एक फोन कॉल से खेती में फायदा! जानिए क्यों इस नई सिंचाई तकनीक के मुरीद हो रहे हैं किसान भारत एक घंटा पहले 3
शाहजहांपुर में उद्यान विभाग ने 'पर ड्रॉप मोर क्रॉप' माइक्रो इरीगेशन योजना के तहत ड्रिप, मिनी स्प्रिंकलर और पोर्टेबल स्प्रिंकलर के लिए रिकॉर्ड लक्ष्य तय किए हैं, जिससे किसानों को भारी अनुदान और बेहतर पैदावार का लाभ मिलेगा।

भूगर्भ जल को बचाने और खेती में पानी की समझदारी भरी खपत को बढ़ावा देने के मकसद से शाहजहांपुर के उद्यान विभाग ने एक बड़ी पहल की है। 'पर ड्रॉप मोर क्रॉप' माइक्रो इरीगेशन योजना के अंतर्गत इस बार रिकॉर्ड भौतिक लक्ष्य तय किए गए हैं, ताकि जिले के अधिक से अधिक किसान आधुनिक सिंचाई तकनीक से जुड़ सकें।

योजना का मकसद क्या है

इस विशेष योजना का मुख्य उद्देश्य सिंचाई के दौरान पानी की बर्बादी रोकना और कम पानी में ज्यादा से ज्यादा खेत की सिंचाई करना है। उत्तर प्रदेश माइक्रो इरीगेशन प्रोजेक्ट के जरिए सरकार चाहती है कि किसान पारंपरिक तरीकों को छोड़कर नई तकनीकों को अपनाएं। इससे एक ओर जहां भूजल के अंधाधुंध दोहन पर रोक लगेगी, वहीं आने वाली पीढ़ियों के सामने पैदा होने वाले जल संकट को भी काफी हद तक टाला जा सकेगा।

फसलवार तय किए गए लक्ष्य

जिला उद्यान अधिकारी पुनीत कुमार पाठक ने बताया कि योजना के तहत फसलों के हिसाब से अलग-अलग लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। ड्रिप सिंचाई तकनीक के लिए कुल 663 हेक्टेयर का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही मिनी स्प्रिंकलर तकनीक के अंतर्गत 332 हेक्टेयर और पोर्टेबल स्प्रिंकलर तकनीक के तहत 924 हेक्टेयर भूमि को कवर करने का बड़ा लक्ष्य तय किया गया है।

किन फसलों को होगा फायदा

यह योजना गन्ना, गेहूं, दलहन, तिलहन और बागवानी फसलों के लिए बेहद फायदेमंद साबित होगी। इन सभी फसलों में ड्रिप और मिनी स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई तकनीक को खास तौर पर बढ़ावा दिया जा रहा है। इन उन्नत तकनीकों से पौधों को उनकी जरूरत के मुताबिक ठीक उतना ही पानी मिलता है, जिससे फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता में जबरदस्त सुधार देखने को मिलता है।

अनुदान में कितनी छूट

सरकार इस योजना के तहत किसानों को बड़ा अनुदान यानी सब्सिडी दे रही है। लघु और सीमांत किसानों को ड्रिप तथा मिनी स्प्रिंकलर लगवाने पर कुल लागत का 90 प्रतिशत तक का भारी अनुदान दिया जा रहा है, जबकि सामान्य श्रेणी के किसानों के लिए 80 प्रतिशत अनुदान की व्यवस्था है। इसके अलावा रेनगन और पोर्टेबल स्प्रिंकलर उपकरण खरीदने पर भी सभी किसानों को 65 से 75 प्रतिशत तक की बड़ी छूट मिल रही है।

तकनीक अपनाने के फायदे

सूक्ष्म सिंचाई तकनीक अपनाने से किसानों को कई तरह के लाभ मिलते हैं। इसके इस्तेमाल से करीब 70 प्रतिशत तक पानी की बचत होती है, जिससे कम पानी में भी बड़े क्षेत्र की सिंचाई आसानी से हो जाती है। पानी की बचत के साथ-साथ सिंचाई पर आने वाली लागत और मेहनत में भी भारी कमी आती है। सटीक सिंचाई से जहां फसल का उत्पादन बढ़ता है, वहीं खेत की मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी लंबे समय तक बनी रहती है।

आवेदन की प्रक्रिया

योजना का लाभ लेने के लिए सरकार ने आवेदन की प्रक्रिया को बेहद आसान और पारदर्शी बना दिया है। इच्छुक किसान विभाग के आधिकारिक पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन माध्यम से अपना आवेदन कर सकते हैं। ऑनलाइन व्यवस्था होने के कारण किसान घर बैठे या नजदीकी जनसेवा केंद्र के जरिए आसानी से फॉर्म भर सकते हैं। इस सरल डिजिटल प्रक्रिया से पारदर्शिता बनी रहती है और किसानों को दफ्तरों के चक्कर लगाने से छुटकारा मिलता है।

जरूरी दस्तावेज

आवेदन के लिए किसानों के पास कुछ अहम दस्तावेज होने चाहिए। इनमें मुख्य रूप से भूमि का अभिलेख खतौनी, आधार कार्ड, बैंक पासबुक की प्रति और हाल ही में खिंची पासपोर्ट साइज फोटो शामिल हैं। साथ ही एक चालू मोबाइल नंबर होना भी जरूरी है। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के किसानों को योजना के तहत विशेष लाभ और पात्रता साबित करने के लिए अपना वैध जाति प्रमाण पत्र भी अनिवार्य रूप से लगाना होगा।

कौन ले सकता है लाभ और कहां करें संपर्क

इस योजना का फायदा सिर्फ उन्हीं किसानों को मिलेगा जिनके पास सिंचाई के लिए अपना नलकूप या कुआं हो। योजना से जुड़ी किसी भी जानकारी, मदद या समस्या के समाधान के लिए किसान जिला उद्यान अधिकारी के मोबाइल नंबर 9151066860 पर सीधे संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा किसी भी कार्य दिवस पर विकास भवन स्थित कार्यालय में जाकर भी मुलाकात की जा सकती है।

चेतन शुक्ला
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चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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