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2 घंटे पहले
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नया फोन खरीदने के बाद अकसर पुराना स्मार्टफोन या तो किसी दराज में पड़ा रहता है या फिर रिसाइकिल के लिए भेज दिया जाता है। लेकिन अब गूगल एक ऐसी राह तलाश रहा है, जिसके जरिए यही बेकार समझे जाने वाले फोन दोबारा उपयोगी साबित हो सकते हैं। कंपनी का मानना है कि पुराने मोबाइल को छोटे डेटा सेंटर या कंप्यूटिंग सिस्टम में तब्दील किया जा सकता है, जिससे इलेक्ट्रॉनिक कचरा कम होगा और तकनीक पर्यावरण के लिहाज से ज्यादा अनुकूल बन सकेगी।
आखिर गूगल कर क्या रहा है?
गूगल ने यह शोध अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया सैन डिएगो के साथ मिलकर किया है। इस परियोजना को 'Phone Cluster Computing' नाम दिया गया है। इस तरीके में पुराने स्मार्टफोन के उन हिस्सों को अलग कर दिया जाता है, जिनकी जरूरत नहीं रहती — जैसे स्क्रीन, कैमरा, बैटरी और बाहरी बॉडी।
इन्हें हटाने के बाद सिर्फ मदरबोर्ड बचता है, जिसमें प्रोसेसर, स्टोरेज और मेमोरी जैसे अहम पुर्जे मौजूद रहते हैं। इन मदरबोर्ड्स को आपस में जोड़कर Linux आधारित सिस्टम पर चलाया जाता है। इसके प्रबंधन के लिए Kubernetes जैसे टूल का सहारा लिया जाता है, जो बड़े क्लाउड सिस्टम को संभालने में मदद करता है।
कैसे तैयार होंगे डेटा सेंटर?
गूगल की रिसर्च के अनुसार, 25 से 50 पुराने स्मार्टफोन मिलकर कुछ खास कामों में एक एडवांस सर्वर के बराबर कंप्यूटिंग क्षमता दे सकते हैं। अगर हजारों पुराने फोन एक साथ जोड़ दिए जाएं, तो वे क्लाउड सर्विस, रिसर्च प्रोजेक्ट और एजुकेशन प्लेटफॉर्म जैसी जरूरतों को पूरा कर सकते हैं।
रिपोर्ट की मानें तो आने वाले समय में करीब 2,000 पुराने Pixel स्मार्टफोन को जोड़कर एक बड़ा कंप्यूटिंग क्लस्टर बनाने की योजना है।
छात्रों और शोध को होगा फायदा
यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया सैन डिएगो इस तकनीक को Systems Programming और Parallel Computing जैसे पाठ्यक्रमों में इस्तेमाल करना चाहती है। इससे विद्यार्थियों को कम खर्च में ही बड़े कंप्यूटिंग सिस्टम पर काम करने का अवसर मिलेगा।
पर्यावरण के लिए भी राहत
हर साल करोड़ों स्मार्टफोन बेकार होकर इलेक्ट्रॉनिक कचरे का हिस्सा बन जाते हैं। अगर गूगल का यह प्रयोग कामयाब रहता है, तो इन पुराने फोन को नई जिंदगी मिल सकती है। इससे नए सर्वर बनाने की जरूरत घटेगी और पर्यावरण पर पड़ने वाला असर भी कम होगा।
यानी भविष्य में आपका पुराना स्मार्टफोन महज एक बेकार डिवाइस नहीं रहेगा, बल्कि किसी छोटे डेटा सेंटर का हिस्सा भी बन सकता है।
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