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2 घंटे पहले
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लॉस एंजिल्स की राजनीति में नित्या रमन का उदय
अमेरिकी राजनीति के इतिहास में एक ऐसा नाम तेजी से उभरकर सामने आया है जिसने लॉस एंजिल्स जैसे विशाल और प्रभावकारी शहर के सियासी गलियारों में खलबली मचा दी है। यह नाम है नित्या रमन। केरल की गलियों से निकलकर अमेरिका के सबसे शक्तिशाली शहरों में से एक, लॉस एंजिल्स की सत्ता की चाबी पाने के लिए संघर्ष कर रहीं नित्या रमन अब जीत के बिल्कुल करीब नजर आ रही हैं। 3 नवंबर को होने वाली वोटिंग से पहले आए हालिया सर्वे और टीवी डिबेट ने यह साबित कर दिया है कि नित्या रमन महज एक दावेदार नहीं, बल्कि जीत की सबसे बड़ी प्रबल उम्मीदवार बनकर उभरी हैं। यदि वह चुनाव जीतती हैं, तो लॉस एंजिल्स की पहली एशियाई-अमेरिकी महिला मेयर बनकर वे एक नया इतिहास लिख देंगी।
केरल से हार्वर्ड और एमआईटी तक का सफर
नित्या रमन की कहानी महज एक चुनाव की नहीं, बल्कि एक ऐसे बदलाव की है जो पारंपरिक राजनीति की जड़ों को हिला रहा है। 1981 में केरल में जन्मीं नित्या बचपन में ही अपने परिवार के साथ अमेरिका चली गई थीं। उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि अत्यंत प्रभावशाली है। उन्होंने विश्व प्रसिद्ध हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से स्नातक की पढ़ाई पूरी की और उसके बाद मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) से अर्बन प्लानिंग में मास्टर डिग्री हासिल की। हालांकि, नित्या सिर्फ एक किताबी जानकार नहीं हैं। उन्होंने अपनी राजनीति का आधार जमीनी संघर्ष को बनाया। उन्होंने लॉस एंजिल्स में बेघर होने की समस्या से निपटने के लिए सेलाह (SELAH) नेबरहुड होमलेस गठबंधन की सह-स्थापना की। उन्होंने सड़कों पर भटकते लोगों के बीच काम किया, उनकी दुश्वारियां देखीं और सिस्टम की खामियों को बेहद करीब से समझा।
वर्ष 2020 में पहली ऐतिहासिक जीत
नित्या रमन का राजनीति में प्रवेश किसी चमत्कार से कम नहीं था। साल 2020 में उन्होंने लॉस एंजिल्स सिटी काउंसिल का चुनाव लड़कर एक बड़ी कामयाबी हासिल की। वह काउंसिल के लिए चुनी जाने वाली पहली दक्षिण एशियाई और पहली एशियाई-अमेरिकी महिला बनीं। उनकी यह जीत एक ऐसे नए दौर की शुरुआत थी, जहां जमीनी कार्यकर्ता सीधे सत्ता के केंद्रों को चुनौती देने लगे थे।
मेयर पद की दौड़ और व्यवस्था को चुनौती
इस साल फरवरी में, जब नामांकन की अंतिम तारीख नजदीक थी, तब नित्या रमन ने अप्रत्याशित रूप से मेयर पद के लिए चुनाव लड़ने का फैसला किया। यह फैसला इसलिए भी हैरान करने वाला था क्योंकि वे शुरुआत में मौजूदा मेयर करेन बास का समर्थन कर रही थीं। सिटी काउंसिल की सदस्य होने के बावजूद नित्या ने खुद को मौजूदा सत्ता के ढर्रे के खिलाफ एक मजबूत विकल्प के रूप में पेश किया। उनका मानना है कि लॉस एंजिल्स का प्रशासन अंदरूनी लालफीताशाही और पुराने पड़ चुके तरीकों के कारण नाकाम साबित हो रहा है।
नित्या रमन के अभियान के मुख्य तीन स्तंभ
