जोधपुर: अनार की खेती को मिलेगी नई रफ्तार, कृषि विश्वविद्यालय तैयार कर रहा है एक्सपर्ट्स की फौज राजस्थान एक घंटा पहले 3
राजस्थान में अनार की खेती को बढ़ावा देने के लिए जोधपुर कृषि विश्वविद्यालय ने अनोखी पहल की है। स्थानीय युवाओं को अनार की कटाई-छंटाई का वैज्ञानिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि किसानों की लागत कम हो और स्वरोजगार के अवसर पैदा हों।

राजस्थान में अनार उत्पादन के लिए नई रणनीति

राजस्थान में अनार की खेती अब नई ऊंचाइयों को छूने की तैयारी में है। जोधपुर स्थित कृषि विश्वविद्यालय ने एक अभिनव पहल करते हुए स्थानीय ग्रामीण युवाओं को अनार की वैज्ञानिक कटाई और छंटाई यानी प्रूनिंग के लिए प्रशिक्षित करना शुरू किया है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य राज्य में अनार उत्पादन को बढ़ावा देना और खेती को अधिक लाभदायक बनाना है। अब तक अनार के बागों की देखरेख के लिए किसानों को महाराष्ट्र और गुजरात जैसे दूरदराज के राज्यों से श्रमिकों पर निर्भर रहना पड़ता था, जिससे उनकी उत्पादन लागत काफी बढ़ जाती थी।

स्थानीय युवाओं को मिलेगा रोजगार

विश्वविद्यालय की इस नई पहल से न केवल किसानों को अपने बगीचों के लिए प्रशिक्षित श्रमिक मिलेंगे, बल्कि ग्रामीण युवाओं के लिए स्वरोजगार के नए द्वार भी खुलेंगे। कृषि विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि यदि तकनीक का सही प्रसार हो, तो राज्य में अनार की गुणवत्ता और कुल उत्पादन दोनों में भारी सुधार देखा जा सकता है। इससे राजस्थान न केवल अनार उत्पादन में आत्मनिर्भर बनेगा, बल्कि किसानों की आर्थिक स्थिति में भी बड़ा सुधार आएगा।

वैज्ञानिक तरीके से मिल रहा प्रशिक्षण

कृषि विश्वविद्यालय ने पहली बार स्थानीय स्तर पर युवाओं को अनार की वैज्ञानिक प्रूनिंग का औपचारिक प्रशिक्षण दिया है। इस प्रशिक्षण के दौरान युवाओं को कई महत्वपूर्ण पहलुओं में दक्ष बनाया गया है, जिनमें शामिल हैं:

  • पौधों की सटीक कटाई और छंटाई की प्रक्रिया।
  • उत्पादकता बढ़ाने के लिए सही शाखाओं का चयन।
  • अनार के पौधों में लगने वाले विभिन्न रोगों का बेहतर प्रबंधन।
  • बेहतर पैदावार सुनिश्चित करने वाली आधुनिक तकनीकें।

प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद कई युवाओं ने न केवल अपने स्वयं के खेतों में इन तकनीकों का सफलतापूर्वक उपयोग शुरू किया है, बल्कि वे आसपास के अन्य किसानों के बागों में अपनी सेवाएं देकर अच्छी कमाई भी कर रहे हैं। इससे गांवों में कृषि से जुड़ी सेवाओं के क्षेत्र में एक नई कार्यसंस्कृति विकसित हो रही है।

पश्चिमी राजस्थान में बढ़ी अनार की खेती

ड्रिप सिंचाई की सुविधाओं के विस्तार के बाद जोधपुर, जालोर, सिरोही, बाड़मेर, पाली और जैसलमेर सहित पूरे पश्चिमी राजस्थान के जिलों में अनार की खेती किसानों की आय का मुख्य जरिया बन गई है। मानसून से पहले प्रतिवर्ष लाखों अनार के पौधों की वैज्ञानिक प्रूनिंग करना बेहद अनिवार्य होता है। पहले बाहरी राज्यों से आने वाले श्रमिक प्रति पौधा 20 से 30 रुपये तक का शुल्क वसूलते थे, जो कि छोटे और मंझोले किसानों के लिए एक बड़ा आर्थिक बोझ था। अब स्थानीय स्तर पर कुशल युवा उपलब्ध होने से यह अतिरिक्त खर्च बचेगा और प्रदेश का पैसा राज्य के भीतर ही रहेगा।

विश्वविद्यालय का विजन

कृषि विश्वविद्यालय, जोधपुर के कुलगुरु प्रो. डॉ. वी.एस. जैतावत ने इस पहल पर जानकारी देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय का लक्ष्य केवल प्रयोगशालाओं तक शोध सीमित रखना नहीं है, बल्कि ऐसी तकनीकों को सीधे किसानों के खेत तक पहुंचाना है जिनसे खेती का व्यवसाय अधिक मुनाफा देने वाला बन सके। यह प्रूनिंग प्रशिक्षण कार्यक्रम इसी दूरदर्शी सोच का परिणाम है। आने वाले दिनों में इस प्रशिक्षण मुहिम का दायरा और बढ़ाया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक युवा आत्मनिर्भर बन सकें और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नई मजबूती मिल सके।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप