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एक घंटा पहले
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ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक चौंकाने वाला दावा किया है, जिसने दुनिया भर का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। ट्रंप का कहना है कि अमेरिका ने पिछले महीने होर्मुज जलडमरूमध्य में एक गुप्त सैन्य अभियान चलाया था, जिसकी बदौलत 10 करोड़ बैरल से ज्यादा तेल वैश्विक बाजार तक पहुंचाया जा सका।
ट्रुथ सोशल पर किया बड़ा खुलासा
अपने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर ट्रंप ने लिखा कि उन्होंने पिछले महीने अमेरिकी सेना को आदेश दिया था कि वह होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले तेल टैंकरों और व्यापारिक जहाजों की मदद के लिए एक गुप्त मिशन चलाए। उनके मुताबिक इसी अभियान के चलते 200 से ज्यादा कारोबारी जहाज सुरक्षित तरीके से जलडमरूमध्य को पार कर सके।
ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिकी कार्रवाई से वैश्विक तेल बाजार को बड़ी राहत मिली। उन्होंने दावा किया, ‘हर रात लाखों बैरल तेल बाहर निकाला गया। अगर ऐसा नहीं किया जाता तो तेल की कीमत 85-90 डॉलर के बजाय 250 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती थी।’ हालांकि, ट्रंप के इन दावों की स्वतंत्र रूप से कोई पुष्टि नहीं हुई है।
ऊर्जा मंत्री भी रह गए हैरान
ट्रंप के इस दावे के बाद अमेरिकी कांग्रेस में सुनवाई के दौरान ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट से पूछा गया कि क्या उन्हें ऐसे किसी अभियान की जानकारी है। इस पर राइट ने साफ कहा, ‘मुझे इसकी जानकारी नहीं है।’
जब उनसे पूछा गया कि क्या इसका मतलब यह है कि राष्ट्रपति झूठ बोल रहे हैं, तो उन्होंने जवाब दिया, ‘नहीं, मुझे नहीं लगता कि राष्ट्रपति झूठ बोल रहे हैं। मेरा मानना है कि वह ईरानी तेल को बाजार में पहुंचने से रोकने की अमेरिकी कोशिशों का जिक्र कर रहे हैं।’
होर्मुज पर अमेरिका के नियंत्रण का दावा
अपने बयान में ट्रंप ने सीधे ईरान को निशाने पर लेते हुए कहा, ‘यह मिशन इसलिए सफल रहा क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिका का नियंत्रण है, ईरान का नहीं। उनकी सेना हार चुकी है और उनकी अर्थव्यवस्था पूरी तरह तबाह हो चुकी है।’
गौरतलब है कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम शिपिंग मार्गों में गिना जाता है। दुनिया का लगभग पांचवां हिस्सा तेल और गैस इसी रास्ते से होकर गुजरता है।
ईरान को फिर दी सैन्य कार्रवाई की चेतावनी
व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने दो-टूक कहा कि अगर शांति समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका ईरान पर और हमले करेगा। उन्होंने कहा, ‘हम उन पर हमला करेंगे, बहुत जोरदार हमला करेंगे।’
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान पहले ही परमाणु हथियार न बनाने पर राजी हो चुका है, लेकिन अंतिम समझौते पर अब तक हस्ताक्षर नहीं हुए हैं। साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि अमेरिका अब भी कूटनीतिक समाधान का पक्षधर है। उन्होंने कहा, ‘हम ऐसा समझौता चाहते हैं जो वास्तव में काम करे।’
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