नित्या ने अपने पूरे चुनावी प्रचार को तीन बुनियादी समस्याओं पर केंद्रित रखा है, जो आम नागरिक के जीवन से सीधे जुड़े हैं:
- किफायती आवासीय व्यवस्था: आम किराएदारों को आसमान छूते किराए से राहत दिलाना उनकी प्राथमिकता है।
- शहरी बुनियादी ढांचा: खस्ताहाल सड़कों की मरम्मत से लेकर आपातकालीन सुरक्षा तंत्र को दुरुस्त करना।
- बेघर संकट का स्थायी समाधान: महज दिखावे के लिए टेंट हटाने के बजाय जवाबदेही तय करना और दीर्घकालिक आवास सुविधाएं मुहैया कराना।
अंतिम टीवी डिबेट: आक्रामकता बनाम रणनीति
हालिया टीवी डिबेट के दौरान दोनों उम्मीदवारों के बीच कड़ा मुकाबला देखा गया। नित्या रमन ने इस दौरान एक मनोवैज्ञानिक दांव खेला। उन्होंने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन के उस मशहूर सवाल को दोहराया, 'क्या आप चार साल पहले की तुलना में आज बेहतर स्थिति में हैं?' इस सवाल ने मतदाताओं के मन में हलचल पैदा कर दी है। मौजूदा मेयर के चार साल के कार्यकाल में बेघर संकट और हालिया पलिसाडेस फायर जैसी घटनाओं ने आम जनता को काफी निराश किया है। दूसरी ओर, करेन बास ने अपने लंबे प्रशासनिक अनुभव का हवाला देकर नित्या को 'प्राइम टाइम के लिए तैयार नहीं' करार देने की कोशिश की। बास के आक्रामक हमले के दौरान नित्या कुछ मौकों पर रक्षात्मक भी नजर आईं, जिसे उनके विरोधियों ने मुद्दा बनाने की कोशिश की।
सामने खड़ी चुनौतियां और विरोध
नित्या रमन के लिए यह सफर आसान नहीं रहा है। उनके राजनीतिक करियर के दौरान उन पर कई सवाल भी उठाए गए हैं। विरोधियों का आरोप है कि उन्होंने पुलिस विभाग (LAPD), मेंशन टैक्स और बेघर संकट से संबंधित परियोजनाओं पर समय-समय पर अपने विचार बदले हैं। इसके अलावा, उन्हें सिटी काउंसिल के भीतर से भी बड़ी चुनौती मिल रही है। लॉस एंजिल्स की राजनीति में मेयर को काउंसिल के साथ तालमेल बिठाना पड़ता है, लेकिन काउंसिल के 15 में से 13 सदस्य करेन बास का समर्थन कर रहे हैं। यहां तक कि 'डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट्स ऑफ अमेरिका' (DSA), जिसने कभी नित्या को आगे बढ़ाने में मदद की थी, इस बार उनके साथ खुलकर खड़ा नहीं है।
क्या इतिहास रचेंगी नित्या?
विशेषज्ञों के अनुसार, यह मुकाबला अंतिम क्षण तक रोमांचक रहने वाला है। यदि 3 नवंबर को बुजुर्ग और पारंपरिक वर्ग के मतदाता अधिक संख्या में निकलते हैं, तो करेन बास अपनी कुर्सी बचाने में सफल हो सकती हैं। लेकिन अगर बदलाव की चाह रखने वाले युवा और प्रगतिशील मतदाता पोलिंग बूथ तक पहुंचे, तो नित्या रमन का लॉस एंजिल्स की पहली एशियाई-अमेरिकी महिला मेयर बनना निश्चित है। केरल की माटी से निकलकर अमेरिका के दूसरे सबसे बड़े शहर की राजनीति के केंद्र में आना इस बात का प्रमाण है कि लगन और सही मुद्दों पर पकड़ होने से बड़ी से बड़ी बाधाएं पार की जा सकती हैं। अब अंतिम फैसला लॉस एंजिल्स की जनता के हाथ में है कि वे पुराने अनुभव को चुनती है या नित्या रमन के बदलाव के वादे पर भरोसा करती है।
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