मालपुए: सिर्फ मिठास नहीं, रिश्तों की डोर का प्रतीक; 33 मालपुओं के दान की निराली परंपरा धर्म एक महीने पहले 16
अधिक मास के दौरान बीकानेर में 33 मालपुओं के दान की मान्यता निभाई जाती है, जिसके चलते लोग बहन-बेटियों के घर मालपुए भेजकर रिश्तों की मिठास और अपनापन बढ़ाते हैं।

अधिक मास की शुरुआत होते ही बीकानेर में आस्था और स्वाद का एक अनूठा मेल देखने को मिलता है। इस पवित्र अवधि में मालपुओं की मिठास घर-घर तक पहुँचती है और धार्मिक भावना के साथ जुड़कर यह परंपरा और भी खास बन जाती है।

33 मालपुओं के दान की मान्यता

अधिक मास में 33 मालपुओं के दान की विशेष मान्यता है। इसी आस्था के चलते इन दिनों मिठाई की दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ बढ़ जाती है। लोग बड़ी संख्या में मालपुए तैयार करवाते हैं ताकि इस परंपरा को पूरे विधि-विधान से निभाया जा सके।

रिश्तों को जोड़ती मिठास

इस परंपरा में लोग मालपुए बनवाकर अपनी बहनों और बेटियों के घर भेजते हैं। यह सिलसिला केवल मिठाई बाँटने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे परिवारों के बीच प्रेम, स्नेह और अपनेपन की भावना और मजबूत होती है।

स्वाद और परंपरा का प्रतीक

आटे और रबड़ी से तैयार होने वाले मालपुए जहाँ अपने स्वाद के लिए जाने जाते हैं, वहीं ये परंपरा और संस्कृति का भी प्रतीक माने जाते हैं। हर निवाले के साथ इनमें सदियों पुरानी रीति की झलक मिलती है।

नई पीढ़ी भी निभा रही परंपरा

सदियों पुरानी यह परंपरा आज भी पूरे उत्साह के साथ निभाई जा रही है। खास बात यह है कि नई पीढ़ी भी इस रीति को अपनाकर इसे आगे बढ़ा रही है, जिससे यह विरासत पीढ़ी-दर-पीढ़ी जीवित बनी हुई है।

चेतन शुक्ला
Official Verified Account

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप