चीन के 'साइलेंस ऑपरेशन' पर अमेरिकी संसद में हंगामा, डीपफेक और जासूसी समेत ड्रैगन की गुप्त चालों का खुलासा विश्व एक घंटा पहले 2
अमेरिकी कांग्रेस की एक सुनवाई में सांसदों और कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि चीन अपनी सीमाओं के बाहर भी आलोचकों को डराने, निगरानी और दबाव बनाने की वैश्विक मुहिम चला रहा है, जिसमें डीपफेक, स्पाइवेयर और अवैध पुलिस स्टेशन तक शामिल हैं।

अमेरिका और चीन के बीच तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। अमेरिकी कांग्रेस में एक बार फिर चीन सरकार की उन कोशिशों पर सवाल उठाए गए हैं, जिनके जरिए वह अपनी सीमाओं से बाहर रहने वाले आलोचकों की आवाज दबाने का प्रयास करती है। गुरुवार को हुई एक सुनवाई में सांसदों, राज्य अधिकारियों और लोकतंत्र समर्थक कार्यकर्ताओं ने कहा कि चीन अब केवल अपने देश के भीतर ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में डराने-धमकाने, निगरानी रखने और दबाव बनाने का अभियान तेज कर चुका है।

तियानमेन की बरसी पर हुई सुनवाई

यह सुनवाई कांग्रेसनल एग्जीक्यूटिव कमीशन ऑन चाइना (सीईसीसी) के तहत आयोजित की गई, जो तियानमेन स्क्वायर नरसंहार की 37वीं बरसी के दिन हुई। सुनवाई में सांसदों ने कहा कि चीन के तौर-तरीके अब घरेलू दमन से आगे निकलकर ‘ट्रांसनेशनल रिप्रेशन’, यानी सीमाओं के पार जाकर दमन करने की वैश्विक रणनीति का रूप ले चुके हैं।

क्रिस स्मिथ ने गिनाए चीन के हथकंडे

सुनवाई की शुरुआत में सह-अध्यक्ष सांसद क्रिस स्मिथ ने कहा कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) कई तरह के तरीके अपना रही है। इनमें चीन में रह रहे परिवार के सदस्यों को हिरासत में लेना, लोगों की निजी जानकारी सार्वजनिक करना (डॉक्सिंग), स्पाइवेयर का इस्तेमाल, डीपफेक वीडियो, हांगकांग से जुड़े इनाम (बाउंटी) और यहां तक कि अमेरिका में अवैध पुलिस स्टेशन चलाना तक शामिल है।

319 मामले सामने आने का दावा

सह-अध्यक्ष सांसद जिम मैकगवर्न ने कहा कि ट्रांसनेशनल दमन के मामले में चीन दुनिया का सबसे बड़ा देश है। फ्रीडम हाउस के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि 2014 से अब तक ऐसे 319 मामले सामने आ चुके हैं। उन्होंने यह भी मांग की कि कांग्रेस को ‘ट्रांसनेशनल रिप्रेशन पॉलिसी एक्ट’ पारित करना चाहिए, ताकि इस मुद्दे की कानूनी परिभाषा तय हो सके और सरकार की प्रतिक्रिया अधिक मजबूत बन सके।

आर्थर लियू की चौंकाने वाली गवाही

सुनवाई में सबसे अधिक ध्यान आकर्षित करने वाली गवाही आर्थर लियू की रही। लियू पहले चीन में लोकतंत्र समर्थक कार्यकर्ता थे और 1989 के तियानमेन आंदोलन के बाद चीन छोड़कर अमेरिका के कैलिफोर्निया में बस गए थे।

लियू ने बताया कि उन्हें लगता था कि अमेरिका आने के बाद उनका राजनीतिक उत्पीड़न खत्म हो गया है, लेकिन 2021 में हालात बदल गए। उस समय एफबीआई ने उन्हें बताया कि एक चीनी एजेंट उनके बारे में जानकारी इकट्ठा कर रहा है और उनकी बेटी, ओलंपिक फिगर स्केटर एलिसा लियू, के बारे में भी जानकारी जुटाने की कोशिश कर रहा है, ताकि 2022 बीजिंग विंटर ओलंपिक्स से पहले दबाव बनाया जा सके।

जीपीएस ट्रैकर और निगरानी का अंदेशा

लियू ने कहा, “एफबीआई ने मुझसे सावधान और सतर्क रहने को कहा।” उन्होंने बताया कि एजेंटों ने यह आशंका भी जताई थी कि संदिग्ध जासूस उनकी गतिविधियों पर नजर रख सकता है, उनकी गाड़ी में जीपीएस ट्रैकर लगा सकता है और उनके पासपोर्ट की जानकारी हासिल करने की कोशिश कर सकता है।

उन्होंने भावुक होते हुए कहा, “मुझे अपनी बेटी एलिसा की सुरक्षा को लेकर बहुत डर लग रहा था, जब वह अमेरिका की तरफ से चीन में प्रतियोगिता में भाग लेने जा रही थी।”

बेहतर समन्वय और नए कानून की मांग

यह सुनवाई ऐसे समय में हुई, जब सांसदों ने एक बार फिर इस तरह के मामलों से निपटने के लिए संघीय, राज्य और स्थानीय एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल बनाने और इसके लिए नए कानून पारित करने की मांग की।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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