कोडरमा के किसान सुमन ने पेश की मिसाल, 200 आम के पेड़ों से हासिल की बंपर पैदावार झारखंड 2 महीने पहले 80
झारखंड के कोडरमा जिले में किसान सुमन लाल मेहता ने आधुनिक तकनीक अपनाकर आम की बागवानी से एक नई पहचान बनाई है। उन्होंने अपनी जमीन पर 200 आम के पौधे लगाकर 1 हजार किलो का उत्पादन प्राप्त किया है, जो दूसरे किसानों के लिए प्रेरणा है।

आधुनिक बागवानी से बदली किस्मत

झारखंड के कोडरमा जिले स्थित डोमचांच प्रखंड के रहने वाले किसान सुमन लाल मेहता ने कृषि क्षेत्र में एक सफल उदाहरण पेश किया है। उन्होंने वैज्ञानिक और आधुनिक तौर-तरीकों को अपनाकर यह साबित कर दिया है कि बागवानी के जरिए किसान अपनी आय में बड़ा इजाफा कर सकते हैं। सुमन ने साल 2018 में जिला उद्यान विभाग के मार्गदर्शन और सहयोग से अपनी खाली पड़ी भूमि पर आम के लगभग 200 पौधे लगाए थे। आज उनके द्वारा लगाया गया यह छोटा सा बगीचा उनके लिए कमाई का एक बड़ा और स्थायी जरिया बनकर उभरा है।

विभिन्न किस्मों का बेहतर उत्पादन

सुमन लाल मेहता के बाग में आम की विशेष किस्मों का चयन किया गया है, जिनमें अम्रपाली, बंबइया और मालदा प्रमुख हैं। इन किस्मों की सबसे बड़ी खासियत इनका बेहतरीन स्वाद और अधिक उत्पादन क्षमता है, जिसके कारण बाजार में इनकी काफी मांग रहती है। किसान के मुताबिक, मौजूदा सीजन में उनके बगीचे से कुल 1,000 किलोग्राम आम का उत्पादन हुआ है। अगर हम स्थानीय बाजार भाव की बात करें, तो वर्तमान में आम की कीमत करीब 60 रुपये प्रति किलोग्राम चल रही है। इस हिसाब से देखें तो इस वर्ष केवल आम की बिक्री से उन्हें लगभग 60 हजार रुपये की कुल आय हुई है।

कम लागत में अधिक मुनाफा

अपनी सफलता को साझा करते हुए सुमन लाल मेहता बताते हैं कि इस साल बगीचे के रखरखाव में उन्हें बहुत अधिक मशक्कत नहीं करनी पड़ी। इसके उलट, कम लागत के बावजूद उन्हें संतोषजनक मुनाफा प्राप्त हुआ। उनका कहना है कि यदि किसान वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाएं और योजनाबद्ध तरीके से फलों की खेती करें, तो यह लंबे समय तक उन्हें नियमित और स्थिर आमदनी दे सकती है। ग्रामीण क्षेत्रों में पहले आम के पेड़ों को केवल घरों में छाया पाने या सीमित घरेलू उपयोग के लिए ही लगाया जाता था, लेकिन सुमन जैसे किसानों ने इसे अब एक व्यावसायिक मॉडल के रूप में विकसित किया है।

उद्यान विभाग का मिल रहा साथ

कोडरमा जिले में बागवानी के प्रति बढ़ते रुझान के पीछे जिला उद्यान विभाग की सक्रिय भूमिका भी है। विभाग की ओर से किसानों को न केवल उच्च गुणवत्ता वाले पौधे उपलब्ध कराए जा रहे हैं, बल्कि उन्हें तकनीकी मार्गदर्शन और अन्य जरूरी सहायता भी प्रदान की जा रही है। यही कारण है कि अब कोडरमा के किसान पारंपरिक खेती के साथ-साथ बागवानी की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। इस बदलाव का असर अब जिले के विभिन्न इलाकों में दिखने लगा है, जहां लोग नई तकनीकों को अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने में लगे हैं।

आत्मनिर्भर होता कोडरमा

एक समय ऐसा था जब कोडरमा जिले में आम की भारी कमी रहती थी और यहां के लोग अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए बिहार, पश्चिम बंगाल समेत अन्य राज्यों पर निर्भर थे। लेकिन अब तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। जिले के सैकड़ों किसान अब आम की उन्नत खेती कर रहे हैं, जिससे स्थानीय बाजार में उत्पादन काफी बढ़ा है। आज न केवल कोडरमा की मांग यहीं के आम से पूरी हो रही है, बल्कि यहां के आम अब दूसरे शहरों और राज्यों में भी भेजे जा रहे हैं।

अन्य किसानों के लिए प्रेरणा

किसान सुमन लाल मेहता की यह यात्रा बताती है कि सरकारी योजनाओं का सही लाभ उठाकर और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करके खेती को मुनाफे का सौदा बनाया जा सकता है। उनकी मेहनत और सोच ने न केवल उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाया है, बल्कि वह क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गए हैं। कोडरमा का जिला अब एक उभरते हुए आम उत्पादक क्षेत्र के रूप में अपनी पहचान बना रहा है, जिससे जिले की अर्थव्यवस्था को भी गति मिल रही है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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