राजस्थान और हरियाणा के बीच 32 साल पुराना यमुना जल विवाद सुलझा, लाखों लोगों को मिलेगा पीने का पानी राजस्थान 2 महीने पहले 98
राजस्थान और हरियाणा के मुख्यमंत्रियों ने दशकों पुराने यमुना जल विवाद को समाप्त करने के लिए एक ऐतिहासिक समझौते पर सहमति जताई है, जिससे राजस्थान के तीन जिलों में पेयजल की किल्लत दूर होगी।

ऐतिहासिक समझौते से खत्म हुआ जल संकट

राजस्थान और हरियाणा के बीच पिछले 32 साल से चला आ रहा यमुना जल बंटवारे का विवाद अब समाप्त हो गया है। इस महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर के दौरान राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी मौजूद रहेंगे। इस ऐतिहासिक अवसर पर केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की उपस्थिति भी सुनिश्चित की गई है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निरंतर प्रयासों के परिणाम स्वरूप मात्र सवा दो साल की अवधि में इस जटिल मुद्दे पर सहमति बन सकी है। इस समझौते का मुख्य लक्ष्य उन इलाकों में जलापूर्ति करना है, जो लंबे समय से गंभीर जल संकट से जूझ रहे हैं।

परियोजना की प्रमुख विशेषताएं

इस नई व्यवस्था के तहत कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जाएंगे जो इस प्रकार हैं:

  • हरियाणा सरकार ने वर्ष 1994 में हुए यमुना जल बंटवारा समझौते को पूर्ण रूप से लागू करने पर अपनी सहमति दे दी है, जिसके तहत राजस्थान को उसका वाजिब हक दिया जाएगा।
  • हरियाणा के हथिनीकुंड बैराज से राजस्थान तक जल पहुंचाने के लिए लगभग 295 किलोमीटर लंबी एक विशेष अंडरग्राउंड पाइपलाइन का निर्माण किया जाएगा।
  • इस वृहद परियोजना के माध्यम से राजस्थान के शेखावाटी अंचल को 1917 क्यूसेक पानी उपलब्ध कराया जाएगा।

इन जिलों की बदलेगी तस्वीर

इस समझौते से राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र में बसे तीन जिलों की बड़ी आबादी को सीधे तौर पर लाभ मिलेगा। इनमें शामिल जिले इस प्रकार हैं:

  • चूरू
  • सीकर
  • झुंझुनू

यह समझौता न केवल दोनों राज्यों के बीच जल सहयोग को नई दिशा देगा, बल्कि भविष्य में इन जिलों के सामाजिक और आर्थिक विकास के नए द्वार भी खोलेगा।

विवाद की पृष्ठभूमि

राजस्थान और हरियाणा के बीच यह गतिरोध वर्ष 1994 में हुए अंतर-राज्यीय समझौते के सही क्रियान्वयन न होने के कारण बना हुआ था। उस समय तय हुआ था कि राजस्थान को यमुना के पानी का करीब 10.4 प्रतिशत हिस्सा प्राप्त होगा, जिसे हथिनीकुंड बैराज से राज्य तक पहुंचाना था। हालांकि, बीते तीन दशकों में नहर निर्माण और जल उपलब्धता जैसे तकनीकी मुद्दों पर सहमति न बन पाने से यह मामला अटका हुआ था। हरियाणा का कहना था कि गैर-मानसून समय में उसके पास अतिरिक्त पानी का अभाव रहता है, जबकि दूसरी ओर राजस्थान के शेखावाटी और राजगढ़ जैसे इलाके, जो मरुस्थलीय और भूजल संकट का सामना कर रहे हैं, पानी की एक-एक बूंद के लिए जूझ रहे थे। अब इस समझौते से इन क्षेत्रों के निवासियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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