उत्तर प्रदेश
एक घंटा पहले
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सफेद संगमरमर से बना ताजमहल अपनी खूबसूरती और इतिहास से जुड़े अनेक किस्सों के लिए दुनिया भर में मशहूर है। इसी ऐतिहासिक इमारत की मुख्य गुंबद की पश्चिमी दिशा में एक विशाल मस्जिद बनी हुई है, जिसका धार्मिक और स्थापत्य दोनों दृष्टियों से विशेष महत्व बताया जाता है।
मकबरे के पास मस्जिद की इस्लामी परंपरा
आगरा कॉलेज के वरिष्ठ प्रोफेसर राजपाल सिंह के अनुसार, इस्लामी परंपरा में किसी भी मकबरे या कब्र के पास मस्जिद का होना आवश्यक माना जाता है। उन्होंने बताया कि ताजमहल के पास बनी इस मस्जिद परिसर में आने वाले लोगों को नमाज पढ़ने की सुविधा मिलती है, जो इस स्थान को पवित्र भी बनाती है। उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्था के अनुसार मकबरे के निकट मस्जिद का होना शुभ माना जाता है और यही वजह है कि मुगलकाल में ताजमहल के निर्माण के साथ-साथ इस मस्जिद का भी निर्माण कराया गया था।
इस्लामिक धार्मिक महत्व का अनूठा उदाहरण
प्रोफेसर राजपाल सिंह ने बताया कि ताजमहल की मुख्य गुंबद की पश्चिमी दिशा में लाल बलुआ पत्थरों से बनी यह खूबसूरत मस्जिद इस्लामिक धार्मिक महत्व का अनूठा उदाहरण है। उन्होंने बताया कि शुक्रवार के दिन यहाँ इस्लाम धर्म के लोग बड़ी संख्या में नमाज अदा करने आते हैं।
उनके मुताबिक, इस दिन ताजमहल पूरे दिन आम पर्यटकों के लिए बंद रहता है और केवल नमाजी ही दोपहर के समय यहाँ नमाज अदा करने आ सकते हैं।
वास्तुकला का बेहतरीन नमूना
प्रोफेसर ने बताया कि पश्चिमी दिशा में बनी लाल पत्थरों की यह मस्जिद अद्भुत वास्तुकला की झलक प्रस्तुत करती है। मस्जिद की दीवारों पर कुरान की आयतें और अल्लाह के नाम बड़ी ही खूबसूरती से उकेरे गए हैं, जो इसे और भी आकर्षक बनाते हैं।
उन्होंने बताया कि मस्जिद के फर्श को इस तरह डिज़ाइन किया गया है कि नमाज की चटाई, जिसे मुसल्ला कहा जाता है, आसानी से दिखाई दे सके। प्रोफेसर के अनुसार मस्जिद में कुल 569 काली धारियाँ बनी हुई हैं, जो दुआ करने वालों के लिए स्थान दर्शाती हैं।
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