फायर सेफ्टी एक्ट क्या है, कोचिंग संस्थानों और अस्पतालों के लिए सुरक्षा के क्या हैं नियम? भारत 2 महीने पहले 86
बढ़ती आगजनी की घटनाओं के बीच फायर सेफ्टी कानूनों और नियमों को समझना बेहद जरूरी हो गया है। जानिए कोचिंग सेंटर, होटल और अस्पतालों के लिए अग्नि सुरक्षा को लेकर क्या मानक तय किए गए हैं।

फायर सेफ्टी एक्ट की आवश्यकता

गर्मी के सीजन में देशभर में आग लगने की घटनाएं काफी बढ़ जाती हैं। हाल ही में लखनऊ के एक कोचिंग सेंटर में लगी भीषण आग में 15 लोगों की जान जाने और कई लोगों के घायल होने की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। दिल्ली के एक होटल में हुए अग्निकांड के बाद यह देश का दूसरा बड़ा हादसा है। ऐसे हादसों को रोकने के लिए उत्तर प्रदेश फायर प्रिवेंशन एंड फायर सेफ्टी एक्ट, 2005 जैसे कड़े कानून बनाए गए हैं, जिनका उद्देश्य सार्वजनिक भवनों में सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

क्या हैं फायर सेफ्टी के प्रमुख नियम

कानून के तहत किसी भी व्यावसायिक प्रतिष्ठान, मॉल, अस्पताल, होटल या कोचिंग संस्थान के लिए कुछ सुरक्षा मानकों का पालन करना अनिवार्य है:

  • भवन में उचित संख्या में फायर एक्सटिंग्विशर और स्प्रिंकलर सिस्टम का होना जरूरी है।
  • आग का पता लगाने के लिए फायर अलार्म सिस्टम का लगा होना अनिवार्य है।
  • इमारत में आपातकालीन निकास यानी Emergency Exit की स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए।
  • बहुमंजिला इमारतों, अस्पतालों और होटलों को अग्निशमन विभाग से No Objection Certificate (NOC) लेना आवश्यक है।
  • भवन के मालिकों और संचालकों को सुरक्षा मानकों का पालन करने की जिम्मेदारी दी गई है।

क्यों महत्वपूर्ण है अग्नि सुरक्षा मानक

विशेषज्ञों का मानना है कि आग लगने की स्थिति में शुरुआती कुछ मिनट जान बचाने के लिए सबसे निर्णायक होते हैं। यदि भवन में फायर अलार्म और सुरक्षित निकास मार्ग मौजूद हैं, तो बड़ी त्रासदी को टाला जा सकता है। फायर सेफ्टी एक्ट केवल एक कागजी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह लोगों की सुरक्षा का सबसे बड़ा कवच है।

सुरक्षा उपकरणों की नियमित जांच

अग्निशमन विभाग समय-समय पर भवनों का निरीक्षण करता है। सुरक्षा के नियमों का पालन न करने वाली संस्थाओं पर नोटिस भेजने से लेकर जुर्माना लगाने और लाइसेंस रद्द करने जैसी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। ऊंची इमारतों में फायर लिफ्ट, पानी का पर्याप्त भंडारण और बैकअप पावर सिस्टम का होना अनिवार्य है। इसके साथ ही विद्युत वायरिंग और गैस पाइपलाइन की नियमित जांच करना भी सुरक्षा की दृष्टि से बेहद आवश्यक है, ताकि शॉर्ट सर्किट जैसे कारणों से होने वाले हादसों को रोका जा सके।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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