वंदे मातरम गाने के लिए मजबूर नहीं कर सकते, पहले इसका पूरा इतिहास पढ़िए: इमरान मसूद राष्ट्रीय राजनीति 4 घंटे पहले 4
स्वतंत्रता दिवस के मौके पर कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम गायन को लेकर उठे विवाद के बीच कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि किसी को भी इसे गाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता और यह उनका संवैधानिक अधिकार है।

विवाद पर कांग्रेस सांसद की दो टूक

स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम के गायन को बीच में रोके जाने को लेकर उपजे विवाद ने तूल पकड़ लिया है। इस पूरे मामले पर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने अपनी स्पष्ट प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि वे वंदे मातरम कभी नहीं गाएंगे। मसूद ने जोर देते हुए कहा कि राष्ट्रगीत के सम्मान में वे केवल खड़े हो सकते हैं, लेकिन उसे गाना या न गाना उनका अपना संवैधानिक और व्यक्तिगत धार्मिक अधिकार है।

मेरा अधिकार, मैं नहीं गाऊंगा

समाचार एजेंसी आईएएनएस के साथ बातचीत के दौरान इमरान मसूद ने इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि वे पहले भी इसे नहीं गाते थे और आगे भी नहीं गाएंगे। उन्होंने कहा, मैं केवल खड़े होकर सम्मान दे सकता हूं, लेकिन गाने के लिए मैं किसी भी स्थिति में तैयार नहीं हूं। यह मेरा पूरी तरह से निजी और संवैधानिक अधिकार है और मैं अपने धर्म का पालन करना बेहतर समझता हूं।

भाजपा पर साधा निशाना

जब उनसे पूछा गया कि भाजपा इस मुद्दे पर लगातार कांग्रेस को घेर रही है और सोनिया गांधी पर राष्ट्रीय गीत के अपमान का आरोप लगा रही है, तो मसूद ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि अगर भाजपा को वंदे मातरम से इतना ही प्रेम है तो वे उसे गाएं, लेकिन दूसरों को इसके लिए मजबूर करने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने कहा, हमें जितना गाना है, हम उतना ही गाएंगे। मसूद ने आरोप लगाया कि इस मुद्दे को लेकर लोगों के बीच एक गलत नैरेटिव बनाने की कोशिश की जा रही है, जो बिल्कुल अनुचित है।

इतिहास पढ़ने की दी सलाह

कांग्रेस मुख्यालय के अलावा केरल में भी वंदे मातरम के अधूरा गायन को लेकर भाजपा के हमलों का जवाब देते हुए इमरान मसूद ने कहा कि लोगों को पहले इस राष्ट्रगीत का पूरा इतिहास समझना चाहिए। उन्होंने टिप्पणी की, पहले वंदे मातरम के इतिहास के पन्नों को पलटिए और पढ़िए। यह रचना कहां से आई, किस संदर्भ में लिखी गई थी और इसके पीछे के क्या कारण थे, यह सब जानना बहुत जरूरी है। इतिहास को बिना समझे इस तरह की बातें करना सही नहीं है।

क्या है पूरा विवाद

गौरतलब है कि 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के मुख्य कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस संसदीय दल की चेयरपर्सन सोनिया गांधी पास में खड़े मल्लिकार्जुन खरगे और अन्य नेताओं से बातचीत करती हुई दिखाई दी थीं। भाजपा ने इस वीडियो फुटेज का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि सोनिया गांधी ने राष्ट्रीय गीत के पूरे गायन को रोकने का प्रयास किया, जो कि राष्ट्रगीत का अपमान है।

राहुल गांधी और एनटीए का मुद्दा

इस बातचीत के दौरान इमरान मसूद ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा उठाए गए NTA से संबंधित सवालों का भी समर्थन किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के सवाल पूरी तरह से वाजिब हैं और इन्हीं मुद्दों की वजह से आज देश का युवा वर्ग अत्यधिक परेशान है। इससे पूर्व राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि NTA जैसी संस्थाएं अपनी गलतियों के लिए जिम्मेदार हैं, लेकिन उसका खामियाजा अंततः छात्रों को ही भुगतना पड़ता है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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