अखिलेश यादव को भगवान विष्णु के अवतार में दिखाने पर बवाल, संतों में फैला भारी रोष उत्तर प्रदेश एक महीने पहले 59
बनारस में समाजवादी पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा अखिलेश यादव को भगवान विष्णु के कृष्ण स्वरूप में दिखाने वाले पोस्टर पर विवाद खड़ा हो गया है, जिससे संतों और सनातन धर्म के अनुयायियों में गहरा आक्रोश है।

उत्तर प्रदेश के बनारस में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा जारी किए गए एक पोस्टर को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के 53वें जन्मदिन के अवसर पर जारी किए गए इस पोस्टर में उन्हें जगत के पालनहार भगवान विष्णु (श्रीकृष्ण स्वरूप) के रूप में दर्शाया गया है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें इस विवादित पोस्टर की बकायदा पूजा-अर्चना की जा रही है। इस घटना के सामने आने के बाद से ही सनातन धर्म को मानने वाले लोगों, संतों, महंतों और ब्रज के निवासियों में गहरा रोष फैल गया है।

फलाहारी महाराज दिनेश शर्मा ने दर्ज कराया कड़ा विरोध

इस पूरे मामले पर श्रीकृष्ण जन्मभूमि मामले के मुख्य पक्षकार फलाहारी महाराज दिनेश शर्मा ने बेहद तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने इस कृत्य की घोर निंदा करते हुए इसे धार्मिक आस्था के साथ खिलवाड़ बताया है। फलाहारी महाराज का कहना है कि किसी भी साधारण मनुष्य या राजनीतिक हस्ती की तुलना साक्षात ईश्वर से कभी नहीं की जा सकती। उन्होंने इसे सनातन धर्म और उसके प्रतीकों का उपहास उड़ाने वाला कृत्य करार दिया। महाराज दिनेश शर्मा ने प्रदेश सरकार और प्रशासन से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने और दोषी कार्यकर्ताओं के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कदम उठाने की पुरजोर मांग की है।

राजनीति के लिए भगवान के स्वरूप का इस्तेमाल अनुचित

धार्मिक नेताओं का मानना है कि अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं और व्यक्तिपूजा के लिए देवी-देवताओं के पवित्र रूपों का इस तरह का उपयोग करना बेहद आपत्तिजनक है। फलाहारी महाराज ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस प्रकार के कृत्य हिंदू समाज की धार्मिक भावनाओं को गंभीर चोट पहुंचाते हैं। उन्होंने कहा कि ईश्वर का स्वरूप अत्यंत पूजनीय है और इसे राजनीतिक प्रचार का माध्यम बनाना सनातन मर्यादाओं का खुला उल्लंघन है, जिसे किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

प्रशासन से जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग

विवाद गहराने के बाद संतों ने प्रशासन से इस मामले की पूरी गंभीरता से जांच करने का आग्रह किया है। फलाहारी महाराज दिनेश शर्मा ने मांग उठाई है कि:

  • पोस्टर जारी करने और पूजा करने वाले सभी समाजवादियों की पहचान की जाए।
  • धार्मिक प्रतीकों का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित हो।
  • भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कड़े नियम बनाए जाएं।

उन्होंने सभी राजनीतिक दलों और उनके कार्यकर्ताओं को सलाह दी कि वे आस्था से जुड़े संवेदनशील विषयों पर संयम और मर्यादा बनाए रखें।

ब्रज क्षेत्र के संतों और धर्माचार्यों में भारी नाराजगी

अखिलेश यादव के इस पोस्टर विवाद की गूंज पूरे ब्रज क्षेत्र में सुनाई दे रही है। मथुरा और आस-पास के क्षेत्रों के प्रमुख संतों और धर्माचार्यों ने इस पर अपनी गहरी नाराजगी प्रकट की है। संतों का सामूहिक रूप से कहना है कि समाज के सभी वर्गों और विशेषकर राजनीतिक दलों की यह जिम्मेदारी है कि वे धार्मिक आस्थाओं का सम्मान करें। चुनावी लाभ या चर्चा में आने के लिए ऐसे विवादास्पद कृत्यों से बचना चाहिए जिससे सामाजिक समरसता बिगड़ती है और लोगों की भावनाएं आहत होती हैं।

चेतन तिवारी पाबना के उत्तर प्रदेश संवाददाता हैं और राज्य की राजनीति, प्रशासन तथा जमीनी मुद्दों को कवर करते हैं। लखनऊ में रहते हुए वे जिलों से लेकर विधानसभा तक की खबरें संतुलित रिपोर्टिंग के साथ पाठकों तक पहुंचाते हैं। आम लोगों के मुद्दों और स्थानीय घटनाओं पर उनका खास फोकस रहता है।

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