भारत
2 घंटे पहले
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विचारों
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस इन दिनों भीतरी टूट-फूट के दौर से गुजर रही है। विधायक, सांसद से लेकर पार्षद तक कई नेता एक-एक कर पार्टी से किनारा कर रहे हैं। कभी ममता के बेहद नज़दीकी माने जाने वाले चेहरे भी अब उनसे दूरी बना चुके हैं। बताया जा रहा है कि टीएमसी के बागी खेमे के लोकसभा सांसद सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात करने वाले हैं। पार्टी की इसी डांवाडोल स्थिति के बीच लोकसभा सांसद शत्रुघ्न सिन्हा का एक अहम बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने ममता के भतीजे और सांसद अभिषेक बनर्जी से साफ दूरी जता दी है। सिन्हा ने दो टूक कहा कि अभिषेक बनर्जी उनके नेता नहीं हैं, उनकी नेता केवल ममता बनर्जी हैं।
'हमेशा ममता बनर्जी के साथ रहूंगा'
शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा, "मैं ममता दीदी के साथ था, उनके साथ हूं और हमेशा उनके साथ ही रहूंगा। न तो अभिषेक बनर्जी और न ही कोई और मेरा नेता है। मेरी नेता सिर्फ ममता बनर्जी हैं। यह एकजुटता दिखाने और उनके साथ खड़े होने का समय है, उन्हें छोड़ने का नहीं। ममता बनर्जी एक परिपक्व और अनुभवी नेता हैं।"
'अकेला रह गया तो भी एकला चलो'
सांसद ने आगे कहा, "मैं किसी का नाम नहीं लूंगा। मैं लगभग 30 साल तक बीजेपी में रहा हूं। पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने मुझे बहुत कुछ सिखाया और समझाया है। अगर उन्होंने मेरे बारे में कुछ कहा भी होगा तो अच्छी नीयत से ही कहा होगा, मगर मेरे लिए ममता बनर्जी के साथ रहना ही सबसे बेहतर है। मैं हमेशा उनके साथ रहूंगा। अगर मैं अकेला भी रह गया, तो भी 'एकला चलो' यानी अकेले चलने का मंत्र अपनाकर उन्हीं के साथ खड़ा रहूंगा। फिलहाल कहीं और जाने का मेरा कोई इरादा नहीं है।"
कल्याण बनर्जी की नाराज़गी
टीएमसी नेताओं के मुताबिक पार्टी में बगावत की सबसे बड़ी जड़ अभिषेक बनर्जी हैं। विधायक से लेकर सांसद तक कई नेता उनसे नाराज़ होकर विद्रोह की राह पर हैं। अब ममता के बेहद करीबी और खास सांसदों में गिने जाने वाले कल्याण बनर्जी भी नाराज़ बताए जा रहे हैं। गुरुवार को कल्याण बनर्जी ने भी कहा था कि ममता दीदी या तो मुझे चुनें या फिर अभिषेक को, फैसला उन्हीं के हाथ में है। उन्होंने ममता बनर्जी को अल्टीमेटम देते हुए कहा कि वे या तो अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी को चुनें या फिर उन्हें।
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