9/11 हमले के बाद जब अमेरिका का आसमान था बंद, तब इस एक विमान को मिली थी उड़ान भरने की खास इजाजत विश्व 2 घंटे पहले 2
11 सितंबर 2001 के आतंकी हमलों के बाद अमेरिका में एयरस्पेस पूरी तरह ठप था, लेकिन एक शख्स की जान बचाने के लिए विशेष एंटीवेनम लाने हेतु विमान को उड़ान भरने की मंजूरी दी गई थी।

आतंक का साया और बंद आसमान

11 सितंबर 2001 का दिन अमेरिकी इतिहास का सबसे काला दिन माना जाता है। जब न्यूयॉर्क में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर आतंकी हमले हुए, तो पूरे अमेरिका में खौफ का मंजर था। सुरक्षा की दृष्टि से फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन यानी FAA ने पूरे देश में हाई अलर्ट घोषित कर दिया था। उस दौरान देश की सीमाओं और शहरों के ऊपर का एयरस्पेस पूरी तरह से बंद कर दिया गया था। किसी भी नागरिक विमान को उड़ान भरने की अनुमति नहीं थी और हवा में मौजूद सभी विमानों को तत्काल प्रभाव से सुरक्षित स्थानों पर उतारने का कड़ा निर्देश दिया गया था। पूरा देश एक अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा था।

एक जान और एक जहरीला सांप

इस पूरे तनावपूर्ण माहौल के बीच, फ्लोरिडा के मियामी में एक और बड़ी आपदा जन्म ले रही थी। 62 वर्षीय लॉरेंस वैन सर्टिमा नामक व्यक्ति को दुनिया के सबसे खतरनाक और जहरीले सांपों में शुमार किए जाने वाले इनलैंड ताइपन ने काट लिया था। वैन सर्टिमा खुद सांपों को संभालने के विशेषज्ञ थे, लेकिन एक छोटी सी चूक उनकी जान पर बन आई। सांप के काटते ही उनका स्वास्थ्य तेजी से बिगड़ने लगा। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने पाया कि सांप का जहर उनके नर्वस सिस्टम पर जानलेवा हमला कर रहा था। उनके शरीर के अंगों से खून बहने लगा और वह कोमा जैसी स्थिति में चले गए थे।

लाइफ-सेविंग दवा की खोज

डॉक्टरों के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि वैन सर्टिमा के इलाज के लिए जिस विशिष्ट एंटीवेनम की आवश्यकता थी, वह मियामी के स्थानीय अस्पतालों में उपलब्ध नहीं था। लंबी खोजबीन के बाद पता चला कि यह दुर्लभ दवा केवल न्यूयॉर्क के ब्रॉन्क्स चिड़ियाघर और कैलिफोर्निया के सैन डिएगो चिड़ियाघर में ही मौजूद है। समस्या यह थी कि देश के हवाई यातायात पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा हुआ था। उन हालात में किसी भी दवा या माल की ढुलाई को असंभव माना जा रहा था। अस्पताल प्रशासन और वैन सर्टिमा के परिजन बेहद चिंतित थे क्योंकि समय तेजी से हाथ से निकलता जा रहा था।

मेडिकल इमरजेंसी के लिए एक साहसी प्रयास

इस जटिल स्थिति में बैपटिस्ट हेल्थ साउथ फ्लोरिडा की एयर एंबुलेंस सेवा से जुड़े जॉनी डेलगाडो ने हार नहीं मानी। उन्होंने हार मानने के बजाय सीधे FAA के वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क करने का फैसला किया। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट तौर पर समझाया कि यह कोई सामान्य व्यावसायिक उड़ान नहीं है, बल्कि एक जीवन-मरण का मामला है। यदि समय पर एंटीवेनम नहीं पहुँचा, तो मरीज की मौत निश्चित है। डेलगाडो की दलीलों और मरीज की गंभीर स्थिति का आकलन करने के बाद FAA ने एक दुर्लभ निर्णय लिया।

उड़ान की अनुमति और शर्तें

सख्त सुरक्षा घेरे और प्रतिबंधों के बावजूद, अधिकारियों ने इस विशेष मेडिकल मिशन को हरी झंडी दे दी। हालांकि, इस अनुमति के साथ कुछ कड़े नियम भी जोड़े गए थे। सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह थी कि विमान को केवल दिन के उजाले के दौरान ही उड़ान भरने की अनुमति होगी। यह मिशन किसी भी तरह के जोखिम से मुक्त होना चाहिए था। 9/11 की त्रासदी के सन्नाटे और दहशत के बीच, उस विमान ने सैन डिएगो से मियामी के लिए अपनी यात्रा शुरू की। यह उड़ान केवल एक डिब्बे में रखी उस जीवन रक्षक दवा के लिए थी, जिसने एक व्यक्ति को मौत के मुंह से खींचने का बीड़ा उठाया था।

इनलैंड ताइपन के जहर का घातक प्रभाव

विशेषज्ञों के अनुसार, इनलैंड ताइपन का जहर इतना शक्तिशाली होता है कि वह पल भर में मानव रक्त के थक्के जमने की प्रक्रिया को बाधित कर देता है। यह जहर न केवल रक्त संचार को रोकता है, बल्कि सीधे तंत्रिका तंत्र और मांसपेशियों को नष्ट करने का काम करता है। यही कारण था कि वैन सर्टिमा को बचाने के लिए एंटीवेनम का पहुँच जाना ही एकमात्र विकल्प था। जब यह दवा मियामी पहुंची, तो डॉक्टरों ने तुरंत उसे मरीज पर इस्तेमाल किया। यह पूरी प्रक्रिया किसी चमत्कार से कम नहीं थी कि कैसे एक तरफ देश अपनी सुरक्षा को लेकर जूझ रहा था, वहीं दूसरी तरफ मानवीय संवेदना के चलते एक व्यक्ति को बचाने का अनूठा प्रयास भी सफल रहा।

करण मल्होत्रा पाबना के अंतरराष्ट्रीय संवाददाता हैं, जो अमेरिका, यूरोप और एशिया की खबरें रिपोर्ट करते हैं। वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और बड़े अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर वे नजर रखते हैं। उनकी रिपोर्ट्स दुनिया की हलचल को पाठकों तक तेजी से पहुंचाती हैं।

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