एक्सप्लेनर: Edge AI क्या है और कैसे यह बदल देगा आने वाली टेक्नोलॉजी, समझें आसान भाषा में भारत एक घंटा पहले 1
भारत ने हाल ही में अपना पहला Edge AI चिप तैयार किया है, जिसके बाद इस तकनीक को लेकर चर्चा तेज हो गई है। जानिए Edge AI आखिर है क्या, यह कैसे काम करता है और पारंपरिक AI से किस तरह अलग है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जिस रफ्तार से आगे बढ़ रहा है, उसने चिप बनाने वाली कंपनियों के सामने नई चुनौतियां और अवसर दोनों खड़े कर दिए हैं। एआई एजेंट्स को सुचारू रूप से चलाने के लिए हाई एफिशिएंसी चिप की दरकार होती है, और यही वजह है कि दुनिया भर की बड़ी सेमीकंडक्टर कंपनियां इन दिनों ऐसे ही चिप डिजाइन करने में जुटी हैं। अब भारत भी इस दौड़ में शामिल हो चुका है।

भारतीय टेक कंपनी Zoho ग्रुप द्वारा बैक किए गए स्टार्टअप Netrasemi ने हाल ही में देश का पहला Edge AI सिस्टम ऑन चिप A2000 लॉन्च किया है। यह चिप IoT डिवाइस को और एडवांस बनाने का काम करेगा। माना जा रहा है कि आने वाले वक्त में Edge AI का ही बोलबाला रहने वाला है।

आखिर Edge AI है क्या?

अब तक हम जिस AI के बारे में जानते आए हैं, उसमें इंसान की ओर से दिए गए कमांड के आधार पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस काम करता है। इसमें ह्यूमन-टू-मशीन इंटरेक्शन होता है। Edge AI इसी का एक उन्नत रूप है, जिसमें एआई और मशीन लर्निंग मॉडल आपस में एक-दूसरे के साथ इंटरैक्ट कर पाते हैं।

सीधे शब्दों में कहें तो जब मशीनों को आपस में एआई के जरिए कम्युनिकेट करना होता है, तब Edge AI चिप की जरूरत पड़ती है। माना जा रहा है कि भविष्य में यही तकनीक बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होने वाली है।

कैसे काम करती है यह तकनीक?

Edge AI पूरी तरह से Edge कम्प्यूटिंग पर आधारित है। इसमें एआई मॉडल को सीधे डिवाइस पर ही चलाया जा सकता है, यानी डेटा प्रोसेसिंग के लिए किसी क्लाउड सर्वर पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं रहती।

यह तकनीक स्मार्टफोन, सेंसर और कैमरे जैसे उपकरणों द्वारा इकट्ठा किए गए डेटा को उसी डिवाइस के भीतर प्रोसेस कर देती है। खास बात यह है कि इसमें इंटरनेट के बिना भी एआई काम करता रहता है। इसी वजह से Edge AI को भविष्य की तकनीक के तौर पर देखा जा रहा है, जहां डेटा प्रोसेसिंग सिस्टम के भीतर ही पूरी हो जाए। इसके लिए Edge AI वाले चिप की आवश्यकता होगी।

इसके फायदे क्या हैं?

Edge AI तकनीक की वजह से किसी भी डिवाइस को डेटा प्रोसेस करने में ज्यादा समय नहीं लगेगा, क्योंकि यह काम ऑन-डिवाइस ही हो जाएगा। इसके साथ ही इंटरनेट का इस्तेमाल भी काफी कम किया जा सकेगा।

  • सारा काम लोकली होने से डेटा प्राइवेसी बनी रहती है।
  • डेटा प्रोसेसिंग तेज और ऑन-डिवाइस होती है।
  • इंटरनेट पर निर्भरता घट जाती है।

फिलहाल यह तकनीक स्मार्टफोन, कैमरा और इंडस्ट्रियल सेंसर में इस्तेमाल की जा रही है।

पारंपरिक AI से कितना अलग है?

मौजूदा एआई मॉडल क्लाउड बेस्ड हैं, जिनमें डेटा को रिमोट सर्वर पर भेजा जाता है और इसके लिए GPU की जरूरत पड़ती है। इस प्रक्रिया में प्राइवेसी को लेकर खतरा बना रहता है और साथ ही इंटरनेट पर निर्भरता भी बनी रहती है।

इसके उलट, Edge AI में डेटा को लोकली प्रोसेस किया जाता है, जिससे तेज रियल-टाइम रिस्पॉन्स मिलता है। डेटा डिवाइस से बाहर नहीं जाता, इसलिए यह ज्यादा सुरक्षित भी रहता है। इस समय बाजार में मौजूद स्मार्ट स्पीकर्स, वर्चुअल असिस्टेंट, वियरेबल डिवाइस और फिटनेस ट्रैकर जैसे उपकरण Edge AI पर ही काम करते हैं।

एक और बड़ा फर्क बिजली की खपत का है। पारंपरिक AI टूल इस्तेमाल करने पर बहुत ज्यादा बिजली की जरूरत पड़ती है, जबकि Edge AI कम पावर खर्च करता है और बैटरी से चलने वाले डिवाइस पर भी आसानी से काम करता है।

भविष्य में क्या होंगे फायदे?

Edge AI मॉडर्न कम्प्यूटिंग के लिए बेहद अहम ट्रेंड माना जा रहा है। इसकी मदद से हेल्थ मॉनिटर से लेकर स्मार्ट कैमरा, सेल्फ ड्राइविंग कार और प्लांट में लगी मशीनें खुद ही फैसले ले सकती हैं। चूंकि इसकी निर्भरता किसी क्लाउड सर्वर पर नहीं रहती, इसलिए यह तेजी से निर्णय लेने में सक्षम है।

जानकारों का मानना है कि आने वाले समय में 6G इंटिग्रेशन के बाद Edge AI का और भी ज्यादा एडवांस रूप देखने को मिल सकता है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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