इम्तियाज अली की फिल्म का चर्चित गाना 'इश्क मस्ताना' है 600 साल पुराने कबीर के दोहे से प्रेरित मनोरंजन 2 घंटे पहले 3
इम्तियाज अली की फिल्म 'मैं वापस आऊंगा' के मशहूर गाने 'इश्क मस्ताना' के पीछे संत कबीर दास की 600 साल पुरानी रचना का आधार है। गीतकार इरशाद कामिल ने कबीर के दार्शनिक भावों को नए शब्दों में पिरोकर इसे आज के दर्शकों के लिए तैयार किया है।

कबीर के दर्शन से सजा नया संगीत

निर्देशक इम्तियाज अली की फिल्म मैं वापस आऊंगा, जो 12 जून को रिलीज हुई थी, लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है। दर्शक न केवल फिल्म की कहानी की सराहना कर रहे हैं, बल्कि इसके म्यूजिक एल्बम को भी काफी पसंद कर रहे हैं। फिल्म का एक खास गाना इश्क मस्ताना काफी ट्रेंड कर रहा है। कम ही लोग जानते हैं कि इस गाने की रूह 600 साल पहले रचे गए महान संत कबीर दास के एक दोहे में बसी है। गीतकार इरशाद कामिल ने इस प्राचीन दोहे को आधुनिक संवेदनाओं के साथ जोड़कर नए सिरे से पेश किया है।

हमन है इश्क मस्ताना का दार्शनिक आधार

फिल्म में इश्क मस्ताना गाना आत्मा और ईश्वर के बीच के प्रेम को दर्शाता है। यह गीत कबीर के अद्वैतवाद दर्शन से प्रेरित है, जिसकी मूल पंक्तियाँ हैं, 'हमन हैं इश्क़ मस्ताना हमन को होशियारी क्या, रहें आजाद या जग से हमन दुनिया से यारी क्या।' कबीर ने अपने इस दोहे के माध्यम से बताया था कि जो व्यक्ति ईश्वर के प्रेम में पूरी तरह डूब चुका है, उसे सांसारिक दुविधाओं की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। इम्तियाज अली ने इसी दार्शनिक गहराई को फिल्म की कहानी में पिरोने का प्रयास किया है।

इरशाद कामिल का जादुई लेखन

गीतकार इरशाद कामिल ने एआर रहमान के संगीत के साथ मिलकर इस दोहे को एक नया रूप दिया है। गाने में पंजाबी शब्दावली का उपयोग इसे और अधिक प्रभावी बनाता है। यूट्यूब पर इस गाने को अब तक 13 मिलियन से अधिक बार देखा जा चुका है। सोशल मीडिया के विभिन्न मंचों पर भी इस गीत को खूब सराहा जा रहा है। इरशाद कामिल ने न केवल शब्दों का चयन बखूबी किया है, बल्कि कबीर के मूल भाव को भी बरकरार रखा है, जिससे गाना सुनने के बाद भी काफी समय तक दर्शकों के जेहन में बना रहता है।

संत कबीर दास का मूल दोहा

कबीर की मौलिक रचना इस प्रकार है:

  • हमन हैं इश्क़ मस्ताना हमन को होशियारी क्या
  • रहें आज़ाद या जग से हमन दुनिया से यारी क्या
  • जो बिछड़े हैं पियारे से भटकते दर-ब-दर फिरते
  • हमारा यार है हम में हमन को इंतिज़ारी क्या
  • ख़लक़ सब नाम अपने को बहुत कर सर पटकता है
  • हमन गर नाम साँचा है हमन दुनिया से यारी क्या
  • न पल बिछ्ड़ें पिया हम से न हम बिछड़े पियारे से
  • उन्हीं से नेह लागी है हमन को बे-क़रारी क्या
  • 'कबीरा' इश्क़ का माता दुई को दूर कर दिल से
  • जो चलना राह नाज़ुक है हमन सर बोझ भारी क्या

चेतन शुक्ला
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चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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