पीएम मोदी का 'डोमिनेंस गेम': जब ट्रंप के हैंडशेक की ताकत के आगे खुद अमेरिकी राष्ट्रपति की फूल गई सांसें विश्व 4 घंटे पहले 8
अमेरिका के पूर्व एनएसए जॉन बोल्टन ने एक पुरानी कूटनीतिक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे पीएम मोदी ने डोनाल्ड ट्रंप की प्रसिद्ध 'हैंडशेक' तकनीक को पछाड़कर भारत की मजबूत छवि पेश की।

वैश्विक मंच पर कूटनीति की एक नई परिभाषा

अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का खेल अक्सर बंद कमरों में होने वाली बैठकों और कानूनी दस्तावेजों तक सीमित नहीं रहता है। कई बार विश्व राजनीति की दिशा एक सरल सी मुलाकात या महज एक हाथ मिलाने की प्रक्रिया यानी हैंडशेक से भी तय हो जाती है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपनी आक्रामक बॉडी लैंग्वेज के लिए दुनिया भर में जाने जाते थे। उनकी एक विशेष आदत थी जिससे बड़े-बड़े राष्ट्राध्यक्ष भी असहज महसूस करते थे। जब भी वे किसी विदेशी नेता से हाथ मिलाते, तो वे उन्हें अचानक अपनी ओर खींच लेते थे। वैश्विक मीडिया और कूटनीतिक विशेषज्ञों के बीच इसे 'ट्रंपशेक' या 'डोमिनेंस गेम' के नाम से पहचाना जाता था। हालांकि, जब यह दांव भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ आजमाया गया, तो स्थिति पूरी तरह उलट गई। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने इस ऐतिहासिक घटना का खुलासा करते हुए बताया कि कैसे पीएम मोदी ने ट्रंप की इस तकनीक को उनके ही अंदाज में करारा जवाब दिया।

पीएम मोदी की लोहे जैसी पकड़ से घबराए ट्रंप

अमेरिकी मीडिया के एक लोकप्रिय शो 'न्यू ऑर्डर' के दौरान जॉन बोल्टन ने उस पुराने वाकये को याद किया जब डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात हुई थी। बोल्टन के अनुसार, पीएम मोदी ने ट्रंप का हाथ इतनी दृढ़ता और मजबूती के साथ थामा कि अमेरिकी राष्ट्रपति को सांस लेने में भी कठिनाई महसूस होने लगी थी। यह वाकया स्पष्ट करता है कि शारीरिक और मानसिक दोनों ही स्तरों पर पीएम मोदी की पकड़ कितनी मजबूत है। जैसे ही यह बयान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किया गया, यह पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन गया। जो ट्रंप अपनी आक्रामक ग्रिप और बॉडी लैंग्वेज से सामने वाले को दबाव में ले आते थे, वे खुद पीएम मोदी की मजबूत पकड़ के आगे बेबस दिखाई दिए।

क्या है ट्रंप का 'इनवर्ड यांक' और 'डोमिनेंस गेम'?

जब डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति के रूप में वैश्विक पटल पर उभरे, तो उनकी बॉडी लैंग्वेज विश्लेषण का मुख्य केंद्र बन गई थी। 'द वाशिंगटन पोस्ट' ने उनकी इस अजीबोगरीब हैंडशेक शैली को 'ट्रंपशेक' करार दिया था, जबकि 'टाइम' जैसी प्रतिष्ठित पत्रिकाओं ने इसे वर्चस्व की लड़ाई के रूप में देखा। उनकी इस शैली के प्रमुख पहलू इस प्रकार थे:

  • इनवर्ड यांक: ट्रंप हाथ मिलाते समय अचानक सामने वाले के हाथ को जोर का झटका देकर अपनी ओर खींचते थे।
  • बैलेंस बिगाड़ना: बॉडी लैंग्वेज विशेषज्ञ क्रिस उलरिच ने सीएनएन को बताया था कि ट्रंप की यह तकनीक सामने वाले का संतुलन बिगाड़ने के लिए एक सोची-समझी चाल होती थी।
  • पर्सनल स्पेस का उल्लंघन: विशेषज्ञ डॉन खोरी के अनुसार, यह एक शक्ति प्रदर्शन का तरीका था। जब आप किसी को जबरन अपनी ओर खींचते हैं, तो आप उनके निजी दायरे में घुस जाते हैं, जिससे यह संदेश जाता है कि बातचीत में बॉस वही हैं।

