घर के टेढ़े-मेढ़े खीरे और बाजार के बिल्कुल सीधे खीरे के बीच क्या है अंतर? कृषि वैज्ञानिकों ने बताया इसके पीछे का बड़ा कारण बिहार 2 महीने पहले 74
क्या आपने कभी सोचा है कि बाजार में मिलने वाला खीरा बिल्कुल सीधा और सुंदर क्यों होता है, जबकि घर की बाड़ी में उगाया गया खीरा अक्सर टेढ़ा-मेढ़ा हो जाता है? भागलपुर के कृषि विशेषज्ञों ने इसके पीछे के वैज्ञानिक कारणों और सही प्रबंधन के तरीकों का खुलासा किया है।

गर्मियों और त्योहारों के मौसम में सलाद की थाली की शान बढ़ाने वाला खीरा हमारी सेहत के लिए बेहद गुणकारी माना जाता है। सेहतमंद फायदों के साथ-साथ इसका बाजार भी बहुत बड़ा है। लेकिन अक्सर लोगों के मन में एक सवाल जरूर उठता है कि जब हम बाजार से खीरा खरीदते हैं, तो वह देखने में बिल्कुल सीधा, चमकदार और सुंदर नजर आता है। वहीं, जब हम उसी खीरे को अपने घर की बाड़ी, गमले या छोटे से बगीचे में उगाते हैं, तो वह टेढ़ा-मेढ़ा और अजीब आकार का हो जाता है। आखिर इसके पीछे क्या वजह है? क्या यह किसी बीमारी के कारण होता है या फिर इसके पीछे कोई वैज्ञानिक कारण है? बिहार के भागलपुर के कृषि विशेषज्ञों ने इस गुत्थी को सुलझाते हुए इसके पीछे के मुख्य वैज्ञानिक और व्यावहारिक कारणों का विस्तार से खुलासा किया है।

हाइब्रिड और देसी बीजों का बड़ा अंतर

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, सीधे और टेढ़े खीरे के पीछे सबसे पहला और बड़ा कारण बीजों का चयन होता है। बाजार में व्यावसायिक रूप से बिकने वाले अधिकांश खीरे उन्नत और उच्च गुणवत्ता वाले हाइब्रिड बीजों से तैयार किए जाते हैं। इन बीजों को आनुवंशिक रूप से इस तरह विकसित किया जाता है कि उनसे पैदा होने वाले फल बिल्कुल सीधे, लंबे और एक समान आकार के हों। इसके विपरीत, घरों में लोग आमतौर पर सामान्य या पारंपरिक देसी बीजों का उपयोग करते हैं। देसी बीजों से उगने वाले खीरे अक्सर अपने प्राकृतिक स्वरूप के कारण थोड़े बहुत मुड़ जाते हैं, जिससे उनका आकार सही नहीं रह पाता है।

मचान यानी 'अलान' तकनीक का न होना

खीरे के सीधे होने के पीछे दूसरा सबसे महत्वपूर्ण कारण उसे सहारा देने की तकनीक है। व्यावसायिक स्तर पर जब किसान खीरे की खेती करते हैं, तो वे पौधों को सहारा देने के लिए 'अलान' या मचान विधि का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करते हैं। इस तकनीक के तहत खीरे की लताओं को ऊपर की तरफ चढ़ाया जाता है, जिससे फल नीचे की ओर हवा में स्वतंत्र रूप से लटकते हैं। गुरुत्वाकर्षण के कारण हवा में लटके हुए खीरे बिल्कुल सीधे और लंबे बढ़ते हैं। वहीं दूसरी ओर, घरों में लोग अक्सर पौधों को जमीन पर ही फैलने के लिए छोड़ देते हैं। जमीन की सतह उबड़-खाबड़ होने और फलों के जमीन के संपर्क में रहने के कारण वे सीधे नहीं बढ़ पाते और टेढ़े-मेढ़े आकार के हो जाते हैं।

पोषक तत्वों की कमी और हानिकारक कीटों का प्रभाव

पौधों की देखभाल और सही पोषण भी फलों के आकार को तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं। अमूमन लोग घरों में खीरे के पौधे लगाकर उन्हें उनके हाल पर ही छोड़ देते हैं। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि खीरे को सुंदर, चमकदार और सीधा रखने के लिए संतुलित पोषक तत्व, सही समय पर भरपूर सिंचाई और कीट नियंत्रण की बेहद आवश्यकता होती है। जब पौधे को पर्याप्त नाइट्रोजन, फास्फोरस या पोटेशियम जैसे तत्व नहीं मिलते, तो फल का विकास ठीक से नहीं हो पाता। इसके अलावा, कई बार छोटे-छोटे कीड़े या कीट फल पर डंक मार देते हैं। इस डंक के कारण फल का वह हिस्सा संक्रमित हो जाता है और उसकी वृद्धि रुक जाती है, जिससे खीरा उस स्थान से मुड़ जाता है।

कमाई का शानदार मौका: खेती के लिए सबसे उपयुक्त समय

भागलपुर के कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों के लिए एक बेहद उपयोगी सलाह भी साझा की है। विशेषज्ञों के अनुसार, किसानों के लिए खीरे की बुवाई करने का यह सबसे सटीक और अनुकूल समय है। यदि किसान इस समय खीरे की रोपाई करते हैं, तो उनकी फसल आने वाले समय में सावन और जन्माष्टमी के पावन त्योहारों के दौरान बाजार में पूरी तरह तैयार होकर आ जाएगी। हिंदू धर्म के इन बड़े त्योहारों और व्रत के सीजन में बाजार में खीरे की मांग बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। ऐसे समय में बाजार में आपूर्ति करके किसान भाई अपनी फसल का बहुत ही बेहतरीन, मुनाफेदार और उचित दाम प्राप्त कर सकते हैं, जिससे उन्हें बंपर मुनाफा होगा।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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