मुंबई में मानसून की एंट्री में देरी क्यों? जानिए कारण और कब तक पहुंचने की उम्मीद महाराष्ट्र 2 घंटे पहले 5
केरल, तमिलनाडु और पूर्वोत्तर तक मानसून पहुंच चुका है, लेकिन मुंबई अब भी इंतजार में है। अरब सागर की कमजोर पश्चिमी हवाएं, वेस्टर्न डिस्टर्बेंस और अल-नीनो को देरी की वजह माना जा रहा है; मौसम विभाग को 15 जून के आसपास मानसून पहुंचने की उम्मीद है।

दक्षिण भारत के ज्यादातर राज्यों में मानसून अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुका है। केरल और तमिलनाडु समेत कई राज्यों में तेज बारिश का दौर जारी है, वहीं पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में भी मानसून दस्तक दे चुका है। इन सबके बीच मुंबई के लोग अब भी मानसूनी फुहारों का इंतजार कर रहे हैं। आमतौर पर मुंबई में 11 जून तक मानसून आ जाता है, लेकिन इस साल इसकी रफ्तार थमी हुई है। मौसम विशेषज्ञ इसके पीछे वेस्टर्न डिस्टर्बेंस और अल-नीनो को बड़ी वजह मान रहे हैं। मौसम विभाग के मुताबिक मुंबई और गुजरात में मानसून के पहुंचने में अभी और वक्त लग सकता है।

मुंबई में मानसून क्यों अटका?

दरअसल अरब सागर में पश्चिमी हवाओं के कमजोर पड़ने और कोंकण तट पर सूखी हवाओं के असर के चलते 11 जून की तय तारीख तक मानसून मुंबई नहीं पहुंच सका। इसके साथ ही उत्तर-पश्चिम से आ रहे वेस्टर्न डिस्टर्बेंस और अल-नीनो के प्रभाव से नमी से भरी हवाओं का प्रवाह बाधित हुआ है, जिसके चलते दक्षिणी महाराष्ट्र में मानसून की चाल सुस्त हो गई है।

कब तक पहुंच सकता है मानसून?

भारत मौसम विज्ञान विभाग का कहना है कि इस बार मुंबई में मानसून देर से दाखिल हो सकता है। सामान्य तौर पर यहां 11 जून तक मानसून आ जाता है, लेकिन विभाग को उम्मीद है कि निचले स्तर पर साइक्लोनिक सर्कुलेशन बनने के बाद हालात अनुकूल होंगे। अनुमान है कि मुंबई में आधिकारिक रूप से 15 जून के आसपास मानसून पहुंच सकता है। इसके बाद 18-19 जून तक भारी और लगातार बारिश का सिलसिला शुरू होने की संभावना है।

महाराष्ट्र में मौसम का हाल

महाराष्ट्र के दक्षिणी हिस्से के कुछ जिलों में मानसून दस्तक दे चुका है, लेकिन राज्य के ज्यादातर इलाके अब भी इससे अछूते हैं। मुंबई में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगमन की तारीख करीब आ रही है और यहां आसमान पर बादल मंडरा रहे हैं। समुद्री लहरों की सफेद फुहारें मरीन ड्राइव के किनारे बने कंक्रीट के रास्ते से टकरा रही हैं।

किन राज्यों तक पहुंच चुका है मानसून?

दक्षिण-पश्चिम मानसून तेजी से आगे बढ़ रहा है और कई राज्यों को अपने दायरे में ले चुका है। मौसम विभाग के अनुसार अब तक यह केरल, गोवा, तमिलनाडु, कर्नाटक के बड़े हिस्से, महाराष्ट्र के कुछ हिस्से, आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्से, तेलंगाना के कुछ हिस्से और पूर्वोत्तर के सभी राज्यों — असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, सिक्किम, मिजोरम और त्रिपुरा — तक पहुंच चुका है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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