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3 घंटे पहले
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डोनाल्ड ट्रंप का चौंकाने वाला ऐलान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मध्य पूर्व के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर एक बेहद विवादित और बड़ा बयान दिया है। शुक्रवार को एक चुनावी रैली के दौरान ट्रंप ने दावा किया कि ईरान को युद्ध में हराने के बाद वे होर्मुज जलडमरूमध्य को आधिकारिक रूप से अमेरिका का हिस्सा घोषित कर देंगे। ट्रंप की इस घोषणा ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। यदि ट्रंप की यह योजना धरातल पर उतरती है, तो इसका सीधा अर्थ यह होगा कि दुनिया के तेल और गैस व्यापार के प्रमुख केंद्र पर अमेरिकी नियंत्रण स्थापित हो जाएगा, जो ईरान के लिए एक बहुत बड़ा रणनीतिक झटका साबित होगा।
ईरान की ओर से कड़ा पलटवार
ट्रंप के इस बयान पर ईरान ने फौरन तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने सोशल मीडिया मंच X पर अपनी बात रखते हुए स्पष्ट किया कि होर्मुज हमेशा से ईरान का हिस्सा रहा है और भविष्य में भी रहेगा। उन्होंने कहा कि कोई भी चुनावी भाषण, ट्वीट, या विमानवाहक पोतों का दबाव ईरान को इस समुद्री रास्ते से बेदखल नहीं कर सकता। गरीबाबादी के अनुसार, इस जलमार्ग के खुलने या बंद होने का एकमात्र अधिकार ईरान के पास है और यह रास्ता पूरी तरह से तेहरान के आदेशों पर ही संचालित होता रहेगा।
काल्पनिक सोच का आरोप और जारी नाकाबंदी
ईरानी अधिकारियों ने अमेरिका पर आरोप लगाया कि वह वास्तविकता से कोसों दूर अपनी काल्पनिक दुनिया में जी रहा है। काजेम गरीबाबादी ने जोर देकर कहा कि इस संघर्ष में अमेरिका को अब तक भारी रणनीतिक नुकसान का सामना करना पड़ा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक अमेरिका अपनी पराजय को स्वीकार नहीं करता और क्षेत्र से जुड़ी अपनी गलत धारणाओं को नहीं छोड़ता, तब तक ईरान इस रास्ते की नाकाबंदी जारी रखेगा। ईरान का मानना है कि होर्मुज पर किसी भी बाहरी दावे का कोई कानूनी या नैतिक आधार नहीं है।
होर्मुज की अहमियत और ठप हुआ कारोबार
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए जीवन रेखा के समान है। दुनिया भर में तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा इसी संकीर्ण समुद्री रास्ते के जरिए होता है। हालांकि, मौजूदा तनाव और समुद्री जहाजों पर होने वाले हमलों के कारण इस मार्ग पर आवाजाही बहुत कम हो गई है। केपलर के शिप ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, शुक्रवार को इस रास्ते से केवल 2 कमोडिटी जहाज ही गुजर सके। सबसे चिंताजनक बात यह है कि उस दौरान कच्चे तेल का कोई भी जहाज इस क्षेत्र में नहीं दिखा।
जहाजों पर हमलों से बढ़ा तनाव
आंकड़ों पर गौर करें तो गुरुवार को महज 9 जहाज इस रास्ते से गुजरे थे, जबकि सामान्य दिनों में अगस्त के महीने में यहां से हर दिन लगभग 12 जहाज आवाजाही करते हैं। पिछले कुछ समय में आबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी द्वारा संचालित 2 जहाजों पर हुए हमलों ने स्थिति को और अधिक जटिल बना दिया है। संयुक्त अरब अमीरात ने इन हमलों के पीछे ईरान का हाथ होने का आरोप लगाया है, हालांकि ईरान की ओर से इस पर कोई तत्काल आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है। इन घटनाओं ने वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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