हमें चाहिए भारत की मदद, यहां राशन की है भारी कमी, PoK के नेता सरदार अमन खान ने की भावुक अपील विश्व एक महीने पहले 80
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में गहराते संकट के बीच स्थानीय नेता सरदार अमन खान ने भारत से मानवीय सहायता की गुहार लगाई है और नियंत्रण रेखा खोलने की मांग की है।

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में पिछले काफी समय से जारी अशांति और असंतोष अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। क्षेत्र में लगातार बिगड़ते हालातों के बीच, संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के प्रमुख नेता सरदार अमन खान ने भारत सरकार से मानवीय सहायता भेजने की गुहार लगाई है। अमन खान का कहना है कि पाकिस्तान की दमनकारी नीतियों और तानाशाही रवैये ने इस पूरे इलाके को एक विनाशकारी मानवीय संकट के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है। यहां बुनियादी चीजों और राशन की भारी किल्लत हो गई है और आम नागरिकों का जीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो चुका है।

नियंत्रण रेखा को पार करने और भारत में शरण लेने की मांग

रावलकोट के ऐतिहासिक ईदगाह मैदान में आयोजित एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए सरदार अमन खान ने सीधे तौर पर नियंत्रण रेखा (LoC) को खोलने की मांग उठाई। उन्होंने जनसभा में उमड़े भारी जनसैलाब से पूछा कि क्या उन्हें अपने अधिकारों के लिए नियंत्रण रेखा की तरफ कूच करना चाहिए? इस पर वहां मौजूद हजारों लोगों ने एक सुर में बार-बार नारा लगाया, "उसकी ओर बढ़ो।"

सरदार अमन खान ने विशेष रूप से पुंछ और डोडा सेक्टरों में नियंत्रण रेखा को खोलने की वकालत की। उनका तर्क था कि पाकिस्तानी हुकूमत की दमनकारी हरकतों ने आम कश्मीरियों के जीवन को नर्क बना दिया है। खान ने स्थानीय प्रशासन और पाकिस्तानी सुरक्षा बलों को चेतावनी देते हुए कहा कि वे निहत्थे नागरिकों पर बल प्रयोग करना बंद करें। उन्होंने साफ लफ्जों में कहा कि अगर जनता की जायज मांगों और हक की आवाज को गोलियों के दम पर दबाने की कोशिश की गई, तो हमारे पास अन्य रास्तों पर चलने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।

पूरे जम्मू-कश्मीर क्षेत्र के नाम विशेष वीडियो संदेश

इस ऐतिहासिक जनसभा के ठीक एक दिन बाद, सरदार अमन खान ने एक नया वीडियो संदेश जारी किया। इस वीडियो के माध्यम से उन्होंने अपनी अपील का दायरा और बढ़ा दिया। उन्होंने न केवल PoK बल्कि श्रीनगर, बारामूला, पुंछ, राजौरी, जम्मू, लद्दाख, कारगिल और गिलगित-बाल्टिस्तान सहित संपूर्ण जम्मू और कश्मीर क्षेत्र के नागरिकों को संबोधित किया।

अपने संदेश में उन्होंने दावा किया कि पिछले करीब 1 महीने से पूरे जम्मू-कश्मीर क्षेत्र के लोग अत्यधिक मानसिक दबाव, दमन और सरकारी उत्पीड़न का सामना कर रहे हैं। खान ने इस क्षेत्र के सभी नागरिकों से एकजुट होने और मौजूदा समय में हो रहे घटनाक्रमों के प्रति पूरी तरह सतर्क व जागरूक रहने की अपील की। उनका कहना था कि अब चुप बैठने का समय चला गया है और सभी को अपने अधिकारों के लिए खड़ा होना होगा।

आखिर क्यों सुलग रहा है पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर?

PoK के नेता की यह अपील ऐसे नाजुक समय में आई है जब पूरा क्षेत्र सरकार विरोधी प्रदर्शनों की आग में झुलस रहा है। शुरुआत में ये विरोध प्रदर्शन केवल आर्थिक तंगहाली, आटे-राशन की भारी कमी, बिजली के बढ़े हुए बिलों और खराब शासन व्यवस्था जैसे बुनियादी मुद्दों को लेकर शुरू हुए थे। लेकिन धीरे-धीरे इन प्रदर्शनों ने एक बड़े राजनीतिक आंदोलन का रूप अख्तियार कर लिया है।

हाल ही में आयोजित एक विशाल विरोध रैली के दौरान प्रदर्शनकारियों के तेवर बेहद आक्रामक नजर आए। प्रदर्शनकारियों ने खुलेआम सड़कों पर उतरकर "कश्मीर पाकिस्तान का हिस्सा नहीं है" और "हमें आजादी चाहिए" जैसे गगनभेदी नारे लगाए। इन नारों से साफ जाहिर होता है कि इस क्षेत्र पर इस्लामाबाद के जबरन नियंत्रण और सौतेले व्यवहार को लेकर स्थानीय लोगों के भीतर किस कदर गुस्सा और नफरत भरी हुई है।

प्रतिबंधों और गिरफ्तारियों ने आग में डाला घी

हाल के हफ्तों में इस अशांत क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। प्रदर्शनकारियों पर कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं, बड़े पैमाने पर धरपकड़ की जा रही है और सुरक्षा अभियानों के तहत कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया जा रहा है। इन सब दमनकारी नीतियों के कारण जनता का गुस्सा और भड़क गया है। स्थिति तब और अधिक संवेदनशील हो गई जब पाकिस्तानी अधिकारियों ने 5 जून को जमीनी स्तर पर सक्रिय संगठन संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया और इसे एक 'आतंकवादी' संगठन घोषित कर दिया।

इस प्रतिबंध के बाद पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने कार्यकर्ताओं और आंदोलनकारियों के खिलाफ एक व्यापक और बर्बर कार्रवाई शुरू कर दी। राजनीतिक विश्लेषकों और जानकारों का मानना है कि इस दमनकारी कदम ने हालात को सुधारने के बजाय और बिगाड़ दिया है। इस संकट ने यह पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है कि PoK की जनता और वहां के स्थानीय राजनीतिक प्रशासन के बीच एक बहुत बड़ी खाई पैदा हो चुकी है। वहां के स्थानीय प्रशासन पर लंबे समय से यह आरोप लगता रहा है कि वह स्वतंत्र रूप से काम करने के बजाय पूरी तरह से इस्लामाबाद के इशारों और दबाव में काम करता है।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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