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एक घंटा पहले
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खनन और धातु क्षेत्र में सक्रिय वेदांता ग्रुप ने अपने तांबा और निकल कारोबार को नई पहचान दे दी है। समूह ने तांबा बिजनेस का नाम बदलकर 'वेदांता कॉपर' और निकल बिजनेस का नाम बदलकर 'वेदांता निकल' कर दिया है। यह फैसला अलग-अलग क्षेत्रों पर केंद्रित और स्पष्ट पहचान खड़ी करने की समूह की रणनीति के अनुरूप लिया गया है।
तांबा कारोबार की सभी इकाइयां 'वेदांता कॉपर' के नीचे
समूह की प्रमुख कंपनी वेदांता लिमिटेड ने सोमवार को जारी एक बयान में बताया कि ब्रांड को नए सिरे से स्थापित करने की इस पहल के तहत स्टरलाइट कॉपर, फुजैरा गोल्ड और वेदांता कॉपर इंटरनेशनल (VCI) समेत तांबा कारोबार से जुड़ी तमाम इकाइयों को अब 'वेदांता कॉपर' ब्रांड के अंतर्गत एक साथ लाया जाएगा।
'वेदांता निको' की नई पहचान बनी 'वेदांता निकल'
वेदांता कॉपर इंटरनेशनल इस तांबा कारोबार का अंतरराष्ट्रीय हिस्सा होगा, जो संयुक्त अरब अमीरात के फुजैरा और सऊदी अरब में चल रहे परिचालन का प्रतिनिधित्व करेगा। इसी क्रम में 'वेदांता निको' को अब 'वेदांता निकल' के नाम से जाना जाएगा। इसका मकसद देश में निकल जैसे अहम खनिजों के उत्पादन और आपूर्ति तंत्र को मजबूत करना है, जो बैटरी और ऊर्जा क्षेत्र में बदलाव के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। कंपनी के अनुसार, नए ब्रांड नामों को चरणबद्ध ढंग से लागू किया जाएगा, हालांकि दोनों कारोबार पहले की तरह वेदांता लिमिटेड के दायरे में ही संचालित होते रहेंगे।
नाम बदलने के पीछे कंपनी का मकसद
वेदांता के बयान के मुताबिक, यह बदलाव 'वेदांता 2.0' रणनीति का एक हिस्सा है, जिसका उद्देश्य कारोबार को अधिक संगठित, स्पष्ट और बाजार में आसानी से पहचाने जाने योग्य बनाना है। माना जा रहा है कि इससे परिचालन में बेहतर तालमेल बनेगा, बाजार में कंपनी की मौजूदगी अधिक दिखेगी और निवेशकों समेत अन्य हितधारकों के साथ जुड़ाव मजबूत होगा। क्षमता विस्तार की योजना के तहत वेदांता कॉपर ने अगले साल के अंत तक सालाना 460 किलो टन (KTPA) उत्पादन का लक्ष्य रखा है, जबकि वेदांता निकल अपने मौजूदा 7 किलो टन प्रति वर्ष उत्पादन को बढ़ाकर 60 किलो टन प्रति वर्ष तक ले जाना चाहता है।
कारोबार को मजबूत और केंद्रित बनाने पर जोर
वेदांता कॉपर और वेदांता निकल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) पुनीत खुराना ने कहा, "एकीकृत पहचान के जरिए हम अपने कारोबार को मजबूत और अधिक केंद्रित बना रहे हैं, ताकि बदलती बाजार जरूरतों को बेहतर तरीके से पूरा किया जा सके और टिकाऊ वृद्धि हासिल हो सके।"
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