खरीफ की बुवाई से पहले कराएं खेत की मिट्टी की जांच, बढ़ेगी पैदावार और कम होगा खाद का खर्च भारत एक महीने पहले 20
खरीफ सीजन शुरू होने से पहले मिट्टी की जांच कराकर सही खाद और उर्वरक चुनने से न सिर्फ उत्पादन बढ़ता है, बल्कि खाद पर होने वाला खर्च भी घटता है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार गहरी जुताई और संतुलित पोषक तत्व मिट्टी को दोबारा उपजाऊ बनाते हैं।

खरीफ की फसल की बुवाई शुरू करने से पहले किसानों के लिए अपने खेत की मिट्टी की जांच कराना बेहद जरूरी माना जाता है। जिस तरह इंसान की सेहत जानने के लिए खून की जांच की जाती है, उसी तरह खेत की उर्वरता और उसमें मौजूद पोषक तत्वों का पता लगाने के लिए मिट्टी का परीक्षण किया जाता है। इससे किसान को यह तय करने में आसानी होती है कि किस फसल के लिए कौन-सा खाद और उर्वरक उपयुक्त रहेगा।

मिट्टी की जांच क्यों है पहला कदम

कृषि सलाहकार नवनीत रेवापाटी के अनुसार, किसानों को सबसे पहले अपनी मिट्टी की जांच करानी चाहिए। इसके साथ ही कृषि विभाग के विशेषज्ञों से सलाह लेकर यह समझना चाहिए कि खेत में इससे पहले कौन-सी फसल उगाई गई थी और अब कौन-सी फसल बोई जानी है।

उनका कहना है कि इसी आधार पर सही खाद और उर्वरक का चुनाव करना चाहिए, ताकि फसल को जरूरत के मुताबिक पोषण मिल सके और अनावश्यक खर्च से बचा जा सके।

मिट्टी की उर्वरता कैसे बढ़ाएं

बारिश के मौसम में मिट्टी में पोषक तत्वों को संतुलित करके उसे फिर से उपजाऊ बनाया जा सकता है। संतुलित पोषण मिलने से जमीन की उत्पादन क्षमता बेहतर होती है और फसल अच्छी होती है।

कीट और रोगों पर नियंत्रण

खेत की गहरी जुताई करना भी बेहद फायदेमंद रहता है। गहरी जुताई करने से मिट्टी के भीतर छिपे कीट और रोग फैलाने वाले तत्व बाहर आकर तेज धूप में नष्ट हो जाते हैं, जिससे फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका कम हो जाती है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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