उपनाम: ग्रामीण विकास
लखपति दीदी योजना: सालाना 1 लाख रुपये तक की कमाई का सुनहरा मौका, जानिए आवेदन की प्रक्रिया
सरकार की लखपति दीदी योजना ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का एक बड़ा माध्यम है। इस पहल के जरिए 3 करोड़ महिलाओं की सालाना आय को कम से कम 1 लाख रुपये तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है।
पलामू के ग्रामीण इलाकों में विकास की नई सुबह: 'ग्राम सेवा परियोजना' से स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार की राह हुई आसान
पलामू जिले में एसबीआई फाउंडेशन और एडेंट संस्था की 'ग्राम सेवा परियोजना' ग्रामीणों के लिए वरदान साबित हो रही है, जहां एक ही छत के नीचे इलाज से लेकर रोजगार और शिक्षा से लेकर पशु चिकित्सा तक की आधुनिक सुविधाएं मिल रही हैं।
छत्तीसगढ़ में 'मेरी बेटी-मेरा अभिमान' अभियान का आगाज़, 6671 स्कूलों में बनेंगे बालिका शौचालय
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने छत्तीसगढ़ में ग्रामीण विकास और महिला सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए 696 करोड़ रुपये की बड़ी योजनाओं को मंजूरी दी है, जिसमें स्कूलों में शौचालय निर्माण और मनरेगा मजदूरी में वृद्धि शामिल है।
जोधपुर: अनार की खेती को मिलेगी नई रफ्तार, कृषि विश्वविद्यालय तैयार कर रहा है एक्सपर्ट्स की फौज
राजस्थान में अनार की खेती को बढ़ावा देने के लिए जोधपुर कृषि विश्वविद्यालय ने अनोखी पहल की है। स्थानीय युवाओं को अनार की कटाई-छंटाई का वैज्ञानिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि किसानों की लागत कम हो और स्वरोजगार के अवसर पैदा हों।
सागर में सड़कों का जाल: 50 करोड़ 77 लाख की लागत से बदल जाएगी 58 गांवों की सूरत
मध्य प्रदेश के सागर जिले में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 62 किलोमीटर लंबी सड़कें बनाई जा रही हैं, जिससे 33 गांवों के संपर्क मार्ग सुधरेंगे और 58 गांव मुख्य रास्तों से जुड़ जाएंगे।
बांस की 15 दुर्लभ प्रजातियां: निर्माण से लेकर स्वादिष्ट व्यंजन तक, जानिए इसके हैरान करने वाले उपयोग
डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय में बांस की विभिन्न प्रजातियों पर शोध किया जा रहा है, जो केवल निर्माण ही नहीं बल्कि खाद्य पदार्थों में भी इस्तेमाल होती हैं।
मछली पालन के साथ तालाब में करें सिंघाड़े की खेती, ऐसे होगी दोगुनी कमाई
बिहार के छपरा में किसान एक ही तालाब से मछली और सिंघाड़े की खेती कर बंपर मुनाफा कमा रहे हैं। जानिए इस दोहरी खेती के लिए किन खास बातों का ध्यान रखना जरूरी है।
बिहार में शिक्षा की नई अलख: अधूरी पढ़ाई छोड़ चुकीं महिलाओं को मैट्रिक पास करने का मिलेगा दूसरा मौका
बिहार में जीविका और प्रथम संस्था ने एक अनूठी पहल शुरू की है, जिसके तहत ग्रामीण महिलाएं अपनी उम्र की परवाह किए बिना दोबारा मैट्रिक की परीक्षा दे सकेंगी।
सतना में सिस्टम की पोल खोलती तस्वीर: सड़क के अभाव में चारपाई पर मरीज को ढोने को मजबूर ग्रामीण
मध्य प्रदेश के सतना जिले के रामपुरा गांव में पक्की सड़क न होने के कारण आज भी मरीजों को चारपाई पर लिटाकर मुख्य मार्ग तक लाया जाता है, जिससे विकास के बड़े-बड़े दावों की पोल खुल रही है।
डिंडौरी में सरकारी तंत्र की अनदेखी: स्कूल ढहने के बाद ग्रामीणों ने खुद उठाया बीड़ा, चंदे से बन रही इमारत
मध्य प्रदेश के डिंडौरी में एक गांव के लोग अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए खुद स्कूल बना रहे हैं। पुराना भवन गिरने के बाद प्रशासनिक मदद न मिलने पर ग्रामीणों ने चंदा जुटाकर यह पहल की है।
यूपी पुलिस का अनोखा मिशन: सुदूर गांव की उन महिलाओं को कराया वाराणसी भ्रमण, जिन्होंने कभी नहीं देखा था शहर
उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले के एक दुर्गम पहाड़ी गांव की महिलाओं की इच्छा पुलिस ने पूरी की है। मिशन शक्ति 5.0 के तहत इन महिलाओं को वाराणसी बुलाकर धार्मिक स्थलों और शहर की सैर कराई गई।
चित्रकूट: महुआ पुरवा से जीरा गांव तक बनेगी नई सड़क, 50 साल पुरानी समस्या से मिलेगी राहत
उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले में सड़क निर्माण की कवायद शुरू हो गई है, जिससे ग्रामीणों को कीचड़ और जलभराव से हमेशा के लिए छुटकारा मिल जाएगा।
बिहार के मुंगेर में बदली तस्वीर, भुना पंचायत में एक ही छत के नीचे मिलेंगी सभी सरकारी सुविधाएं
मुंगेर जिले की भुना पंचायत में अत्याधुनिक पंचायत सरकार भवन का उद्घाटन किया गया है, जहां अब ग्रामीणों को बैंक, डाकघर और राजस्व विभाग से जुड़ी सेवाएं एक ही जगह पर मिलेंगी।
जैतपुरा की बदली तकदीर: खेती को छोड़ औद्योगिक केंद्र बनकर उभरा गांव, 250 से ज्यादा फैक्ट्रियों से मिली नई पहचान
जयपुर के चौमूं स्थित जैतपुरा गांव ने विकास की नई इबारत लिखी है। पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर यह गांव अब एक बड़े औद्योगिक पावरहाउस के रूप में विकसित हो चुका है, जहां 250 से अधिक लघु और मध्यम उद्योग चल रहे हैं।
नागौर में सरकारी वादों से हताश ग्रामीणों ने दिखाई एकजुटता, खुद फावड़ा उठाकर बनाई आधा किलोमीटर सड़क
नागौर जिले के लाम्बा जाटान और सोडास गांव के लोगों ने वर्षों की उपेक्षा के बाद खुद संसाधन जुटाकर सड़क का निर्माण किया है। सरकारी मदद के इंतजार के बजाय ग्रामीणों ने श्रमदान कर इस समस्या का समाधान निकाला।