अनदेखी का आरोप

जंग के इस माहौल में ट्रंप के इस कदम को सीधे तौर पर मानवाधिकारों के हनन के रूप में देखा जा रहा है। जिस सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक को खुद अमेरिकी सरकार 'नो-गो जोन' मानती है और अपने नागरिकों को वहां न जाने की चेतावनी देती है, उसी खतरनाक इलाके में इन ईरानी महिलाओं को बेसहारा छोड़ दिया जाएगा। वहां न तो उनका कोई परिवार है और न ही कोई सहारा। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप इस जंग में ईरान के खिलाफ इतने आक्रोश से भरे हैं कि वे हर उस व्यक्ति का जीवन कठिन बना देना चाहते हैं, जिसका नाता ईरान की धरती से है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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