अहमदाबाद से कानपुर तक नकली घी और मसालों का जहर, करोड़ों का मिलावटी सामान बरामद भारत एक घंटा पहले 3
देश के कई प्रमुख शहरों में नकली खाद्य पदार्थों का बड़ा कारोबार पकड़ा गया है, जहां अहमदाबाद में 30 हजार लीटर नकली घी और कानपुर में मसालों की बड़ी खेप बरामद हुई है।

बाजार में बिक रहे जहर से रहें सावधान

यदि आप बाजार से सस्ता घी, हल्दी, मिर्च या जीरा जैसी रोजमर्रा की खाने की चीजें खरीदते हैं, तो आपको बेहद सतर्क रहने की जरूरत है। हो सकता है कि आप जिसे शुद्ध घी समझकर खरीद रहे हैं, उसमें असली घी की एक बूंद तक न हो। इसी तरह बाजार में धड़ल्ले से बिकने वाली अन्य सस्ती खाद्य सामग्रियां आपकी और आपके परिवार की सेहत के लिए गंभीर खतरा बनी हुई हैं। हाल ही में देश के विभिन्न हिस्सों में मिलावटखोरों के बड़े गिरोहों का पर्दाफाश हुआ है जो खुलेआम आम जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे थे।

अहमदाबाद में नकली घी की बड़ी फैक्ट्री का खुलासा

अहमदाबाद में पुलिस और खाद्य विभाग ने एक ऐसी फैक्ट्री पकड़ी है जो पॉमोलिन ऑयल को विभिन्न रसायनों के माध्यम से देशी घी के रूप में तैयार कर रही थी। छापेमारी के दौरान पुलिस ने 30 हजार लीटर नकली घी बरामद किया है। इसके अलावा, मौके से 50 हजार लीटर ऐसा संदिग्ध चीनी रसायन भी मिला है, जिसका उपयोग पॉमोलिन तेल को असली घी जैसा रंग, रूप और गंध देने में किया जाता था। एफडीए के अधिकारी यह देखकर दंग रह गए कि तैयार किया गया नकली घी इतना सटीक था कि सामान्य उपकरणों से भी असली और नकली में अंतर करना मुश्किल था। इसका फैट कंटेंट भी असली घी जैसा ही पाया गया। इस गिरोह का सरगना पूर्व में भी इसी तरह के अपराधों में लिप्त रहा है और 2 साल पहले जेल जा चुका है। जमानत पर बाहर आने के बाद उसने फिर से अपना यह अवैध कारोबार गुजरात के अलावा राजस्थान, महाराष्ट्र और पंजाब जैसे राज्यों तक फैला दिया था।

डीआईजी ने दी खतरनाक रसायनों की जानकारी

गांधीनगर रेंज के डीआईजी वीरेंद्र सिंह यादव ने इस मामले की जानकारी देते हुए बताया कि बरामद किए गए नकली घी की कुल कीमत लगभग पौने दो करोड़ रुपये है। उन्होंने बताया कि फैक्ट्री से 78 लाख रुपये का ऐसा घातक रसायन भी जब्त किया गया है, जो सीधे तौर पर मानव स्वास्थ्य के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।

लुधियाना में भी सप्लाई की कड़ी

नकली घी के इस काले कारोबार की जड़ें अन्य राज्यों तक भी फैली हुई हैं। आज लुधियाना में भी एक गोदाम पर छापा मारा गया जहां से 3 हजार लीटर नकली घी बरामद हुआ। जांच में यह सामने आया कि यह सारा माल अहमदाबाद की उसी फैक्ट्री से मंगाया गया था। स्थानीय दुकानदार इसे 450 रुपये प्रति किलो के भाव पर बेच रहे थे। पुलिस को शक था कि इतने कम दाम में असली गाय का घी मिलना असंभव है, इसलिए जब रेड की गई तो सारा सच सामने आ गया। पुलिस अब जब्त किए गए नमूनों की लैब जांच करवा रही है।

कानपुर में मसालों के नाम पर मिलावट का खेल

मिलावट की खबरें केवल घी तक सीमित नहीं हैं। उत्तर प्रदेश के कानपुर में मसालों के नाम पर जहरीले रसायनों और रंगों का उपयोग किया जा रहा था। एक फैक्ट्री से 2 हजार किलो ऐसी हल्दी पकड़ी गई जिसमें हल्दी का अंश तक नहीं था। वहां खराब गुणवत्ता वाले चावल के पाउडर में रासायनिक रंगों को मिलाकर उसे हल्दी का रूप दिया जा रहा था। इसी तरह लाल मिर्च पाउडर में हानिकारक रंग और धनिया पाउडर में रंगे हुए लकड़ी के बुरादे का इस्तेमाल हो रहा था। खाद्य विभाग ने इस फैक्ट्री से कुल 5 लाख 86 हजार रुपये के मिलावटी मसालों का स्टॉक जब्त किया है।

हैदराबाद में भी पुलिस की बड़ी कार्रवाई

तेलंगाना के हैदराबाद में भी मिलावटखोरों का नेटवर्क सक्रिय पाया गया। वहां तीन अलग-अलग दुकानों से पॉलिश्ड जीरा और लौंग बरामद की गई। मसालों को ताजा दिखाने के लिए उन पर कपड़ों को रंगने वाली खतरनाक डाई का प्रयोग किया गया था। पुलिस कमिश्नर ने स्पष्ट किया है कि ऐसे अपराधियों के खिलाफ केवल साधारण धाराओं के बजाय गैर इरादतन हत्या जैसे गंभीर मामले दर्ज किए जाएंगे।

देशभर में मिलावट के आंकड़े डराने वाले

संसद में प्रस्तुत आंकड़ों के मुताबिक, बीते पांच वर्षों में पूरे भारत में 8 लाख 86 हजार खाद्य नमूनों की जांच की गई थी। इनमें से करीब 20 प्रतिशत नमूने मिलावटी पाए गए थे। दुखद यह है कि इनमें से 75 प्रतिशत से ज्यादा मामलों में केवल आर्थिक जुर्माना लगाकर छोड़ दिया गया, जबकि केवल 3 प्रतिशत मामलों में ही दोषियों को सजा मिल सकी है। इससे पूर्व एफएसएसएआई ने दिल्ली और हरियाणा में एक बड़े अभियान के दौरान 6,500 लीटर से ज्यादा मिलावटी घी जब्त किया था, जो यह दर्शाता है कि यह समस्या कितनी गहरी और व्यापक है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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