लिमिटेड ओवरों का बादशाह, टेस्ट का सपना अधूरा... टीम इंडिया में वापसी अब मुश्किल! क्रिकेट एक घंटा पहले 2
कभी टीम इंडिया की स्पिन गेंदबाजी की रीढ़ रहे युजवेंद्र चहल लंबे समय से राष्ट्रीय टीम से बाहर हैं। फॉर्म में गिरावट और निजी जीवन की मुश्किलों के बीच अब उनकी वापसी की राह बेहद कठिन नजर आ रही है।

आधुनिक क्रिकेट में भले ही टी20 फॉर्मेट का दबदबा बढ़ता जा रहा हो, लेकिन सच्चाई यह है कि इस खेल को जीने वाला हर खिलाड़ी आज भी सबसे लंबे फॉर्मेट यानी टेस्ट में खेलने का सपना संजोता है। टेस्ट को ही क्रिकेट की असली पहचान माना जाता रहा है। बदलते वक्त के साथ कई नियम बदले, खेलने का अंदाज बदला और खिलाड़ियों की सोच भी बदली, लेकिन लाल गेंद से खेले जाने वाले इस प्रारूप ने अपनी असली पहचान कभी नहीं खोई।

पांच दिनों तक चलने वाले टेस्ट क्रिकेट को आज भी किसी खिलाड़ी के लिए खुद को साबित करने की सबसे बड़ी कसौटी माना जाता है। शायद यही वजह है कि सीमित ओवरों में कभी भारतीय गेंदबाजी की रीढ़ कहे जाने वाले युजवेंद्र चहल हमेशा यह इच्छा जताते रहे कि उन्हें टेस्ट क्रिकेट खेलना है, मगर यह मौका उनके हिस्से नहीं आया।

टेस्ट का सपना रह गया अधूरा

युजवेंद्र चहल ने कई बार अपने इंटरव्यू और बातचीत में यह दोहराया कि वह भारत के लिए टेस्ट फॉर्मेट में खेलना चाहते हैं। लेकिन इसे उनका दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि अपनी उंगलियों के इशारे पर गेंद को नचाने वाले इस स्पिनर को लाल गेंद के क्रिकेट में देश का प्रतिनिधित्व करने का अवसर कभी नहीं मिल पाया।

हालात अब इतने बदल चुके हैं कि चहल को सीमित ओवरों के क्रिकेट में भी टीम इंडिया में जगह नहीं मिल पा रही है। ऐसा नहीं है कि वह प्रयास नहीं कर रहे, लेकिन क्रिकेट का खेल ही ऐसा है कि जरा सी चूक खिलाड़ी को उसकी जगह से दूर कर देती है। मौजूदा दौर में चयनकर्ता चहल से आगे बढ़कर भविष्य की ओर देख रहे हैं और लगातार युवा प्रतिभाओं के विकल्प तलाश रहे हैं।

ऐसी स्थिति में चहल जैसे गेंदबाज की वापसी तभी संभव है, जब वह ऐसा कुछ कर दिखाएं कि चयनकर्ता उन्हें टीम में लौटाने के लिए मजबूर हो जाएं।

वनडे और टी20 में कैसा रहा प्रदर्शन

युजवेंद्र चहल ने साल 2016 में भारतीय टीम के लिए वनडे और टी20 में पदार्पण किया था। इसके बाद से उन्हें टीम इंडिया के लिए 72 वनडे और 80 टी20 मुकाबले खेलने का मौका मिला। वनडे क्रिकेट में उन्होंने 5.26 की इकॉनमी रेट के साथ 121 विकेट अपने नाम किए, जबकि इस फॉर्मेट में उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 42 रन देकर 6 विकेट लेने का रहा।

टी20 क्रिकेट की बात करें तो चहल ने 8.19 की इकॉनमी रेट से गेंदबाजी करते हुए 96 विकेट हासिल किए। इस प्रारूप में उनका बेहतरीन प्रदर्शन 25 रन देकर 6 विकेट चटकाने का रहा है।

घरेलू क्रिकेट में भी छोड़ी छाप

भारत के लिए लाल गेंद के क्रिकेट में भले ही चहल को मौका नहीं मिला, लेकिन घरेलू क्रिकेट के लिस्ट ए प्रारूप में उन्होंने अपनी गेंदबाजी का दम दिखाया है। हरियाणा की ओर से खेलते हुए चहल 144 लिस्ट ए मैचों में उतरे और इस दौरान उन्होंने 225 विकेट अपने नाम किए।

यह आंकड़ा इस बात की गवाही देता है कि अगर चहल को टेस्ट क्रिकेट में अवसर मिलता तो शायद वह वहां भी अपनी गेंदबाजी से प्रभावित करते। हालांकि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए संभव है कि उन्हें कभी वनडे या टी20 में वापसी मिल जाए, लेकिन टेस्ट में डेब्यू कर पाना अब उनके लिए बेहद मुश्किल नजर आता है।

चेतन शुक्ला
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चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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