भारत
2 घंटे पहले
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भारत की सैन्य रणनीति का बड़ा खुलासा
भारत के पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने देश की सैन्य तैयारियों और अतीत के एक महत्वपूर्ण ऑपरेशन से जुड़ी अहम जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान भारतीय सेना ने पाकिस्तान के सरगोधा एयरबेस पर हमला करने के बाद गिलगित-बाल्टिस्तान स्थित स्कार्दू एयरबेस को अपना निशाना बनाने की पूरी योजना बनाई थी। जनरल चौहान के अनुसार, यह ऑपरेशन उस दौर की स्थितियों में बहुत महत्वपूर्ण था।
स्कार्दू को लेकर क्या थी योजना?
विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान पूर्व CDS ने इस ऑपरेशन की यादें ताजा कीं। उन्होंने बताया कि जब पाकिस्तान की ओर से बातचीत की पेशकश हुई, तो उसी समय भारतीय वायु सेना प्रमुख ने उनसे सरगोधा एयरबेस पर हमला करने के बारे में राय मांगी थी। जनरल चौहान ने उस वक्त सेना की कमान संभाली हुई थी। उन्होंने बताया, मैंने एयर चीफ से कहा कि वे आगे बढ़ें और साथ ही दो अन्य लक्ष्यों की पहचान करें। इसके बाद स्कार्दू को एक संभावित लक्ष्य के रूप में चुना गया। हालांकि, उस समय मौसम अचानक खराब हो गया, जिसके चलते भारतीय सेना को अपनी योजना में बदलाव करना पड़ा और अंततः उन्हें अपना रुख बदलकर भोलाड़ी की ओर बढ़ना पड़ा।
किराना हिल्स के बारे में स्थिति स्पष्ट की
पाकिस्तान की परमाणु सुविधाओं से जुड़े किराना हिल्स को लेकर लंबे समय से चर्चाएं होती रही हैं कि क्या भारत ने कभी उसे निशाना बनाया था। इस विषय पर जनरल चौहान ने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी। उन्होंने एयर मार्शल एके भारती के बयान का समर्थन किया, जो उस दौरान भारतीय वायु सेना में एयर ऑपरेशन्स के डायरेक्टर जनरल (DGAO) के पद पर तैनात थे। जनरल चौहान ने जोर देकर कहा कि भारत ने कभी भी किराना हिल्स पर हमला नहीं किया। एयर मार्शल भारती ने भी पिछले साल 12 मई को यही बात कही थी कि किराना हिल्स को टारगेट नहीं बनाया गया था।
लोइटरिंग म्यूनिशन और सरगोधा का सच
जनरल चौहान ने विस्तार से समझाया कि आखिर किराना हिल्स को लेकर गलतफहमी क्यों हुई। उन्होंने बताया कि हमलों से ठीक पहले भारतीय सेना ने सरगोधा की दिशा में कई 'लोइटरिंग म्यूनिशन' तैनात किए थे। गौरतलब है कि किराना हिल्स सरगोधा से महज 10 किलोमीटर उत्तर की ओर स्थित है। उन्होंने कहा कि 'लोइटरिंग म्यूनिशन' दुश्मन के राडार को तलाशने का काम करते हैं। ये उपकरण हवा में करीब दो घंटे तक घूमते रहते हैं और यदि उन्हें कोई निश्चित लक्ष्य नहीं मिलता है, तो वे नीचे गिरकर कहीं भी टकरा सकते हैं। शायद यही कारण रहा होगा कि किराना हिल्स को लेकर भ्रम पैदा हुआ, जबकि सच्चाई यही है कि भारतीय सेना का निशाना वहां नहीं था।
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