अपराध का शतकवीर: मथुरा में पुलिस पर हमला कर भागने की कोशिश में एनकाउंटर क्राइम एक घंटा पहले 3
दिल्ली के कुख्यात अपराधी वसीम अकरम उर्फ लम्बू को पश्चिम बंगाल से लाते समय यमुना एक्सप्रेसवे पर मुठभेड़ हो गई, जिसमें उसने पुलिस की पिस्तौल छीनकर फायरिंग कर दी और जवाबी कार्रवाई में घायल हो गया।

दिल्ली का मोस्ट वांटेड और खौफनाक सफर

राजधानी दिल्ली के जहांगीरपुरी इलाके का कुख्यात बदमाश वसीम अकरम उर्फ लम्बू, जिसके नाम पर कुल 118 आपराधिक मामले दर्ज हैं, एक बार फिर चर्चा में है। दिल्ली पुलिस की एक टीम उसे पश्चिम बंगाल से हिरासत में लेकर वापस दिल्ली ला रही थी, लेकिन यमुना एक्सप्रेसवे पर सफर के दौरान उसने भागने की खतरनाक साजिश रची। इस दौरान पुलिस और अपराधी के बीच हुई जबरदस्त मुठभेड़ में सब-इंस्पेक्टर अजय कुमार घायल हो गए, जबकि पुलिस की जवाबी कार्रवाई में अपराधी के पैर में गोली लगी है।

जहांगीरपुरी में दिनदहाड़े हत्याकांड से हुई शुरुआत

डीसीपी नॉर्थ-वेस्ट दिल्ली आकांक्षा यादव के मुताबिक, इस पूरी घटना की जड़ें 18 जुलाई 2026 को जहांगीरपुरी में हुई एक सनसनीखेज हत्या में छिपी हैं। उस दिन शाम करीब 8 बजे, जहांगीरपुरी की बी और सी मार्केट रोड पर इरफान नाम के एक 20 वर्षीय युवक पर हमला किया गया। वहां तैनात हेड कॉन्स्टेबल कृष्ण कुमार यादव और सोहन लाल ने देखा कि 15 से 20 हमलावर युवक पर टूट पड़े हैं, जिनमें 5 से 6 महिलाएं भी शामिल थीं। हमलावर चाकुओं से लैस थे और बड़ी बेरहमी से युवक को पीट रहे थे। पुलिस टीम ने युवक को बचाने की कोशिश की, लेकिन वसीम अकरम ने अपने साथियों के साथ पुलिसकर्मियों को ही घेर लिया और उन पर चाकू से हमला कर दिया। हालात इतने बिगड़े कि आरोपी पुलिसकर्मियों को जबरन एक मकान के अंदर ले गए, जहाँ उन्होंने इरफान को मौत के घाट उतार दिया। घायल अवस्था में इरफान को बाबू जगजीवन राम अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। तब से ही वसीम अकरम पुलिस की पकड़ से दूर था।

118 अपराधों का काला चिट्ठा

पुलिस रिकॉर्ड बताते हैं कि वसीम अकरम उर्फ लम्बू केवल एक मामूली बदमाश नहीं, बल्कि अपराध की दुनिया का एक बड़ा नाम है। उसके खिलाफ दिल्ली के विभिन्न थानों में कुल 118 से अधिक एफआईआर दर्ज हैं। उसके काले कारनामों की सूची में हत्या, हत्या का प्रयास, डकैती, लूट, सरकारी कर्मचारियों पर जानलेवा हमला, पॉक्सो एक्ट, आर्म्स एक्ट, चोरी और सेंधमारी जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं। इसके अलावा रंगदारी वसूलना और लोगों को धमकाने के मामले भी उस पर दर्ज हैं। वह जहांगीरपुरी थाने का घोषित बैड कैरेक्टर है और पुलिस लंबे समय से उसे पकड़ने के लिए जाल बिछा रही थी।

पश्चिम बंगाल में मिला सुराग

इरफान हत्याकांड के बाद से ही दिल्ली पुलिस का स्पेशल स्टाफ वसीम की तलाश में जुटा था। काफी मशक्कत के बाद पुलिस को तकनीकी इनपुट मिले, जिससे पता चला कि वसीम पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम इलाके में छिपा हुआ है। नॉर्थ-वेस्ट जिले की स्पेशल टीम तुरंत पश्चिम बंगाल के लिए रवाना हुई। वहां पहुंचने के बाद पुलिस ने कई दिनों तक अपना भेष बदलकर वसीम की गतिविधियों पर नजर रखी। जब उसकी सही लोकेशन और मूवमेंट की पुष्टि हो गई, तब पुलिस ने उसे दबोच लिया। कानूनी प्रक्रिया के तहत पुलिस ने हल्दिया की अदालत से ट्रांजिट रिमांड ली, ताकि उसे 13 अगस्त 2026 तक रोहिणी अदालत में पेश किया जा सके।

यमुना एक्सप्रेसवे पर रची भागने की साजिश

11 और 12 अगस्त 2026 की मध्यरात्रि 12 बजे पुलिस टीम वसीम को लेकर दिल्ली के लिए निकली। यात्रा के दौरान आरोपी ने बार-बार शौचालय जाने का बहाना बनाकर गाड़ी रुकवाई। पुलिस ने उसकी शारीरिक और मानसिक स्थिति को देखते हुए कई बार गाड़ी रोकी। जब टीम यमुना एक्सप्रेसवे के मथुरा इलाके में पहुंची, तो वसीम ने एक बार फिर शौचालय जाने का अनुरोध किया। सुरक्षा के मद्देनजर एसआई अजय कुमार, हेड कॉन्स्टेबल हरीश, जोगेंद्र, सत्य नरेंद्र और नरसी राम उसे वाहन से नीचे ले आए।

पुलिस टीम पर फायरिंग और जवाबी कार्रवाई

गाड़ी से नीचे उतरते ही वसीम ने अचानक हेड कॉन्स्टेबल हरीश पर हमला कर दिया और उनकी सरकारी 9 एमएम सर्विस पिस्तौल छीन ली। पिस्तौल मिलते ही उसने भागने की कोशिश की। पुलिस ने उसे रुकने और हथियार डालने की चेतावनी दी, लेकिन वह फायरिंग करता रहा। इस दौरान एक गोली एसआई अजय कुमार के बाएं हाथ में जा लगी। वसीम का हौसला इतना बढ़ गया था कि उसने हेड कॉन्स्टेबल नरसी राम की ओर भी पिस्तौल तान दी। आत्मरक्षा में पुलिस ने भी गोली चलाई, जो सीधे वसीम के दाएं पैर में घुटने के नीचे लगी। गोली लगते ही वह जमीन पर गिर गया और पिस्तौल दूर जा गिरी। तुरंत उसे काबू कर लिया गया और घायल एसआई अजय कुमार के साथ उसे नजदीकी अस्पताल ले जाया गया। प्राथमिक इलाज के बाद पुलिस अब आरोपी को लेकर दिल्ली पहुंच चुकी है।

सान्वी राणा पाबना के क्राइम एवं राज्य रिपोर्टर हैं, जो अपराध और विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें कवर करते हैं। कानून-व्यवस्था, जांच और बड़ी आपराधिक घटनाओं की वे जिम्मेदार रिपोर्टिंग करते हैं। तथ्यों की पुष्टि और संवेदनशीलता उनके काम की पहचान हैं।

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