उपनाम: बागवानी
आम के पेड़ से चाहिए ज्यादा और भारी फल, तो तुड़ाई के बाद अपनाएं यह तरीका
सहारनपुर के कृषि विशेषज्ञों के अनुसार 10 साल से अधिक उम्र के आम के पेड़ों में जिंक सल्फेट, कॉपर सल्फेट, सुहागा और नीला थोथा को गोबर की खाद के साथ मिलाकर डालने से पोषक तत्वों की कमी दूर होती है। इससे अगले सीजन में बेहतर गुणवत्ता और अधिक संख्या में फल मिलते...
मशरूम की खेती से दोहरी कमाई का तरीका, मधुबनी की किसान स्वाति ने बताए आसान उपाय
मशरूम उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले बैग को फेंकने के बजाय खाद बनाकर बेचा जा सकता है। मधुबनी की महिला किसान स्वाति एक बोरी खाद 600-700 रुपये में बेचती हैं।
खेती में ग्राफ्टिंग विधि क्या है? जिससे दो पौधे बन जाते हैं एक, किसानों के लिए वरदान बन रही नई तकनीक
ग्राफ्टिंग एक ऐसी बागवानी तकनीक है जिसमें दो अलग-अलग पौधों के हिस्सों को जोड़कर एक नया और मजबूत पौधा तैयार किया जाता है। यह पौधों को जल्दी फल देने, बेहतर गुणवत्ता और अधिक रोग प्रतिरोधक क्षमता देने में मदद करती है।
बिहार की भीषण गर्मी में लहलहा रहे पहाड़ी जैसे लाल रसीले सेब, चंपारण के किसान की मेहनत रंग लाई, मिल रहा मनचाहा दाम
पश्चिम चंपारण के शिशिर दुबे ने दो साल पहले अपने बाग में करीब 70 सेब के पौधे लगाए थे, जो अब अच्छा फल दे रहे हैं। गर्म इलाके में उगने वाला यह सेब बाजार में 200 से 250 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है।
कटहल किसानों के लिए हरा खजाना, सही प्रजाति और देखभाल से साधारण पेड़ भी देगा बंपर पैदावार
बढ़ती लागत के बीच कटहल कम खर्च में लंबे समय तक आमदनी देने वाला बहुउपयोगी पेड़ है। विशेषज्ञ के अनुसार सही प्रजाति, समय पर पोषण और वैज्ञानिक देखभाल अपनाकर किसान कम फलन वाले पेड़ों से भी अच्छा उत्पादन ले सकते हैं।
एक ही पेड़ पर 25 किस्म के आम, सीधी के किसान विपिन सिंह की मेहनत देख वैज्ञानिक भी दंग
मध्य प्रदेश के सीधी जिले के विपिन सिंह ने ग्राफ्टिंग और क्रॉस ब्रीडिंग से एक ही पेड़ पर 25 किस्म के आम उगा दिए हैं। 75 डिसमिल जमीन पर तैयार उनके अनोखे बगीचे ने उन्हें इलाके में 'मैंगो मैन' की पहचान दिला दी है।
बारिश आते ही फूलों से सज उठेगा आपका बगीचा, मानसून में लगाएं ये 6 आकर्षक पौधे, हर कोई करेगा तारीफ
मानसून के मौसम में नमी और भरपूर पानी मिलने से कुछ खास फूलदार पौधे शानदार तरीके से खिलते हैं। ऐसे छह पौधे आपके छोटे से गार्डन को भी रंग-बिरंगे पार्क जैसा बना सकते हैं।
रिटायरमेंट के बाद भी नहीं रुके पूर्व DSP अजय राणा, 47 एकड़ में सजाया फलों का बाग, अब तीन राज्यों तक पहुंच रही सप्लाई
हरियाणा के अंबाला जिले के थंबर गांव में पूर्व डीएसपी अजय राणा ने रिटायरमेंट के बाद 47 एकड़ में ऑर्गेनिक फल बाग तैयार किया है, जिससे सालभर उत्पादन और अच्छी आमदनी हो रही है तथा सरकार से सब्सिडी भी मिल रही है।
बस्तर की धरती पर महका जापान का मियाजाकी आम, कीमत जानकर उड़ जाएंगे होश
कभी नक्सलवाद और बारूद के लिए पहचाने जाने वाले बस्तर में एक किसान ने चार साल की मेहनत से दुनिया का सबसे महंगा मियाजाकी आम उगाया है, जिसकी कीमत ढाई से तीन लाख रुपये प्रति किलो तक बताई जाती है।
हजारीबाग का यह गांव बना 'मैंगो विलेज', आम की खेती ने संवारी सैकड़ों परिवारों की जिंदगी
हजारीबाग जिले के ईचाक प्रखंड स्थित आरा गांव में 2000 से अधिक आम के पेड़ और दर्जनों बागान हैं, जो सैकड़ों परिवारों की आजीविका का मुख्य आधार बन चुके हैं। यहां के स्वादिष्ट आमों की मांग झारखंड के साथ-साथ बिहार के कई शहरों तक है।
Apple Farming: विंध्य क्षेत्र बना सेब की खेती का नया केंद्र, तपती गर्मी में भी बंपर पैदावार, किसानों को लाखों की आमदनी
मध्य प्रदेश के विंध्य अंचल में इजराइली उन्नत किस्मों की बदौलत अब भीषण गर्मी में भी सेब की सफल खेती हो रही है, जिससे सतना और मैहर के किसानों के लिए कमाई के नए रास्ते खुल रहे हैं।
जून में ड्रैगन फ्रूट पर मंडराता खतरा! किसान अभी बरतें सावधानी, नहीं तो उठाना पड़ेगा बड़ा घाटा
जून के महीने में बढ़ती नमी और तापमान के चलते ड्रैगन फ्रूट की फसल में फंगस जनित रोग तेजी से फैलते हैं। समय रहते देखभाल और फफूंदनाशक छिड़काव न करने पर पौधे सड़ने लगते हैं और उत्पादन घट जाता है।
कैंसर से जंग ने बदली सोच, रासायनिक खेती छोड़ ऑर्गेनिक बागवानी की ओर मुड़े अंबाला के राम चौहान
हरियाणा के खुड्डा कलां गांव के किसान राम चौहान ने चार एकड़ जमीन पर 20 तरह के फलों का ऑर्गेनिक बाग तैयार किया है, जिसकी मांग पंजाब और हिमाचल प्रदेश तक पहुंच चुकी है।
M.Com पास युवक की अमरूद की खेती बनी मिसाल, 2000 पेड़ों से 1.2 करोड़ तक का टर्नओवर
उत्तर प्रदेश के बलिया जिले का एक M.Com पास युवा किसान अमरूद की तीन खास किस्मों की बागवानी से करोड़ों का टर्नओवर हासिल कर रहा है और कई लोगों को रोजगार भी दे रहा है।
दशहरी के बाद बागों में पकती है 'डिंगा' किस्म, सहारनपुर का यह आम काटकर नहीं, चूसकर खाया जाता है
सहारनपुर के मैंगो बेल्ट में उगने वाली डिंगा किस्म को 'फ्रूटी मैंगो' कहा जाता है, क्योंकि इसे काटने की जरूरत नहीं पड़ती और इसे ऊपर से हल्का काटकर सीधे चूसकर खाया जाता है। यह आम दशहरी के बाद पेड़ पर ही पक जाता है।