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एक घंटा पहले
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ऑपरेशन थंडर में हुआ बड़ा खुलासा
केरल आबकारी विभाग ने एक बेहद चौंकाने वाले मामले का पर्दाफाश किया है जिसमें नशीली दवाओं की तस्करी के लिए बेहद शर्मनाक और शातिर तरीके का इस्तेमाल किया जा रहा था। आबकारी विभाग की विशेष टीम ने ऑपरेशन थंडर के अंतर्गत कार्रवाई करते हुए एक महिला और उसके सहयोगी को गिरफ्तार किया है। इन तस्करों ने समाज में मासिक धर्म यानी पीरियड्स को लेकर बनी झिझक और खामोशी को अपनी सुरक्षा ढाल बना लिया था। आरोपी महिला ने मेंस्ट्रुअल कप यानी पीरियड्स कप में लाखों रुपये कीमत की सिंथेटिक ड्रग MDMA भरकर उसे अपने निजी अंगों में छिपा लिया था ताकि पुलिस चेकिंग से आसानी से बच सके।
कौन हैं आरोपी और क्या था इनका तरीका
पकड़े गए आरोपियों की पहचान 30 वर्षीय सरिता और 29 वर्षीय मोहम्मद शफी के रूप में हुई है। पूछताछ में सामने आया कि ये दोनों बेंगलुरु से बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थ खरीदते थे और उसके बाद एरनाकुलम और अलाप्पुझा के विभिन्न लॉज में कमरा लेकर वहां से ड्रग्स की सप्लाई करते थे। आबकारी अधिकारियों के अनुसार, ये दोनों आरोपी पिछले कई हफ्तों से विभाग की रडार पर थे। एक गुप्त सूचना मिलने के बाद विभाग ने जाल बिछाया और कार्रवाई को अंजाम दिया। सबसे पहले मोहम्मद शफी को साउथ एरनाकुलम के एक लॉज से पकड़ा गया, जहां से पुलिस को 65.27 ग्राम MDMA बरामद हुई।
शर्म को बनाया हथियार
आरोपी महिला सरिता ने जांच एजेंसियों को चकमा देने के लिए बहुत ही घिनौना तरीका अपनाया था। उसने मेंस्ट्रुअल कप में MDMA की खेप भरी और उसके मुंह को गोंद से पूरी तरह सील कर दिया। इसके बाद उसने इसे अपने शरीर के भीतर छिपा लिया। बेंगलुरु से बस में सफर के दौरान जब कन्नूर के इरिट्टी में पुलिस ने चेकिंग की, तो शफी ने अपने पास मौजूद ड्रग्स को फेंक दिया। हालांकि, सरिता के पास छिपी हुई ड्रग्स का सुरक्षाकर्मियों को भनक तक नहीं लगी। इस कामयाबी के बाद दोनों का हौसला और बढ़ गया था और उन्हें लगा कि उनका यह सीक्रेट तरीका कभी फेल नहीं होगा।
लौटने पर चढ़ी कानून के हत्थे
जब आबकारी अधिकारियों की टीम ने एरनाकुलम में उनके ठिकानों पर छापेमारी की, उस समय सरिता ड्रग्स की खेप लेकर अलाप्पुझा की ओर निकल चुकी थी। विभाग की टीम ने हार नहीं मानी और उसके वापस लौटने का इंतजार किया। रात करीब 10:30 बजे जैसे ही वह वापस पहुंची, अधिकारियों ने उसे धर दबोचा। पूछताछ के दौरान सरिता ने खुलासा किया कि कुछ नशा उसने अलाप्पुझा के एक घर में भी छिपा कर रखा है। पुलिस ने वहां तलाशी ली तो 28.76 ग्राम अतिरिक्त MDMA बरामद की गई। इस पूरी कार्रवाई में विभाग ने कुल 94.032 ग्राम MDMA, एक मोबाइल फोन और तस्करी से कमाए गए 17,770 रुपये नकद जब्त किए हैं।
क्या था तस्करी का गणित और बैकग्राउंड
अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, ये तस्कर MDMA को 4,000 रुपये प्रति ग्राम की दर से ग्राहकों को बेचते थे। आरोपियों के पिछले जीवन की बात करें तो सरिता पहले होम नर्स के तौर पर काम करती थी, वहीं मोहम्मद शफी का पेशा इंटीरियर डिजाइनिंग का था। आबकारी विभाग ने उन लोगों की भी लिस्ट तैयार कर ली है जो इस गिरोह से ड्रग्स खरीदते थे और वे सभी फिलहाल अधिकारियों की निगरानी में हैं। यह पूरी कार्रवाई एरनाकुलम आबकारी निरीक्षक आर. अभिराज और उनकी टीम के नेतृत्व में सफलतापूर्वक संपन्न हुई।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- इस गिरोह का पर्दाफाश किसने किया: केरल आबकारी विभाग की विशेष टीम ने ऑपरेशन थंडर के तहत इस तस्करी रैकेट को पकड़ा है।
- आरोपी महिला की पहचान क्या है: आरोपी महिला का नाम सरिता है, जिसकी उम्र 30 वर्ष है और वह पहले होम नर्स का काम करती थी।
- कितनी ड्रग्स बरामद हुई: आबकारी विभाग ने कुल 94.032 ग्राम MDMA जब्त की है, जिसे आरोपी 4,000 रुपये प्रति ग्राम के भाव से बेच रहे थे।
- ऑपरेशन का नेतृत्व किसने किया: इस पूरे ऑपरेशन का संचालन एरनाकुलम के आबकारी निरीक्षक आर. अभिराज की देखरेख में किया गया।
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