डोनाल्ड ट्रंप की कूटनीतिक चाल: ईरान के दो सहयोगियों को साथ लेकर यूक्रेन की राह मुश्किल की? विश्व एक महीने पहले 50
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि चीन और रूस ने उन्हें ईरान को हथियार न देने का भरोसा दिया है, जिसके बदले में यूक्रेन को लेकर उनकी नीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है।

ईरान को अलग-थलग करने की नई रणनीति

ईरान के साथ जारी सैन्य तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बेहद चतुर और हैरान कर देने वाली कूटनीतिक चाल चली है। जब सीधे सैन्य हमलों से ईरान की शक्ति को कम करना चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा था, तो ट्रंप ने उसे कूटनीतिक रूप से अलग-थलग करने का रास्ता चुना है। ट्रंप का दावा है कि उन्होंने ईरान के दो सबसे करीबी सहयोगियों को अपने पाले में लाने में सफलता प्राप्त कर ली है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर यह साझा किया है कि उन्होंने इन दोनों देशों के राष्ट्रपतियों से निजी स्तर पर फोन पर बात की है और उनसे ईरान की मदद न करने का वादा लिया है। हालांकि, इस कूटनीतिक उपलब्धि को हासिल करने के लिए ट्रंप को अपने एक पुराने सहयोगी देश की बलि देनी पड़ी है, जिसे अब हथियारों की आपूर्ति के मामले में दरकिनार किया जा रहा है।

चीन और रूस के साथ ट्रंप की गुप्त डील

ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से खुलासा किया है कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने उन्हें व्यक्तिगत आश्वासन दिया है कि वे ईरान को किसी भी प्रकार की सैन्य सहायता या हथियार प्रदान नहीं करेंगे। ट्रंप के अनुसार, बीजिंग में हुई उनकी हालिया मुलाकात के दौरान शी जिनपिंग ने स्पष्ट रूप से कहा था कि चीन की कोई भी कंपनी ईरान को न तो हथियार बेचेगी और न ही कोई सैन्य तकनीक मुहैया कराएगी। ट्रंप ने कहा कि वे शी जिनपिंग के इस वादे पर पूरा भरोसा करते हैं क्योंकि वे दोनों देशों के बीच के मजबूत संबंधों को महत्व देते हैं।

इसी तरह, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी ट्रंप को आश्वस्त किया है कि वे ईरान को हथियारों की बिक्री नहीं करेंगे। ट्रंप ने रूस और चीन को एक कड़ी चेतावनी देते हुए यह भी कहा कि अगर वे ईरान का साथ देते हैं, तो यह उनके अपने हितों के खिलाफ होगा और इसके परिणाम बहुत गंभीर हो सकते हैं। ट्रंप के शब्दों में, ईरान के मामले में जिन बड़े वैश्विक शक्तियों का अक्सर जिक्र होता है, वे वर्तमान में इस युद्ध का हिस्सा नहीं हैं और उन्हें ऐसा करने से बचना चाहिए।

क्या यूक्रेन को छोड़ा गया अधर में?

इस पूरी कूटनीतिक बिसात में सबसे बड़ा झटका यूक्रेन को लगा है। विश्लेषकों का मानना है कि रूस को ईरान से दूर रखने के बदले ट्रंप ने यूक्रेन के प्रति अपनी नीतियों में नरमी बरतने का फैसला किया है। जब ट्रंप से इस बारे में सवाल किया गया कि वे रूस के साथ कूटनीतिक सौदा कर रहे हैं जबकि यूक्रेन को हथियार दे रहे हैं, तो उन्होंने बहुत सावधानी से अपना पक्ष रखा। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमेरिका सीधे तौर पर यूक्रेन को कोई हथियार नहीं बेचता है। उन्होंने कहा, अमेरिका केवल NATO देशों को हथियार बेचता है, जो इसके लिए पूरी कीमत चुकाते हैं। इसके बाद वे हथियार कहां जाते हैं या उनका उपयोग कौन करता है, इस पर उनका नियंत्रण नहीं है। ट्रंप का यह बयान यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की के लिए एक बड़ा संकेत है कि अमेरिका अब ईरान पर ध्यान केंद्रित करने के लिए यूक्रेन के मसले पर रूस को ढील दे सकता है।

युद्ध का बढ़ता दायरा और सैन्य हमले

दूसरी तरफ, अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव का सिलसिला लगातार जारी है। संघर्ष विराम का समझौता टूटने के बाद अमेरिका ने ईरान के ठिकानों पर लगातार 13वीं रात भी बमबारी की है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड की रिपोर्ट के अनुसार, पूर्वी समय के अनुसार शाम 6:45 बजे ये हमले शुरू किए गए थे। इन सैन्य अभियानों का मुख्य उद्देश्य इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के बढ़ते खतरों को कम करना और कमर्शियल शिपिंग की सुरक्षा सुनिश्चित करना बताया गया है।

ईरान भी चुप नहीं बैठा है और उसने शुक्रवार शाम को कड़ा जवाब दिया है। IRGC ने कुवैत, बहरीन और जॉर्डन में स्थित अमेरिकी ठिकानों और संसाधनों पर जवाबी हमला किया है। ईरान के आधिकारिक समाचार माध्यम सेपा न्यूज के अनुसार, ये हमले अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ किए जा रहे तथाकथित अपराधों के प्रतिशोध में किए गए हैं। क्षेत्र में तनाव इस कदर बढ़ चुका है कि आने वाले समय में यह संघर्ष और भी घातक रूप ले सकता है, खासकर तब जब ट्रंप की कूटनीतिक चालों का असर जमीन पर दिखने लगेगा।

करण मल्होत्रा पाबना के अंतरराष्ट्रीय संवाददाता हैं, जो अमेरिका, यूरोप और एशिया की खबरें रिपोर्ट करते हैं। वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और बड़े अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर वे नजर रखते हैं। उनकी रिपोर्ट्स दुनिया की हलचल को पाठकों तक तेजी से पहुंचाती हैं।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप