तिरुपति मंदिर में प्रसाद का नया रिकॉर्ड: जून महीने में बिके 1.26 करोड़ से ज्यादा लड्डू, पिछले सालों की तुलना में भारी बढ़ोतरी भारत 2 महीने पहले 71
तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम ने जून के महीने में 1.26 करोड़ से अधिक लड्डुओं की रिकॉर्ड बिक्री दर्ज की है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 6 प्रतिशत से भी अधिक है।

आंध्र प्रदेश के प्रसिद्ध तिरुमाला वेंकटेश्वर मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की भारी संख्या के बीच प्रसाद के रूप में बांटे जाने वाले पवित्र लड्डुओं की मांग ने एक नया इतिहास रच दिया है। मंदिर का प्रबंधन संभालने वाले तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) द्वारा जारी किए गए ताजा आंकड़ों के मुताबिक, जून 2026 के महीने में मंदिर ने रिकॉर्डतोड़ 1.26 करोड़ से अधिक लड्डुओं की बिक्री की है। इस जबरदस्त बिक्री के साथ ही प्रसादम की मांग के पिछले सभी पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त हो गए हैं। पिछले साल की तुलना में इस बार की बिक्री में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था और संख्या दोनों लगातार बढ़ रही हैं।

लड्डू की मांग में दर्ज की गई रिकॉर्ड वृद्धि

TTD की ओर से जारी एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में इस ऐतिहासिक उपलब्धि की जानकारी साझा की गई है। आंकड़ों का विश्लेषण करें तो जून 2026 में हुई 1.26 करोड़ लड्डुओं की बिक्री वास्तव में एक अभूतपूर्व मील का पत्थर है। यदि हम इसकी तुलना जून 2025 की बिक्री से करें, तो इस बार लगभग 7.5 लाख अधिक लड्डू बेचे गए हैं। यह पिछले वर्ष के इसी महीने के मुकाबले करीब 6.37 प्रतिशत की शानदार बढ़ोतरी को दर्शाता है।

अगर दो साल पहले के आंकड़ों पर नज़र डालें, तो यह वृद्धि और भी अधिक चौंकाने वाली है। जून 2024 की तुलना में इस बार जून में 24 लाख से अधिक अतिरिक्त लड्डुओं की बिक्री दर्ज की गई है। इस तरह, दो वर्षों की अवधि में मंदिर के प्रसादम की बिक्री में कुल 23.5 प्रतिशत का भारी उछाल आया है। यह वृद्धि केवल जून के महीने तक ही सीमित नहीं रही है, बल्कि इससे पहले के महीनों में भी मांग लगातार बढ़ रही थी। आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2026 में TTD ने 1.1 करोड़ से अधिक लड्डू बेचे थे, जबकि इसके ठीक बाद मई 2026 में यह आंकड़ा 1.2 करोड़ के पार पहुंच गया था।

प्रबंधन की बेहतर योजना से आसान हुआ वितरण

तिरुमाला में भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन के लिए देश-विदेश से आने वाले भक्तों का तांता साल भर लगा रहता है। भक्तों की इसी बढ़ती भीड़ को ध्यान में रखते हुए TTD ने पहले से ही व्यापक स्तर पर तैयारी की थी। विज्ञप्ति के अनुसार, श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए देवस्थानम ने लड्डुओं के उत्पादन और उनके वितरण की बेहद सटीक और प्रभावी योजना तैयार की। मंदिर प्रशासन ने प्रसादम की उत्पादन क्षमता को काफी बढ़ा दिया, जिससे काउंटर पर आने वाले किसी भी श्रद्धालु को खाली हाथ न लौटना पड़े। इस बेहतरीन प्रबंधन की बदौलत बिना किसी रुकावट के लगातार लड्डुओं का वितरण सुनिश्चित किया गया, जिससे श्रद्धालुओं को बेहद सुगमता से पवित्र प्रसाद प्राप्त हुआ।

प्रसाद की शुद्धता और गुणवत्ता के लिए बड़ा कदम

तिरुपति देवस्थानम ने न केवल लड्डुओं की संख्या और वितरण को सुचारू बनाया है, बल्कि इसके स्वाद और गुणवत्ता को भी उच्चतम स्तर पर बनाए रखने के लिए एक बड़ा फैसला किया है। इसके तहत, अपने संपूर्ण खाद्य प्रबंधन और रसोई तंत्र में आधुनिक वैज्ञानिक मानकों को शामिल करने के लिए TTD ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह साझेदारी वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद्-केंद्रीय खाद्य प्रौद्योगिक अनुसंधान संस्थान, मैसुरु (CSIR-CFTRI) के साथ की गई है।

इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मंदिर की रसोई में उपयोग होने वाली सभी खाद्य सामग्रियां और तैयार होने वाले सभी प्रसाद पूरी तरह से उच्चतम गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों की कसौटी पर खरे उतरें। मंदिर प्रशासन के अनुसार, यह समझौता प्रसादम की पारंपरिक विशेषता, उसके विशेष स्वाद और उसकी पौराणिक महत्ता को बनाए रखेगा, और साथ ही सुरक्षा, पोषण व स्वच्छता के आधुनिक मानकों को भी मजबूती से लागू करेगा। यह सहयोग मुख्य रूप से सुरक्षा को मजबूत करने, गुणवत्ता नियंत्रण को बेहतर बनाने, वितरण प्रणालियों को आधुनिक बनाने और प्रसादम के पारंपरिक स्वरूप को सुरक्षित रखने पर केंद्रित रहेगा।

इन विशेष उपायों पर रहेगा मुख्य जोर

इस ऐतिहासिक समझौते के तहत कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं ताकि प्रसादम के स्तर को और बेहतर किया जा सके:

  • कड़े गुणवत्ता मानक और निगरानी: दोनों संस्थानों की एक संयुक्त टीम कच्चे माल की खरीद, भोजन तैयार करने और उसके वितरण के लिए कड़े गुणवत्ता नियंत्रण मानक विकसित करेगी। इसके लिए मानक संचालन प्रक्रियाओं और निरंतर निगरानी प्रणालियों को लागू किया जाएगा।
  • प्रणालियों का आधुनिकीकरण: तकनीक और विज्ञान के इस दौर में प्रणालियों को नया रूप दिया जाएगा। CSIR-CFTRI भंडारण, परीक्षण और खरीद की प्रक्रियाओं को अपग्रेड करने के लिए तकनीकी सलाह देगा। इसके अलावा, किसी भी प्रकार के संदूषण के जोखिम को कम करने के लिए वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों की सिफारिश की जाएगी।
  • शेल्फ-लाइफ और पैकेजिंग में सुधार: प्रसादम के संरक्षण के लिए विशेष रूप से शोध-आधारित पैकेजिंग तकनीक विकसित की जाएगी। इससे लड्डू और अन्य प्रसादों की शेल्फ-लाइफ यानी भंडारण अवधि को बढ़ाने में मदद मिलेगी, ताकि दूर-दराज से आने वाले भक्त इसे लंबे समय तक सुरक्षित रख सकें। इस प्रक्रिया में प्रसाद के पारंपरिक स्वाद, उसकी बनावट और उसके सांस्कृतिक महत्व से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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