जब दिग्गज नेता भी ट्रंप के आगे नजर आए बेबस

वर्ष 2017 और उसके बाद के वर्षों में ऐसे कई वीडियो इंटरनेट पर वायरल हुए, जिनमें दुनिया के दिग्गज नेता ट्रंप के इस 'हैंडशेक' गेम के आगे असहज दिखे। इनमें से कुछ प्रमुख उदाहरण ये हैं:

  • शिंजो आबे: जापान के पूर्व प्रधानमंत्री जब व्हाइट हाउस पहुंचे, तो ट्रंप ने उनका हाथ पूरे 19 सेकंड तक खींचे रखा था, जिसके बाद आबे के चेहरे के भाव स्पष्ट रूप से उनकी परेशानी बयां कर रहे थे।
  • माइक पेंस और नील गोर्सच: अमेरिकी उपराष्ट्रपति और सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस भी इस अजीब स्थिति से बच नहीं पाए थे।
  • जस्टिन ट्रूडो: कनाडा के प्रधानमंत्री ट्रूडो ने ट्रंप की इस खींचने वाली तकनीक का मुकाबला करने के लिए उनके कंधे पर हाथ रखकर संतुलन बनाने का प्रयास किया था।
  • इमैनुएल मैक्रों: फ्रांस के राष्ट्रपति ने ट्रंप की ग्रिप का जोरदार मुकाबला किया था। उस दौरान मैक्रों ने ट्रंप के हाथ को इतनी मजबूती से दबाया कि उनके अंगूठे पर सफेद निशान तक पड़ गए थे।

भारत का पावर-मूव और पीएम मोदी की आयरन ग्रिप

जब बारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आई, तो ट्रंप का यह 'डोमिनेंस गेम' पूरी तरह विफल हो गया। पीएम मोदी न केवल अपनी गर्मजोशी भरी कूटनीति के लिए जाने जाते हैं, बल्कि वे विपरीत परिस्थितियों में अपने धैर्य और मजबूती के लिए भी पहचाने जाते हैं। जब ट्रंप ने उनके साथ वही पुराना 'इनवर्ड यांक' आजमाने का प्रयास किया, तो मोदी ने न केवल अपना संतुलन बरकरार रखा, बल्कि ऐसी 'आयरन ग्रिप' दिखाई कि अमेरिकी राष्ट्रपति खुद असहज हो गए। यह घटना महज दो नेताओं के बीच हाथ मिलाने का सामान्य दृश्य नहीं था, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में भारत के बढ़ते आत्मसम्मान और अडिग शक्ति का एक बड़ा संकेत था।

बॉडी लैंग्वेज और कूटनीति: क्या हैं इसके मायने?

वैश्विक राजनीति में शब्दों से ज्यादा कई बार बॉडी लैंग्वेज का महत्व होता है। जॉन बोल्टन के इस खुलासे के पीछे तीन बड़े रणनीतिक निहितार्थ छिपे हैं:

  • समानता का दर्जा: भारत अब एक महाशक्ति अमेरिका के सामने जूनियर पार्टनर के रूप में नहीं, बल्कि एक समान शक्ति के रूप में खड़ा है।
  • मनोवैज्ञानिक बढ़त: कूटनीति की मेज पर जब आप सामने वाले के माइंड गेम को उसी के खेल में पछाड़ देते हैं, तो आपकी वार्ता करने की स्थिति स्वतः ही अधिक प्रभावी हो जाती है।
  • मजबूत नेतृत्व: दुनिया के मंच पर हमेशा आत्मविश्वासी और मजबूत नेताओं का सम्मान होता है। पीएम मोदी का यह हैंडशेक भारत की उभरती हुई ग्लोबल पावर और निडर विदेश नीति का प्रतीक है।

अंत में, यह कहना गलत नहीं होगा कि जो ट्रंप पूरी दुनिया को अपने 'इनवर्ड यांक' से झुकाने की कोशिश करते थे, पीएम मोदी के एक ही हैंडशेक ने यह संदेश दे दिया कि नया भारत किसी भी प्रकार के बाहरी दबाव में आने वाला नहीं है और अपनी शर्तों पर अंतरराष्ट्रीय संबंधों को आगे बढ़ाने में सक्षम है।

करण मल्होत्रा पाबना के अंतरराष्ट्रीय संवाददाता हैं, जो अमेरिका, यूरोप और एशिया की खबरें रिपोर्ट करते हैं। वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और बड़े अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर वे नजर रखते हैं। उनकी रिपोर्ट्स दुनिया की हलचल को पाठकों तक तेजी से पहुंचाती हैं।

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