हिमालय की गोद में प्रकृति ने उकेरा 'ॐ', शिव की इस दिव्य तपोस्थली के दर्शन से मिलती है परम शांति धर्म एक घंटा पहले 2
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित ॐ पर्वत पर दूर से ही पहाड़ों के शिखर पर प्राकृतिक 'ॐ' का भव्य रूप दिखाई देता है। माना जाता है कि महादेव की इस तपोस्थली के दर्शन मात्र से मन को असीम शांति और सुकून मिलता है।

भारत प्रकृति की अनुपम छटा और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरा हुआ देश है। यहां कई ऐसे अनोखे स्थल मौजूद हैं, जहां पहुंचते ही या दर्शन करते ही मन तरोताजा हो उठता है और भक्ति भाव से भर जाता है। जब बात देवाधिदेव महादेव की आती है, तो देश में उनकी शक्ति और दिव्यता को दर्शाने वाले अनेक पवित्र तीर्थ हैं। इन्हीं में से एक अद्भुत स्थान है उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित ॐ पर्वत। धार्मिक मान्यता है कि इस पावन पर्वत के दर्शन मात्र से शिव की उपस्थिति का अनुभव होता है और मन को मानसिक शांति मिलती है। यदि आप गर्मियों की छुट्टियों में कहीं घूमने की योजना बना रहे हैं, तो यह स्थल आपके लिए बिल्कुल उपयुक्त है।

प्रकृति ने स्वयं रचा 'ॐ'

देवभूमि उत्तराखंड का पिथौरागढ़ जिला केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए ही नहीं, बल्कि महादेव की तपोस्थली के रूप में भी प्रसिद्ध है। पहाड़ों के बीच बसा यहां एक ऐसा अनूठा पर्वत है, जहां प्रकृति ने स्वयं पवित्र हिंदू प्रतीक 'ॐ' का भव्य स्वरूप रच दिया है। इसे ओम पर्वत के नाम से जाना जाता है। दूर से देखने पर यह पर्वत हूबहू 'ॐ' के आकार में दिखाई देता है, जो श्रद्धालुओं के हृदय को भक्ति और विस्मय दोनों से भर देता है।

ओम पर्वत हिमालय पर्वतमाला का हिस्सा है और पिथौरागढ़ जिले के नाभीढांग (नबीधांग) क्षेत्र में 5900 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। खास बात यह है कि यह आकृति कृत्रिम नहीं है, बल्कि पूरी तरह प्राकृतिक रूप से बनी हुई है।

धार्मिक ग्रंथों में 'ॐ' का उल्लेख

धार्मिक ग्रंथों में 'ॐ' की उत्पत्ति का वर्णन मिलता है। शिव पुराण के अनुसार 'ॐ' की उत्पत्ति ब्रह्मांड की रचना से भी पहले हुई थी। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार विश्व में आठ छिपे हुए प्राकृतिक 'ॐ' प्रतीक हैं, जिनमें से एक उत्तराखंड का यह ॐ पर्वत है। हिंदू और बौद्ध, दोनों ही धर्मों में इसे अत्यंत पवित्र माना जाता है और इसे भगवान शिव का निवास स्थान भी समझा जाता है।

आदि कैलाश के नाम से भी प्रसिद्ध

ॐ पर्वत कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग पर पड़ता है। श्रद्धालु नाभीढांग शिविर से इस पर्वत के दर्शन कर सकते हैं। नाभीढांग शिविर पिथौरागढ़ से करीब 170 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, जहां से ॐ पर्वत स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। यह स्थान आदि कैलाश या छोटा कैलाश के नाम से भी विख्यात है। श्रद्धालुओं का कहना है कि आदि कैलाश और ॐ पर्वत के दर्शन मात्र से मन को असीम शांति और परमानंद की अनुभूति होती है।

ओम पर्वत कैसे पहुंचें

अब सवाल यह उठता है कि महादेव के इस दिव्य स्थल के दर्शन के लिए ओम पर्वत कैसे पहुंचा जाए। इसके लिए सबसे पहले पिथौरागढ़ पहुंचना होता है। यहां से धारचूला होते हुए आगे बढ़ना पड़ता है। धारचूला में एसडीएम कार्यालय से इनर लाइन परमिट लेना अनिवार्य है। इसके बाद टैक्सी के जरिए आसानी से नाभीढांग तक पहुंचा जा सकता है।

छोटा कैलाश तक पहुंचने के कई रास्ते हैं। नैनी सैनी हवाई अड्डे से यह स्थल 175 किलोमीटर दूर है। वहीं काठगोदाम रेलवे स्टेशन से इसकी दूरी 422 किलोमीटर है, जबकि सड़क मार्ग से पिथौरागढ़ जिला मुख्यालय से यह 178 किलोमीटर दूर पड़ता है।

पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र

श्रद्धालुओं का मानना है कि यह यात्रा केवल दर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आध्यात्मिक शुद्धि और जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति की यात्रा भी है। उत्तराखंड को देवभूमि कहे जाने के पीछे यह पवित्र स्थल भी एक बड़ा कारण है। आध्यात्मिक पर्यटन के लिए हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंचते हैं।

ओम पर्वत न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि प्रकृति प्रेमियों और एडवेंचर पसंद पर्यटकों के लिए भी यह आकर्षण का बड़ा केंद्र है। दूर-दूर से लोग यहां महादेव की तपोस्थली के दर्शन करने आते हैं। बहुत से लोग मानते हैं कि यहां आकर मन की सारी चिंताएं दूर हो जाती हैं और हृदय भक्ति भाव से भर उठता है।

चेतन शुक्ला
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चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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