जमशेदपुर के किसान का कमाल: घर के बगीचे में उगाए जापान के मियाजाकी आम और 35 दुर्लभ विदेशी फल झारखंड एक घंटा पहले 1
जमशेदपुर के अमृत इक्का ने अपने घर पर एक अनोखा बगीचा तैयार किया है, जिसमें जापान के महंगे मियाजाकी आम से लेकर कई विदेशी और दुर्लभ फलों के पौधे लहलहा रहे हैं।

बागवानी में नई मिसाल

जमशेदपुर के रहने वाले किसान अमृत इक्का ने बागवानी के क्षेत्र में एक अलग पहचान बनाई है। जहां लोग पारंपरिक खेती में व्यस्त रहते हैं, वहीं अमृत ने अपने घर के परिसर में एक ऐसा बगीचा विकसित किया है, जो किसी ड्रीम प्रोजेक्ट से कम नहीं है। उन्होंने सालों की मेहनत और लगन से देश-विदेश की दुर्लभ प्रजातियों के फल अपने बगीचे में उगाए हैं।

जापानी मियाजाकी और दुर्लभ किस्मों का खजाना

अमृत इक्का के इस बगीचे में लगभग 30 से 35 तरह के दुर्लभ फलदार पौधे लगे हैं। उनके गार्डन का मुख्य आकर्षण जापान का विश्व प्रसिद्ध मियाजाकी आम है, जो दुनिया के सबसे महंगे फलों में गिना जाता है। इसके अलावा, यहां कई और खास किस्मों के पौधे मौजूद हैं, जिनमें प्रमुख हैं:

  • व्हाइट डायमंड ग्वावा (अमरूद)
  • ब्लैक डायमंड ग्वावा
  • ब्रुनेई किंग आम
  • एप्पल मैंगो और अरुणिका आम
  • भगवान अनार और एवोकाडो
  • हिमाचली सेब

अनोखी विशेषताएं और देखभाल

उनके बगीचे में लगे पौधों की खासियतें भी अद्भुत हैं। अमृत बताते हैं कि केजितेन जामुन का फल सामान्य जामुन की तुलना में काफी बड़ा होता है और इसका वजन 100 ग्राम तक पहुंच सकता है। वहीं, ब्रुनेई किंग आम का एक फल लगभग 2 किलो तक भारी हो सकता है। इसके अलावा चीन की लीची, वियतनाम माल्टा संतरा और कागजी नींबू जैसे कई अन्य पौधे भी यहां लगे हुए हैं।

जुनून और मेहनत का फल

अमृत इक्का के अनुसार, हर पौधे की जरूरतें अलग होती हैं। कुछ पौधों को ज्यादा धूप की जरूरत होती है, तो कुछ को पानी की कम आवश्यकता होती है। वे सुबह से लेकर शाम तक अपने बगीचे में समय बिताते हैं और हर पौधे की निगरानी खुद करते हैं। उनका मानना है कि पौधों को केवल खाद और पानी की नहीं, बल्कि सही देखरेख और लगाव की भी जरूरत होती है। आज उनका यह बगीचा उन युवाओं और किसानों के लिए एक बड़ी प्रेरणा बन गया है, जो पारंपरिक खेती से हटकर कुछ नया करने का साहस रखते हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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