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एक घंटा पहले
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सरकारी परीक्षा में धांधली का सनसनीखेज मामला
सरकारी नौकरी की परीक्षाओं को देश में शुचिता और कड़ी मेहनत का पर्याय माना जाता है, लेकिन केरल से सामने आया एक मामला इस व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े कर रहा है। केरल लोक सेवा आयोग यानी केपीएससी की ओर से आयोजित की जाने वाली परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं, भाई-भतीजावाद और तकनीकी चूक के आरोप लगे हैं। राज्य की क्राइम ब्रांच की विशेष जांच टीम इस मामले में लगातार कार्रवाई कर रही है, जिससे नौकरी की आस लगाए बैठे युवाओं का भरोसा टूट रहा है।
गूगल और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से सीधे कॉपी हुए सवाल
इस पूरे विवाद की जड़ सहायक मोटर वाहन निरीक्षक पद के लिए आयोजित की गई परीक्षा में सामने आई धांधली है। जांच में पता चला है कि इस परीक्षा में पूछे गए कुल 45 सवाल इंटरनेट पर मौजूद विभिन्न स्टडी मटीरियल से ज्यों के त्यों उठा लिए गए थे। आरोप है कि प्रश्नपत्र तैयार करने वालों ने अपनी मेहनत के बजाय स्कैमवेदा और सैनफाउंड्री जैसी वेबसाइट्स का सहारा लिया। इतना ही नहीं, इस भर्ती प्रक्रिया में शारीरिक मानकों के नियमों को भी ताक पर रखकर उन उम्मीदवारों को परीक्षा में शामिल होने दिया गया, जो निर्धारित योग्यता को पूरा नहीं करते थे।
जांच के घेरे में आयोग के आला अधिकारी
क्राइम ब्रांच ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कई मुकदमे दर्ज किए हैं। जांच की आंच अब केपीएससी के उच्च पदों तक पहुंच चुकी है। आयोग के अध्यक्ष एमआर बैजू और अन्य सदस्यों से भी इस संबंध में विस्तृत पूछताछ की जा चुकी है। अब तक इस प्रकरण में 2 अधिकारियों को गिरफ्तार भी किया गया है। सरकारी नौकरियों में पारदर्शिता को सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी जिन हाथों में थी, अब वे खुद ही जांच के घेरे में आ गए हैं।
मत्स्य विभाग की भर्ती में भाई-भतीजावाद के गंभीर आरोप
केपीएससी के खिलाफ शिकायतों का सिलसिला केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं है। मत्स्य विस्तार अधिकारी की भर्ती परीक्षा में भी भारी गड़बड़ियों की जानकारी मिली है। यह भर्ती प्रक्रिया अगस्त 2020 में शुरू हुई थी और इसकी रैंक लिस्ट नवंबर 2022 में जारी की गई थी। आरोप है कि केरल यूनिवर्सिटी ऑफ फिशरीज एंड ओसियन स्टडीज के कुछ विशेष उम्मीदवारों को अनुचित लाभ दिलाने के लिए नियमों में हेरफेर किया गया। चर्चा है कि ये उम्मीदवार केपीएससी के चेयरमैन और सत्ताधारी पार्टी से जुड़े प्रभावशाली लोगों के बेहद करीब थे।
तकनीकी खामी से बदली टॉपर्स की किस्मत
राज्य योजना बोर्ड की परीक्षा में एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया, जो ऑन स्क्रीन मार्किंग सिस्टम में तकनीकी गलती से जुड़ा है। यहां अर्थशास्त्र विषय के 10 वर्णनात्मक प्रश्नों के लिए आवंटित कुल 58 अंक मूल्यांकनकर्ताओं तक पहुँचे ही नहीं, जिसके चलते बिना पूर्ण मूल्यांकन के ही परिणाम घोषित कर दिए गए। जब इस बड़ी खामी की शिकायत दर्ज कराई गई और उत्तर पुस्तिकाओं का पुनर्मूल्यांकन हुआ, तो परिणाम पूरी तरह बदल गए। पुनर्मूल्यांकन के बाद श्याम कृष्णा, जो पहले तीसरे पायदान पर थे, वे सीधे पहले स्थान पर पहुंच गए। वहीं, पहले स्थान पर काबिज अरुण जे प्रदीप का स्थान खिसककर पांचवें नंबर पर आ गया, जिससे पूरी चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे हैं।
अन्य विभागों में भी जारी है जांच
क्राइम ब्रांच की एसआईटी अब इन सभी अनियमितताओं के तार जोड़ने में जुटी है। केवल सहायक मोटर वाहन निरीक्षक या मत्स्य विभाग ही नहीं, बल्कि खादी बोर्ड और ग्राम तेल निरीक्षक के पदों पर की गई भर्तियों की भी गहन जांच की जा रही है। यह माना जा रहा है कि सरकारी नौकरी के नाम पर पर्दे के पीछे बहुत बड़ा खेल चल रहा था, जिसका खुलासा जांच के अंतिम नतीजों के बाद ही हो सकेगा। फिलहाल, राज्य के युवा इस उम्मीद में हैं कि जांच पारदर्शी तरीके से पूरी होगी और दोषियों को सख्त सजा मिलेगी।
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