पश्चिमी चंपारण में बाघ का आतंक: बछड़े का शिकार कर दहलाया गांव, सहमे लोग घरों में कैद बिहार एक महीने पहले 58
बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले में एक बाघ ने बछड़े का शिकार कर ग्रामीण इलाकों में दहशत फैला दी है। वन विभाग ने घटना की पुष्टि की है और लोगों को सतर्क रहने की चेतावनी दी है।

ग्रामीण इलाके में बाघ की दस्तक से फैली दहशत

बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले से एक बेहद चौंकाने वाली और डरावनी घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके में डर का माहौल पैदा कर दिया है। रामनगर प्रखंड के अंतर्गत आने वाले बड़ा बेलवा गांव में बाघ की मौजूदगी ने न केवल स्थानीय निवासियों बल्कि वन विभाग के अधिकारियों की नींद भी उड़ा दी है। जंगल के इस सबसे खूंखार शिकारी ने गांव के पास अपना ठिकाना बनाया है, जिससे ग्रामीणों में अपनी और अपने मवेशियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।

मसान नदी के पास बछड़े को बनाया निशाना

यह पूरी घटना गुरुवार की शाम को घटित हुई। बड़ा बेलवा गांव के निवासी सुधीर यादव अपने मवेशियों को चराने के लिए मसान नदी के पास स्थित सरेह में ले गए थे। इसी दौरान गन्ने के खेतों में घात लगाकर बैठे एक बाघ ने अचानक बछड़े पर हमला कर दिया। बाघ ने बड़ी ही क्रूरता के साथ बछड़े को अपना शिकार बना लिया। जब शाम को सुधीर यादव अपने बाकी मवेशियों के साथ घर लौटने लगे, तो उन्हें बछड़ा नदारद मिला। पहले उन्होंने अपने स्तर पर तलाश की, लेकिन सफलता नहीं मिलने पर उन्होंने गांव के अन्य लोगों की मदद ली। खोजबीन के दौरान उन्हें सरेह में बछड़े का आधा बचा हुआ शव मिला, जिसे देखकर ग्रामीणों के होश उड़ गए।

पगचिह्नों से पुष्टि, वन विभाग अलर्ट पर

ग्रामीणों ने जब घटनास्थल के आसपास के इलाके की गहन छानबीन की, तो उन्हें वहां बाघ के पंजों के निशान (पगचिह्न) स्पष्ट रूप से दिखाई दिए। इस जानकारी के मिलते ही इलाके में हड़कंप मच गया। घटना की सूचना तुरंत वन विभाग को दी गई, जिसके बाद रघिया रेंज के रेंजर राजेश राम की अगुवाई में वन कर्मियों की एक टीम फौरन मौके पर पहुंच गई। अंधेरा होने के कारण उस वक्त कोई बड़ा ऑपरेशन चलाना संभव नहीं था, लेकिन रेंजर ने स्पष्ट कर दिया कि जो निशान मिले हैं, वे वाकई बाघ के ही हैं।

ग्रामीणों के लिए घर से निकलना हुआ मुश्किल

बाघ की मौजूदगी के बाद से पूरा गांव डर के साए में जी रहा है। लोग अपनी सुरक्षा को लेकर इतने सहमे हुए हैं कि वे सूरज ढलने के बाद अपने घरों से बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। रेंजर राजेश राम ने ग्रामीणों को सख्त हिदायत दी है कि वे फिलहाल अकेले खेतों की तरफ न जाएं और पूरी सावधानी बरतें। चूंकि यह खेती का मुख्य सीजन है, इसलिए किसानों को अपने खेतों की रखवाली करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वे डरे हुए हैं कि काम के दौरान फिर से बाघ का सामना न हो जाए।

बाघ की तलाश जारी, लोकेशन ट्रेस करने में जुटी टीम

शुक्रवार की सुबह से ही चिउंटाहा और रघिया रेंज के वनकर्मी मिलकर बाघ की खोजबीन में लगे हुए हैं। टीम बाघ के पगचिह्नों का पीछा कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि वह किस दिशा की ओर गया है और वर्तमान में कहां छिपा है। हालांकि, घंटों की मशक्कत और लगातार सर्च ऑपरेशन के बावजूद अभी तक वन विभाग के हाथ कोई ठोस सुराग नहीं लगा है। वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे मवेशियों को अकेले न छोड़ें और उन पर कड़ी नजर रखें। जब तक बाघ को पकड़ा नहीं जाता या उसे वापस जंगल की ओर खदेड़ा नहीं जाता, तब तक ग्रामीणों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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