राष्ट्रीय राजनीति
एक घंटा पहले
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पश्चिम बंगाल में नागरिकता संशोधन कानून यानी सीएए के विरोध में हुई हिंसा की बंद पड़ी फाइलें एक बार फिर सामने आने वाली हैं। साल 2019 में इस कानून के खिलाफ प्रदर्शनों के दौरान रेलवे की संपत्तियों को जो क्षति पहुंची थी, उन मामलों में अब नए सिरे से कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से अपनाए गए तरीके की तर्ज पर बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने राज्य भर में दर्ज सभी मामलों की दोबारा पड़ताल करने और दोषियों से आर्थिक नुकसान की वसूली कराने के निर्देश दिए हैं।
एक रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ शनिवार को हुई बैठक में मुख्यमंत्री सुवेंदु ने राज्य के पुलिस महानिदेशक एसएन गुप्ता को 2019 के सीएए विरोध प्रदर्शनों से जुड़े तमाम मामलों की समीक्षा करने को कहा। अधिकारियों के मुताबिक इस निर्णय के बाद उस दौर की सभी लंबित और बंद की जा चुकी फाइलें दोबारा खोली जाएंगी।
93 करोड़ रुपये की पहुंची थी क्षति
रेलवे अधिकारियों के अनुसार दिसंबर 2019 के विरोध प्रदर्शनों के दौरान कई इलाकों में हिंसा भड़क उठी थी। उपद्रवियों ने रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों को निशाना बनाया, जिसके चलते रेलवे को करीब 93 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा।
13 दिसंबर 2019 को उलुबेरिया के नजदीक फलकनुमा एक्सप्रेस पर पथराव हुआ था। इसके बाद मुर्शिदाबाद के बेलडांगा रेलवे स्टेशन को 15 और 16 दिसंबर को दो बार आग के हवाले किया गया। वहीं कृष्णापुर स्टेशन पर पांच ट्रेनों को जला दिया गया था। इसी दौरान रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) की टीम पर भी हमला किया गया था।
अब दोषियों से वसूली की तैयारी
अधिकारियों का कहना है कि उस वक्त कानून में प्रावधान मौजूद होने के बावजूद नुकसान की भरपाई के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया था। अब सरकार चाहती है कि सार्वजनिक संपत्ति को क्षति पहुंचाने वालों से सीधे आर्थिक मुआवजा वसूला जाए।
कौन से कानून लगेंगे
सरकारी अधिकारियों ने बताया कि इस मामले में दो प्रमुख कानूनी प्रावधानों का सहारा लिया जा सकता है। पहला, वेस्ट बंगाल मेंटेनेंस ऑफ पब्लिक ऑर्डर (संशोधन) अधिनियम, जिसके तहत प्रभावित क्षेत्र के लोगों से सामूहिक मुआवजा वसूला जा सकता है। दूसरा, प्रिवेंशन ऑफ डैमेज टू पब्लिक प्रॉपर्टी एक्ट, जिसके अंतर्गत सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के दोषियों को पांच साल तक की कठोर सजा और आर्थिक दंड दोनों का सामना करना पड़ सकता है।
पुराने मामलों की दोबारा होगी जांच
सरकारी सूत्रों के मुताबिक पुलिस और रेलवे प्रशासन अब उन सभी मामलों की फाइलें फिर से खंगालेंगे, जिनमें रेलवे स्टेशनों, ट्रेनों और दूसरी सार्वजनिक संपत्तियों को क्षति पहुंचाई गई थी। जांच के आधार पर जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनसे नुकसान की भरपाई कराने की प्रक्रिया आरंभ की जाएगी।
सरकार के इस कदम को 2019 के हिंसक प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है। इससे उन लोगों पर कानूनी और आर्थिक दबाव बढ़ने की आशंका है, जिन पर रेलवे संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने के आरोप हैं।
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