चीनी की कीमतों में अचानक उछाल: एथेनॉल नहीं, तो महंगाई की असल वजह क्या है? व्यापार एक घंटा पहले 5
त्योहारी सीजन के करीब आते ही चीनी के दाम तेजी से बढ़े हैं। सरकार ने एथेनॉल डायवर्जन की चर्चाओं को खारिज करते हुए कीमतों में बढ़ोतरी के असली कारणों का खुलासा किया है।

त्योहारी सीजन में चीनी की महंगाई

आगामी फेस्टिव सीजन के बीच देश में चीनी की कीमतों में हुई अचानक वृद्धि ने उपभोक्ताओं की जेब पर बोझ डाल दिया है। सरकारी आंकड़ों पर गौर करें तो 20 जुलाई 2026 को देश में चीनी की औसत कीमत ₹48.18 प्रति किलो के आसपास थी, जो मात्र एक महीने के भीतर यानी 20 अगस्त तक बढ़कर ₹55.70 प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गई। बाजार में चर्चा थी कि एथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी के डायवर्जन के कारण बाजार में आपूर्ति कम हुई है, लेकिन सरकार ने इस तर्क को पूरी तरह से नकार दिया है।

एथेनॉल का तर्क और सच्चाई

सरकार द्वारा जारी स्पष्टीकरण के मुताबिक, एथेनॉल के लिए चीनी के डायवर्जन का कीमतों पर सीधा असर नहीं पड़ा है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022-23 में कुल चीनी का लगभग 12% हिस्सा एथेनॉल उत्पादन के लिए डायवर्ट किया गया था, जो कि 2025-26 के सीजन में घटकर मात्र 9% के करीब रह गया है। इसके अतिरिक्त, वर्तमान में देश में कुल एथेनॉल उत्पादन का तीन-चौथाई यानी 75% हिस्सा अब मक्के जैसे अनाज से तैयार किया जा रहा है। सरकार के अनुसार, कीमतों में तेजी के लिए घरेलू उत्पादन में कमी, त्योहारों के कारण मांग में उछाल, प्रतिकूल मौसम और अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति प्रमुख रूप से जिम्मेदार है। साथ ही, कुछ व्यापारियों द्वारा की जा रही जमाखोरी और सट्टेबाजी ने भी स्थिति को गंभीर बनाया है।

उत्पादन का अनुमान और फसलों की स्थिति

चीनी के उत्पादन में कमी एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। इस सीजन के लिए शुरुआती अनुमान 343 लाख टन था, जिसे घटाकर अब 306 लाख टन कर दिया गया है। गन्ने की फसल पर रेड रॉट और टॉप बोरर जैसे घातक रोगों का प्रकोप देखा गया है, जबकि अत्यधिक बारिश और जलभराव ने भी फसल को नुकसान पहुंचाया है। हालांकि, सरकार ने आश्वासन दिया है कि अक्टूबर में नया पेराई सत्र शुरू होने तक देश की घरेलू आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है।

वैश्विक बाजार का असर

चीनी की कीमतों में यह वृद्धि केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक वैश्विक समस्या है। वर्ष 2026-27 के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी की आपूर्ति में 33 लाख टन की कमी का अनुमान जताया गया है। वैश्विक बाजार में कीमतों की बात करें तो 30 जून को चीनी का दाम 474 डॉलर प्रति टन था, जो 20 अगस्त तक बढ़कर 552 डॉलर प्रति टन हो गया है।

सरकार के कड़े कदम

बाजार में चीनी की उपलब्धता सुनिश्चित करने और कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने सख्ती बढ़ा दी है। इसके तहत 1 अगस्त से 30 नवंबर तक चीनी डीलरों के लिए 400 टन की स्टॉक लिमिट तय कर दी गई है। इसके अलावा 1 सितंबर से बल्क उपभोक्ताओं के लिए भी नियम कड़े कर दिए गए हैं, जिसके तहत वे अपनी 15 दिनों की जरूरत से अधिक चीनी का भंडारण नहीं कर पाएंगे।

राजीव खन्ना पाबना के व्यापार संवाददाता हैं और कंपनियों, बाजार तथा अर्थव्यवस्था की खबरों को सरल भाषा में समझाते हैं। कारोबार जगत के बड़े फैसलों, नीतिगत बदलावों और उनके आम आदमी पर असर को वे गहराई से कवर करते हैं। उनका मकसद जटिल आर्थिक खबरों को हर पाठक के लिए आसान बनाना है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप