शिक्षा
2 महीने पहले
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परीक्षा रद्द होने की पृष्ठभूमि
हाल ही में जयपुर के कालवाड़ स्थित प्रभा देवी मेमोरियल पीजी कॉलेज में पैरामेडिकल डिप्लोमा परीक्षा के दौरान बड़े पैमाने पर नकल पकड़ी गई थी। इस घटना के बाद संबंधित प्रथम वर्ष की पूरी परीक्षा को निरस्त कर दिया गया है। यह परीक्षा राजस्थान स्टेट अलाइड एंड हेल्थकेयर काउंसिल द्वारा संचालित की जाती है। यह डिप्लोमा मुख्य रूप से हृदय संबंधी जांच करने वाले तकनीकी विशेषज्ञों को तैयार करने के लिए आयोजित किया जाता है। परीक्षा में गड़बड़ी पाए जाने के बाद अब छात्र और अभिभावक इस कोर्स से जुड़ी बारीकियों को जानने के इच्छुक हैं।
कौन सा कोर्स है यह?
जिस कोर्स की परीक्षा को रद्द किया गया है, उसका नाम डिप्लोमा इन ईसीजी टेक्नोलॉजी (Diploma in ECG Technology) है। यह एक 2 साल की अवधि का डिप्लोमा कार्यक्रम है। इस कोर्स में प्रवेश लेने के लिए उम्मीदवार का 12वीं कक्षा में विज्ञान संकाय से उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। माध्यमिक शिक्षा पूरी करने वाले छात्र ही इस तकनीकी पाठ्यक्रम में दाखिला ले सकते हैं।
पाठ्यक्रम और विषय
इस डिप्लोमा कोर्स के दौरान छात्रों को हृदय रोग और तकनीकी जांच से जुड़ी गहन जानकारी दी जाती है। कोर्स के मुख्य विषयों में ह्यूमन एनाटॉमी एंड फिजियोलॉजी (Human Anatomy & Physiology), ईसीजी मशीन हैंडलिंग (ECG Machine Handling), कार्डियक डिजीज (Cardiac Diseases), इलेक्ट्रोकार्डियोग्राफी (Electrocardiography), पेशेंट केयर (Patient Care), इमरजेंसी केयर (Emergency Care) और विस्तृत प्रैक्टिकल ट्रेनिंग शामिल हैं। सिलेबस के भीतर ईसीजी टेक्नोलॉजी को एक स्वतंत्र पैरामेडिकल डिप्लोमा के रूप में स्थान दिया गया है।
सीटों की उपलब्धता
इस कोर्स में सीटों की संख्या को लेकर अक्सर सवाल पूछे जाते हैं। राजस्थान के अलग-अलग पैरामेडिकल कॉलेजों में सीटों का निर्धारण भिन्न होता है। आमतौर पर निजी कॉलेजों में 20 से 40 सीटें उपलब्ध होती हैं, जबकि कुछ प्रमुख संस्थानों में यह संख्या 60 तक भी हो सकती है। राज्य स्तर पर कुल सीटों का कोई एक निश्चित सार्वजनिक आंकड़ा नहीं है, क्योंकि कॉलेजों की मान्यता और बुनियादी ढांचे के आधार पर हर साल सीटों की संख्या में बदलाव होता रहता है।
दाखिला प्रक्रिया और भविष्य की संभावनाएं
दाखिला प्रक्रिया की बात करें तो 12वीं में भौतिकी, रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान या गणित विषय के साथ उत्तीर्ण छात्र आवेदन करने के पात्र होते हैं। चयन की प्रक्रिया मुख्य रूप से काउंसलिंग और मेरिट के आधार पर पूरी की जाती है, हालांकि कुछ निजी संस्थान सीधे दाखिला भी प्रदान करते हैं। यह कोर्स करने के बाद सरकारी और निजी अस्पतालों के अलावा कार्डियोलॉजी सेंटर, डायग्नोस्टिक लैब, आईसीयू (ICU) एवं सीसीयू (CCU) यूनिट तथा विशेष हृदय अस्पतालों में रोजगार के बेहतरीन अवसर उपलब्ध रहते हैं।
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